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जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय पड़ा आउटलुक मालिक पर छापा तब एनडीटीवी की तरह नहीं मिला था उसे ‘मीडिया का सपोर्ट’

29 मई 2001 को इनकम टैक्स के करीब 700 अधिकारियों ने आउटलुक पत्रिका के मालिक राजन रहेजा की 12 शहरों से जुड़ी परिसंपत्तियों पर छापा मारा था।
देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (FILE PHOTO)

टीवी चैनल एनडीटीवी के दो प्रमोटरों प्रणय रॉय और राधिका रॉय के घर पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने छापा मारा तो बहुत से लोगों ने इसे मीडिया पर नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लगाए गए अंकुश के तौर पर देखा। वहीं सीबीआई और भारतीय जनता पार्टी ने इन छापों के पीछे किसी तरह की बदले की भावना होने से इनकार किया। पांच जून को एनडीटीवी के दो प्रमोटरों पर सीबीआई छापे के बाद शुक्रवार (नौ जून) को दिल्ली स्थिति प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में कई दर्जन पत्रकारों ने एकजुट होकर इस कार्रवाई की निंदा की। एनडीटीवी के समर्थन में उतरने वालों में राजदीप सरदेसाई, एचके दुआ, फाली एस नारीमन, अरुण पुरी, राज चेंगप्पा, अरुण शौरी, ओम थानवी और शेखर गुप्ता इत्यादि शामिल थे। एनडीटीवी को मिले मीडिया बिरादरी के समर्थन के देखते हुए आउटलुक के सीनियर एडिटर अजित पिल्लई ने एक लेख लिखकर याद दिलाया है कि जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में आउटलुक मैगजीन के मालिक राजन रहेजा पर इनकम टैक्स ने छापा मारा था तब मुख्य धारा का मीडिया उनके समर्थन में इस तरह नहीं आया था।

29 मई 2001 को इनकम टैक्स के करीब 700 अधिकारियों ने आउटलुक पत्रिका के मालिक राजन रहेजा की 12 शहरों से जुड़ी परिसंपत्तियों पर छापा मारा था। पिल्लई के अनुसार आउटलुक में छपी जो कवर स्टोरी की वजह से प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नाराज थे। ये दो कवर स्टोरी थीं, “रिगिंग द पीएओ” (पांच मार्च 2001 संस्करण में प्रकाशित) और “द पीएम अखिलीस हील (26 मार्च 2001 संस्करण में प्रकाशित)।”  पहली रिपोर्ट में दावा किया गया था वाजपेयी के कुछ करीबी लोगों की मदद से बड़े प्रधानमंत्री कार्यालय में लिए जाने वाले कुछ आर्थिक निर्णयों पर कुछ ताकतवर कारोबारी घरानों द्वारा प्रभाव डाला जा रहा है। दूसरी रिपोर्ट में वाजपेयी के दत्तक दामाद रंजन भट्टाचार्य के पीएमओ में बढ़ते प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया गया था।

पिल्लई के अनुसार पहली रिपोर्ट छपने के बाद वाजपेयी ने विनोद मेहता को बुलाकर कहा था कि रिपोर्ट में जिन तीन लोगों (एनके सिंह, बृजेश मिश्रा और रंजन भट्टाचार्य) को जिक्र है उनमें से ब्यूरोक्रेट एनके सिंह की “छुट्टी” की जा सकती है। पिल्लई के अनुसार वाजपेयी ने मेहता से कहा कि मिश्रा और भट्टाचार्य “पाक-साफ” हैं। पिल्लई के अनुसार मेहता वाजपेयी का इशारा नहीं समझे और उन्होंने रंजन भट्टाचार्य पर दूसरी रिपोर्ट छाप दी। पिल्लई के अनुसार इस दौरान बृजेश मिश्रा जो उस समय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे, के दफ्तर से मेहता के लिए बार-बार फोन आते रहे लेकिन वो जानबूझकर उन्हें नजरअंदाज करते रहे।

वीडियो- एनडीटीवी के समर्थन में प्रेस क्लब में जुटे पत्रकार-

पिल्लई के अनुसार रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद मिश्रा और एनके सिंह ने एक संयुक्त पत्रकार वार्ता करके सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया लेकिन दोनों ने आउटलुक का नाम नहीं लिया। पिल्लई के अनुसार इन रिपोर्ट के प्रकाशन के करीब दो महीने बाद आउटलुक के मालिक पर छापा मारा गया क्योंकि वाजपेयी सरकार नहीं चाहती थी कि किसी को लगे कि ये बदले की कार्रवाई है। इनकम टैक्स के छापे के कुछ समय बाद ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी जांच में शामिल हो गया। कुलदीप नैयर और खुशवंत सिंह जैसे पत्रकारों ने अपने स्तम्भों में इन छापों की आलोचना की। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और दिल्ली पत्रकार संघ ने भी इनकी निंदा की लेकिन आउटलुक के समर्थन में मीडिया का अब जैसा जमावड़ा नहीं हुआ।

विनोद मेहता के कहने पर पिल्लई कई पत्रकारों से समर्थन के लिए मिले लेकिन उन्हें सहानुभूति तो मिली लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। कुछ पत्रकारों ने उनसे कहा कि अगर आउटलुक पर छापे को मीडिया कि अभिव्यक्ति की आजादी के तौर पर नहीं देखा जा सकता क्योंकि इससे सभी मीडिया मालिकों को कानून से अभय मिल जाएगा। कुछ पत्रकारों ने कहा कि चूंकि आउटलुक के प्रकाशन पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और न ही किसी पत्रकार पर कोई कार्रवाई कई गई है इसलिए भी इसे मीडिया के खिलाफ कार्रवाई कहना असंगत होगा।

पिल्लई के अनुसार राजन रहेजा को कई दिनों तक ईडी के मुंबई दफ्तर में सुबह बुलाया जाता था और शाम को उनसे जाने के लिए कह दिया जाता था। रहेजा से ईडी और इनकम टैक्स ने 15-20 साल पुरानी रसीदें इत्यादि मांगे। लेकिन आखिरकार रहेजा को इन मामलों में बरी हुए। इनकम टैक्स ने उनके घर पर छापे के दौरान जो 51 हजार रुपये नकद जब्त किए थे वो भी उन्होंने रहेजा को लौटाए।

वीडियो- मोदी सरकार ने BBC और उसके पत्रकार पर लगाया 5 साल का बैन

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