ताज़ा खबर
 

26 जनवरीः देश के लिए जो लड़े करगिल, अब ट्रैक्टर परेड में वह पूर्व-सैनिक ‘कमांडर’

आपको बता दें कि रामनाथ सिंह सिकरवार उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के रहने वाले हैं। रामनाथ सिंह ने करगिल युद्ध के समय एलओसी पर अपनी सेवा दी थी।

FARMERS, PROTESTतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस- गजेंद्र यादव

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली के बॉर्डर के पास किसान ट्रैक्टर रैली करेंगे। इस रैली में पूर्व आर्मी मैन रामनाथ सिंह सिकरवार भी हिस्सा लेंगे। रामनाथ सिंह सिकरवार करगिल की लड़ाई लड़ चुके हैं। कभी करगिल में देश के लिए लड़ाई लड़ चुके रामनाथ सिंह अब किसानों की लड़ाई लड़ने के लिए ट्रैक्टर रैली में हिस्सा लेंगे। 53 साल के सिकरवार सेना में पूर्व रडार तकनीशियन रहे हैं। वो इस वक्त युवाओं को रिपब्लिक डे पर होने वाले ट्रैक्टर परेड को लेकर ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। रामनाथ सिंह सिकरवार परेड कमांडर भी हैं।

रामनाथ सिंह इस वक्त युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं कि 26 जनवरी के दिन अगर वाटर कैनन या आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया तो कैसे उसका सामना करना है। इसके लिए 6 लोगों की quick response teams (QRT) बनाई गई है। मिलिट्री स्टाइल में इस टीम को कोड वर्ड्स दिये गये हैं। यह टीम, परेड कमांडर से मिले सिक्रेट सिग्नल पर काम करेगी। चिल्ला बॉर्डर पर परेड की जिम्मेदारी रामनाथ सिंह सिकरवार को दी गई है।

सिकरवार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘केंद्र सरकार किसानों की बात नहीं समझ रही है। हम दिल्ली में एक ऐतिहासिक परेड करेंगे। किसानों को अनुशासित रहने की ट्रेनिंग दी जा रही है। हजारों लोग सड़क के एक तरफ मार्च करेंगे और ट्रैक्टर लंबी कतारों में चलेंगे। 25 युवा किसानों को अलग-अलग तरह के टास्क दिये गये हैं। मैं इस परेड की निगरानी कुछ वरिष्ठ सदस्यों के साथ करूंगा।

एक्स आर्मी मैन ने कहा कि हम कोई चांस नहीं लेना चाहते हैं। अगर पुलिस ने वाटर कैनन या आंसू गैस का इस्तेमाल किया तब क्वीक रेस्पॉन्स टीम हरकत में आएगी। इस टीम की कोशिश होगी कि वो बुजुर्ग किसान और महिलाओं को जख्मी होने से बचाएं। सभी युवा किसानों को कड़ाई से निर्देश दिया गया है कि वो धैर्य रखें और शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद करें।’

आपको बता दें कि रामनाथ सिंह सिकरवार उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के रहने वाले हैं। रामनाथ सिंह ने करगिल युद्ध के समय एलओसी पर अपनी सेवा दी थी। साल 2004 में सेवानिवृत होने के बाद वो एक सामाजिक कार्यकर्ता बन गए। सिकरवार एक सामाजिक संगठन चलाते हैं जिसका नाम लक्षमण सेना है। यह संगठन भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ता है।

Next Stories
1 किसान आंदोलनः इधर शाह ने ली बड़ी बैठक, उधर अन्नदाताओं ने बताया आगे का प्लान
2 100, 10 और 5 रुपए के पुराने नोट चलेंगे या नहीं? RBI ने कही ये बात
3 सुभाष चंद्र बोस के पोट्रेट पर पनपा विवाद! जानें, क्या है पूरा मामला
ये पढ़ा क्या?
X