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रिपोर्ट: भारत दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार, उत्‍पादन करने में खुद सक्षम नहीं

सिपरी के आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल रुझान-संकेतक मूल्य (टीआईवी) 2008-12 के दौरान 14,608 था जो 2013-17 में बढ़कर 18,048 हो गया। भारत द्वारा हथियार खरीद हालांकि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के अंतिम तीन साल की तुलना में भाजपा सरकार के पिछले तीन साल के दौरान कम हुई है।

Author नई दिल्ली | March 18, 2018 6:33 PM
टी-90एस भीष्म- भीष्म एक भारतीय नाम है जबकि यह रूस द्वारा बनाया गया हथियार है। यह पिछले 30 सालों से इस्तेमाल किया जा रहा है। यह दिन और रात में फायर करने के लिए कई आधुनिक तकनीकों से लैस है और यह पानी या मिट्टी में आसानी से काम कर सकता है और इससे 125 एमएम के गोले दागे जा सकते हैं। (फोटो- PIB)

भारत दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है। पिछले पांच साल के दौरान हथियारों की वैश्विक खरीद में भारत का हिस्सा 12 फीसदी है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के मुताबिक ने इन आंकड़ों के साथ-साथ यह भी कहा है कि भारत हथियारों की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन करने में खुद सक्षम नहीं है। इस सप्ताह जारी सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का आयात 2008-12 की पांच साल की अवधि की तुलना में पिछले पांच साल 2013-17 के दौरान 24 फीसदी बढ़ा है।

सिपरी के वरिष्ठ शोधकर्ता सिमोन वीजीमैन ने लिखा है, “एक तरफ पाकिस्तान और दूसरी तरफ चीन के साथ तनावों में रहने के कारण भारत में प्रमुख हथियारों की मांग बढ़ गई है, जिसका वह खुद उत्पादन करने में सक्षम नहीं है।” उन्होंने कहा कि इसके उलट चीन हथियारों की अपनी की जरूरतों को पूरा करने में खुद सक्षम है। सिपरी के आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल रुझान-संकेतक मूल्य (टीआईवी)2008-12 के दौरान 14,608 था जो 2013-17 में बढ़कर 18,048 हो गया। भारत द्वारा हथियार खरीद हालांकि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के अंतिम तीन साल की तुलना में भाजपा सरकार के पिछले तीन साल के दौरान कम हुई है।

मनमोहन सिंह जब 2011-13 के दौरान प्रधानमंत्री थे, तब भारत ने 13,319 टीआईवी मूल्य के हथियारों का आयात किया था लेकिन 2015-17 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतर्गत केवल 9,499 टीआईवी मूल्य के हथियार खरीदें गए। 2014 के दौरान जब दोनों नेता सत्ता में थे उस वक्त 3,227 टीआईवी मूल्य के हथियार खरीदे गए थे। भारत की परस्पर तुलना में पाकिस्तान का हथियार आयात पिछले पांच साल के दौरान लगातर घटा है। पिछले पांच साल की तुलना में पाकिस्तान का अमेरिका से आयात लगातार कम हुआ है जबकि चीन से उसकी आपूर्ति में वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया, “भारत के साथ जारी तनाव और चल रहे आंतरिक संघर्ष के बावजूद पाकिस्तान का हथियार आयात 2008-12 के मुकाबले 2013-17 में 36 फीसदी घटा है। 2013-17 में वैश्विक हथियार आयात में पाकिस्तान का हिस्सा 2.8 फीसदी है।” अध्ययन में कहा गया है कि अमेरिका से पाकिस्तान का हथियार आयात 2008-12 के मुकाबले हाल के पांच वर्षो में 76 फीसदी घटा है। सिपरी ने कहा, पाकिस्तान का 2013-17 में हथियारों का मुख्य स्त्रोत चीन रहा। साथ ही बांग्लादेश में भी चीन के हथियारों का आयात बड़े पैमाने पर हुआ। अमेरिका से भारत का आयात 2008-12 के दौरान 2.7 फीसदी था जो बढ़कर हाल के पांच वर्षो में 15 फीसदी हो गया। आयात में 557 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। भारत ने अमेरिका से आयात में उज्बेकिस्तान, ब्रिटेन और इजरायल को पीछे कर दिया है।

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