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मैं डिबेट को लाइन में लाने वाला आदमी हूं- बोले अर्णब, पैनलिस्ट ने टोका- आप हमें लाकर तमाशा बना रहे हैं

अर्णब ने राजनीतिक विश्लेषक अहमद अयाज से कहा कि बोलिए यासीन मलिक खूनी है। इसपर पैनलिस्ट ने उन्हें टोका और कहा कि आप हमें यहां लाकर तमाशा मत बनाइये।

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कश्मीरी पंडित को घाटी में वापस भेजे जाने को लेकर न्यूज़ चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ के शो ‘पूछता है भारत’ में चर्चा हो रही थी। इस दौरान शो के एंकर अर्णब गोस्वामी और एक पैनलिस्ट के बीच कहा सुनी हो गई। अर्णब ने राजनीतिक विश्लेषक अहमद अयाज से कहा कि बोलिए यासीन मलिक खूनी है। इसपर पैनलिस्ट ने उन्हें टोका और कहा कि आप हमें यहां लाकर तमाशा मत बनाइये।

अर्णब ने कहा “जम्मू कश्मीर के मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव अहमद अयाज आप सचिव हैं अब मेरी बात का जवाब दें और मेरे पीछे बोलिए यासीन मलिक खूनी है। उसने कश्मीरी पंडितों का खून किया है।” इसपर अहमद अयाज ने कहा “आप तमीज से बात करोगे तो करूंगा नहीं तो जाइए। मैं आपके बोलने पर क्यों बोलू।” इसपर अर्णब ने कहा “मैंने कुछ गलत पूछ लिया क्या ?” इसपर अहमद अयाज ने कहा “आप कह रहे हैं वो ये है, वो वो है…. मैं आपकी बात क्यों मानू, कौन हो आप ?”

इसपर रिपब्लिक टीवी के एंकर ने कहा “मेरी बात सुनो शांति से सुनो, ये रिपब्लिक टीवी है यहां मेरे ऊपर चिल्लाना नहीं। बोलो यासीन मालिक खूनी है। मैं डिबेट को लाइन में लाने वाला आदमी हूं। ये तक वाला चैनल है क्या जो इधर उधर की बात करूंगा सीधी बात करता हूँ। इसपर राजनीतिक विश्लेषक ने कहा “आप यहां हमें बुला कर तमाशा बना रहे हैं। आप चर्चा के विषय से पलट रहे हैं।”

अर्णब ने अपने शो में कहा “धारा 370 हटने के बाद कश्मीर नई करवट ले रहा है। यहां अमन-चैन लौट रहा है, ये नये कश्मीर की गवाही दे रहा है। लेकिन कश्मीरी पंडित आज भी अपने घर लौटने का इंतजार ही कर रहे हैं। आज मैं पूछना चाहता है कि क्या अब कश्मीरी पंडितों का 31 सालों से चल रहा वनवास खत्म होने वाला है? क्या ये लोग अपने अपने घरों में लौट पाएंगे? ”

रिपब्लिक टीवी के एंकर ने कहा “संघ के बड़े नेता दत्तात्रेय होसबोले ने कश्मीरी नव वर्ष के मौके पर कश्मीरी पंडितों में एक उम्मीद जगायी है, कहा कि अब कभी कश्मीर से पंडितों का विस्थापन नहीं होगा, जो लोग कश्मीर छोड़ कर गए हैं, उनकी घर वापसी करवायी जाएगी। देशवासियों, भारत के इतिहास का वो काला दिन देश कभी नहीं भूलेगा जब 19 जनवरी 1990 की रात आतंकियों ने लाउड स्पीकर से ऐलान के बाद कश्मीरी पंडितों को कश्मीर छोड़ने का फरमान सुनाया था, कई कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

अर्णब ने कहा “रातों रात जान बचाने के लिए लाखों कश्मीरी पंडितों को अपना घर बार छोड़कर भागना पड़ा था और तब की सरकार मूक दर्शक बनी रही थी। उन्हें सुरक्षा देना जिनकी जिम्मेदारी थी वे लोग सियासत में डूबे रहे। तुष्टिकरण में जुटे थे। कश्मीरी पंडितों को ये जख्म मिले तीन दशक से ज्यादा हो गए। इस बीच कई सरकारें आयीं और गयीं। लेकिन कश्मीरी पंडितों की हालत पर किसी का दिल नहीं पसीजा।”

अर्णब ने आगे कहा “आतंकवादियों के लिए रोने वाले कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर एकदम खामोश रहे। मैं पूछना चाहता हूं उन लोगों से जो 370 हटने का विरोध कर रहे थे। क्या आपको कभी इन पंडितों का दर्द दिखाई नहीं दिया, दोस्तों ये वो लोग हैं जो नहीं चाहते है की कश्मीरी पंडित वापस लौटें। इसलिए 370 हटाने का विरोध कर रहे थे। ये 370 हटने का ही असर है कि अब कश्मीरी पंडितों के अंदर घर वापसी की नई उम्मीद जगी है। लेकिन सवाल आज भी वहीं है कश्मीर तो बदल रहा है। लेकिन क्या पंडितों की वापसी के लिए कश्मीर तैयार है ? क्या कश्मीर, पंडितों को उनकी सुरक्षा की गारंटी दे सकता है?”

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