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कांग्रेस पार्टी से आप समझदारी की उम्मीद क्यों करते हैं? डिबेट में बोले राजनीतिक विश्लेषक

कांग्रेस ने आज दावा किया कि कृषि कानूनों पर गतिरोध को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सभी चार सदस्यों ने कानूनों का समर्थन किया है।

congressतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Indian Express)

सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों को लागू किए जाने पर रोक लगा दी है। इस मुद्दे पर रिपब्लिक भारत पर डिबेट के दौरान राजनीतिक विश्लेषक अवनीजेश अवस्थी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी से आप समझदारी की उम्मीद क्यों करते हैं? बता दें कि कांग्रेस ने आज दावा किया कि कृषि कानूनों पर गतिरोध को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सभी चार सदस्य कानूनों के पक्षधर रहे हैं। इसलिए पैनल से किसानों के लिए किसी भी न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

शीर्ष अदालत द्वारा किसानों के विरोध के संबंध में व्यक्त की गई चिंता का स्वागत करते हुए रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कोर्ट द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति के सभी चार सदस्यों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि कृषि कानून सही हैं। सुरजेवाला ने कहा,“सभी चार सदस्यों को कानूनों के पक्ष में एक सार्वजनिक स्टैंड लेने के लिए जाना जाता है। सदस्यों के मुताबिक किसानों को गुमराह किया जा रहा है। ऐसी समिति किसानों के साथ कैसा न्याय कर सकती है? ”

उन्होंने दावा किया कि दो सदस्यों, अशोक गुलाटी और पी.के. जोशी, ने कृषि कानूनों के समर्थन में कॉलम लिखे हैं। गुलाटी का मानना है कि विपक्ष कानून के संबंध में गलत रास्ते पर है और किसानों को गुमराह किया जा रहा है। कांग्रेस नेता के मुताबिक जोशी ने लिखा है कि कानून सही हैं और यह भी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को खत्म किया जाना चाहिए।

सुरजेवाला ने कहा कि पैनल के एक अन्य सदस्य अनिल धनवंत कृषि कानूनों के पक्ष में प्रदर्शन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि चौथे सदस्य, अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने 14 दिसंबर को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की और कृषि कानूनों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि वे अदालत में एक याचिकाकर्ता भी हैं। मामले में याचिकाकर्ता को पैनल का सदस्य कैसे बनाया जा सकता है?

सुरजेवाला ने कहा, “अगर समिति के सदस्य पहले से ही कृषि कानूनों पर मोदी सरकार के साथ खड़े हैं, तो वे किसानों के साथ न्याय कैसे करेंगे? और ऐसी प्रक्रिया का परिणाम क्या होगा? ” सुरजेवाला ने कहा कि समस्या का एक ही समाधान है और वो है कृषि कानूनों को निरस्त करना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को 15 जनवरी को बातचीत के अगले दौर में उपस्थित होना चाहिए।

सुरजेवाला ने कहा,“49 दिनों से लाखों किसान न्याय की मांग के लिए दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान 66 से अधिक किसानों की मौत हो गई है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेपरवाह हैं और उन्होंने किसानों के साथ सहानुभूति व्यक्त करने के लिए कुछ भी नहीं कहा है। ”

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