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शाह करना चाहते हैं संवाद, पर दिल्ली ब्लॉक की दे रहे धमकी…मेरा बहुत मतभेद है- बोले अर्नब, किसान नेता का जवाब- काम की बात करो, उलझाओ नहीं

सिंघु और टिकरी बॉर्डर समेत राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न बॉर्डर पर पिछले 17 दिनों से हजारों प्रदर्शनकारी जमा हैं। किसान संगठनों ने जयपुर-दिल्ली राजमार्ग बंद करने की घोषणा कर चुके हैं।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: December 13, 2020 6:28 PM
BKU, Rakesh Tikaitभारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत।

कृषि कानून को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच विवाद की स्थिति बरकरार है। जहां केंद्र सरकार लगातार आंदोलन में शामिल किसान नेताओं को बातचीत के लिए आगे आने की सलाह दे रही है, वहीं किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक वे दिल्ली घेराव और हाईवे जाम करना जारी रखेंगे। इसी पर रिपब्लिक टीवी पर बहस के दौरान एडिटर अर्नब गोस्वामी भड़क गए। उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत को घेरते हुए पूछा कि दिल्ली और हाईवे ब्लॉक करने की धमकी देना कहां का न्याय है। इस पर टिकैत ने कहा कि हम सीधे गांव के आदमी हैं। आप काम की बात करें, उलझाएं नहीं।

अर्नब ने पहले पूछा कि तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बंगाल के जो किसान हैं, उनकी कौन सुनेगा? आप तो पहुंच गए आर्मी लेकर। क्या पंजाब और हरियाणा के किसान ही किसान हैं? आप कह रहे हैं कि पूरे भारत के किसानों की बात कर रहे हैं। आज गृह मंत्री अमित शाह जी खुद संवाद करना चाहते हैं आपसे, मगर आप कह रहे हैं कि हम राजधानी को ब्लॉक कर देंगे। अब मेरा आपसे इस बात पर बहुत मतभेद हैं। आप राजधानी को भला क्यों रखेंगे, ये तो गलत बात है। आप वापस आने के तैयार हैं, बात करने के लिए।

हालांकि, इस पर राकेश टिकैत ने कहा कि हम तो उनकी भी बात कर रहे हैं, जो दूसरे राज्यों में खेती कर रहे हैं। आप काम की बात करिए, उलझाएं नहीं, हम सीधे आदमी हैं गांव के। हम तो सरकार से बात करना चाहते हैं सरकार से। बात कौन नहीं कर रहा। हमारी बात तो छह दौर की हो चुकी है। राजधानी में सब लोग आ रहे हैं। हमने दिल्ली को सील नहीं किया। हाईवे तो खुल रहे हैं।

सिंघु और टिकरी बॉर्डर समेत राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न बॉर्डर पर पिछले 17 दिनों से हजारों प्रदर्शनकारी जमा हैं और इस बीच किसान संगठनों ने जयपुर-दिल्ली राजमार्ग बंद करने की घोषणा की है। किसान केंद्र सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसान नेताओं ने अपनी मांगों पर कायम रहते हुए कहा कि वे सरकार से वार्ता को तैयार हैं, लेकिन पहले तीन नये कृषि कानूनों को निरस्त करने पर बातचीत होगी। किसानों ने घोषणा की कि उनकी यूनियनों के प्रतिनिधि 14 दिसंबर को देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

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