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गणतंत्र दिवस: राष्ट्रपति ने देश को किया संबोधित, कहा- नोटबंदी से अस्थाई मंदी आएगी, लेकिन पारदर्शिता बढ़ेगी

President Pranab Mukherjee Republic Day Speech: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारत के 68वें गणतंत्र दिवस की शाम को बुधवार को राष्ट्र को संबोधित किया।

Author Updated: January 25, 2017 7:48 PM
राष्ट्र को संबोधित करते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी। ( Photo Source: DD News/Twitter)

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारत के 68वें गणतंत्र दिवस की शाम को बुधवार को राष्ट्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा, ‘हमारे राष्ट्र के अड़सठवें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, मैं भारत और विदेशों में बसे आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं सशस्त्र बलों, अर्द्धसैनिक बलों और आंतरिक सुरक्षा बलों के सदस्यों को अपनी विशेष बधाई देता हूं। 15 अगस्त, 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ, हमारे पास अपना कोई शासन दस्तावेज नहीं था। हमने भाईचारे, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता को प्रोत्साहित करने का वचन दिया। उस दिन हम विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बन गए। भारतीय लोकतंत्र अशांति से ग्रस्त क्षेत्र में स्थिरता का मरूद्यान रहा है।’

उन्होंने कहा, ‘आज हम विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था हैं। हम वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति के दूसरे सबसे बड़े भंडार, तीसरी सबसे बड़ी सेना, न्यूक्लीयर क्लब के छठे सदस्य हैं। अंतरिक्ष की दौड़ में शामिल छठे सदस्य और दसवीं सबसे बड़ी औद्योगिक शक्ति हैं। एक निवल खाद्यान्न आयातक देश से भारत अब खाद्य वस्तुओं का एक अग्रणी निर्यातक बन गया है। अब तक की यात्रा घटनाओं से भरपूर, कभी-कभी कष्टप्रद, परंतु अधिकांशतः आनंददायक रही है। जैसे हम यहां तक पहुंचे हैं वैसे ही और आगे भी पहुंचेंगे। परंतु हमें बदलती हवाओं के साथ तेजी व दक्षतापूर्वक रुख में परिवर्तन करना सीखना होगा। प्रगतिशील और वृद्धिगत विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उन्नति से पैदा हुए तीव्र व्यवधानों को समायोजित करना होगा। नवाचार, और उससे भी अधिक समावेशी नवाचार को एक जीवनशैली बनाना होगा। मनुष्य और मशीन की दौड़ में, जीतने वाले को रोजगार पैदा करना होगा। प्रौद्योगिकी अपनाने की रफ्तार के लिए एक ऐसे कार्यबल की आवश्यकता होगी जो सीखने और स्वयं को ढालने का इच्छुक हो। हमारी शिक्षा प्रणाली को, हमारे युवाओं को जीवनपर्यंत सीखने के लिए नवाचार से जोड़ना होगा।’

साथ ही राष्ट्रपति ने कहा, ‘हमारी अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद, अच्छा प्रदर्शन करती रही है। यद्यपि हमारे निर्यात में अभी तेजी आनी बाकी है, परंतु हमने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार वाले स्थिर बाह्य क्षेत्र को कायम रखा है। काले धन को बेकार करते हुए और भ्रष्टाचार से लड़ते हुए, विमुद्रीकरण से आर्थिक गतिविधि में, कुछ समय के लिए मंदी आ सकती है। लेन-देन के अधिक से अधिक नकदीरहित होने से अर्थव्यवस्था की पारदर्शिता बढ़ेगी।’

यहां पढ़ें- राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संदेश

राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘स्वतंत्र भारत में जन्मी, नागरिकों की तीन पीढि़याँ औपनिवेशिक इतिहास के बुरे अनुभवों को साथ लेकर नहीं चलती हैं। इन पीढि़यों को स्वतंत्र राष्ट्र में शिक्षा और अवसरों को प्राप्त करने  तथा सपने पूरे करने का लाभ मिलता रहा है। इससे उनके लिए कभी-कभी स्वतंत्रता को हल्के में लेना आसान हो जाता है। लोकतंत्र ने हम सब को अधिकार प्रदान किए हैं। परंतु इन अधिकारों के साथ-साथ दायित्व भी आते हैं। आज युवा आशा और आकांक्षाओं से भरे हुए हैं। खुशहाली जीवन के मानवीय अनुभव का आधार है। खुशहाली समान रूप से आर्थिक और गैर आर्थिक मानदंडों का परिणाम है। खुशहाली के प्रयास सतत विकास के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं। हमें अपने  लोगों की खुशहाली और बेहतरी को लोकनीति का आधार बनाना चाहिए। सरकार की प्रमुख पहलों का निर्माण समाज के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। भारत का बहुलवाद और उसकी सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषायी और धार्मिक अनेकता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमारी परंपरा ने सदैव ‘असहिष्णु’ भारतीय नहीं बल्कि ‘तर्कवादी’ भारतीय की सराहना की है। सदियों से हमारे देश में विविध दृष्टिकोणों, विचारों और दर्शन ने शांतिपूर्वक एक दूसरे के साथ स्पर्द्धा की है।लोकतंत्र के फलने-फूलने के लिए, एक बुद्धिमान और विवेकपूर्ण मानसिकता की जरूरत है। एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सहिष्णुता, धैर्य और दूसरों का सम्मान जैसे मूल्यों का पालन करना आवश्यक है। ये मूल्य प्रत्येक भारतीय के हृदय और मस्तिष्क में रहने चाहिए।’

वीडियो - नोटबंदी पर पहली बार बोले राष्ट्रपति; कहा- “कुछ वक्त के लिए अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर”

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