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देशवासियों क्या हम लोकतंत्र पर लठतंत्र को हावी होने दे सकते हैं? बंगाल में दूसरे फेज में हुई जबरदस्त वोटिंग पर अर्नब ने दी राय, जानें

दूसरे चरण के मतदान के दौरान जय श्रीराम के नारे पर हुई हिंसा. अर्नब ने पूछा- "क्या ममता के सामने जय श्री राम का नारा नहीं लग सकता?"

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र कोलकाता | Updated: April 2, 2021 12:14 AM
रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी। (द इंडियन एक्सप्रेस फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 80 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार टक्कर काफी दिलचस्प है, इसलिए वोटर भी बढ़-चढ़कर चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं। इस बीच रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने इस वोटर टर्नआउट को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने सीएम ममता बनर्जी और उनके प्रतिद्वंदी भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के टकराव पर कहा, “जनता ने खुलकर मतदान किया है पर आज पूरे दिन नंदीग्राम का रण कुरुक्षेत्र का मैदान बना रहा।”

अर्नब ने कहा, “नंदीग्राम में आज जमकर तांडव हुआ। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पोलिंग बूथ के अंदर थीं और बाहर हंगामा हो रहा था। ममता ने पोलिंग बूथ से ही आज राज्यपाल को फोन लगा दिया, उनसे हंगामे की शिकायत की। राज्यपाल ने भी भरोसा दिया कि जो होगा कानून के मुताबिक होगा।”

“ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि मुख्यमंत्री पोलिंग बूथ पर पहुंची हों और बाहर हंगामा शुरू हो गया हो। हुआ ये कि ममता बनर्जी जब पोलिंग बूथ पर पहुंचीं तो वहां मौजूद लोगों ने उनके सामने जय श्री राम का नारा लगा दिए, इसपर ममता के समर्थक भड़क गए, और वहां हंगामा शुरू हो गया। मैं पूछता हूं कि जय श्री राम के नारे से ममता बनर्जी के समर्थकों को क्यों परेशानी होती है? क्या ममता के सामने जय श्री राम का नारा नहीं लग सकता? दोस्तों, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी रैली में ऐसे ही सवाल उठाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को भगवा रंग से परेशानी है। तिलक और चोटी से परेशानी है।”

अर्नब ने अपने विश्लेषण में कहा, “बंगाल के चुनाव में एक अलग सी बेचैनी दिख रही है। हर दूसरे दिन बंगाल से हंगामे, हिंसा, हत्या की खबरें आ रही हैं। आज सुबह सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर भी हमला हुआ, मीडिया की गाड़ियों पर पत्थर चलाए गए। क्या हम ऐसी अराजकता की छूट दे सकते हैं। क्या ये हताशा नहीं है? दो मई को नतीजे आने वाले हैं, हार-जीत का फैसला होने वाला है पर उससे पहले हंगामा करने वाले आखिर साबित क्या करना चाहते हैं? देशवासियों क्या हम लोकतंत्र पर लठतंत्र को हावी होने दे सकते हैं?”

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