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Republic Day 2020: राजपथ पर रफाल के कदमताल पर नजर, NDRF की झांकी होगी पहली बार शामिल

Republic Day 2020: इस बार राजपथ पर 22 झांकियां निकलेंगी। इनमें से छह विभिन्न विभागों की और 16 राज्यों की झांकियां होंगी।

Author नई दिल्ली | Updated: January 23, 2020 4:50 AM
एनडीआरएफ की झांकी को पहली बार राजपथ पर लाया जा रहा है।

Republic Day 2020: 26 जनवरी को राजपथ पर देश के शौर्य के साथ समृद्ध संस्कृति का भी प्रदर्शन होता है। राज्यों की संस्कृति बिखेरती झांकियों के साथ जो चीज आम लोगों को राजपथ पर जाने के लिए मजबूर करती है वह है सैन्य शक्ति का प्रदर्शन। इस बार भारत के सैन्य शक्ति की परेड में रफाल विमान की झांकी भी कदमताल करेगी। वहीं, उत्तर प्रदेश की झांकी में मसजिद की विरासत से लेकर कत्थक नृत्य के जरिए सूबे की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रदर्शन किया जाएगा।

इस बार एनडीआरएफ की झांकी को पहली बार राजपथ पर लाया जा रहा है। विभाग की ओर से भूकंप, बाढ़ जैसी कुदरती आपदाओं के साथ रासायनिक परमाणु हमलों से निपटने के तरीकों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं नौसेना मौन, ताकतवर और तीव्र का संदेश देते हुए खाड़ी देशों से जहाजों को सुरक्षित निकालने की झांकी पेश करेगी। तेल और मालवाहक जहाजों को फारस की खाड़ी से महफूज तरीके से निकालने का दृश्य राजपथ पर अपनी छाप छोड़ने में सफल होगा। एक बड़ी सी टोटी के नीचे कलात्मक तरीके से लगे मटके जल संरक्षण का संदेश देंगे तो गोवा की झांकी में विशालकाय शंख से लेकर जलपरी तक दिखेगी।

राजपथ पर निकलेंगी 22 झांकियां

इस बार राजपथ पर 22 झांकियां निकलेंगी। इनमें से छह विभिन्न विभागों की और 16 राज्यों की झांकियां होंगी। झांकियों को लेकर जनवरी के पहले हफ्ते में तब विवाद हो गया था जब केरल के कानून मंत्री ने आरोप लगाया था कि राजनीतिक विद्वेष के कारण केरल की झांकी को खारिज कर दिया गया है। इसके पहले पश्चिम बंगाल, महाराष्टÑ और बिहार की झांकी को भी खारिज कर दिया गया था। राजपथ पर उन्हीं झांकियों को प्रदर्शन के लिए चुना जाता है जिनको रक्षा मंत्रालय की तरफ से मंजूरी मिलती है।

अरुष चोपड़ा

उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत दिखेगी

गणतंत्र दिवस की परेड में उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। यह जानकारी दिनेश गुप्ता, प्रभारी निदेशक, राज्य सूचना विभाग, नई दिल्ली ने दी। 28 फीट लंबी इस मनोरम झांकी में काशी की निर्मल धारा में वहां की सांस्कृतिक विरासत का अविरल प्रवाह झलकेगा। दिनेश गुप्ता ने आगे बताया कि उत्तर प्रदेश की झांकी की विशेष बात यह होगी की उसमें उत्तर प्रदेश के सर्वधर्म समभाव की पारंपरिक विरासत के दर्शन भी होंगे। झांकी के केंद्र में देश की सनातन संस्कृति का प्रतीक काशी को छाया प्रदर्शित किया गया है।

झांकी के अगले हिस्से में बने प्लेटफार्म पर भारतीय शास्त्रीय संगीत से जुड़े वागयंत्रों, सितार, तबला, शहनाई और सारंगी दिखाई गई है। मंच के नीचे काशी में प्रवाहित गंगा और वहां की संस्कृति की अनोखी झलक दिखेगी। काशी की संगीत परंपरा को नई ऊंचाइयां प्रदान करने वाले प्रख्यात शहनाई वादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, तबला सम्राट पंडित शाम्ता प्रसाद और सर्वसमज्ञी विदूषी गिरिजा देवी की प्रतिक्रितियां दिखाई देंगी। कत्थक नृत्य करते कलाकार झांकी को सजीव बनाएंगे। नृत्य कर रहे कलाकारों के पीछे काशी की संत परंपरा को खास पहचान देने वाले संत कबीर, संत रविदास की प्रतिक्रितियां होंगी और उनके साथ ही बाराबंकी की मशहूर मजार देवा शरीफ के दर्शन भी होंगे।

सुरेंद्र सिंघल

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