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रिपोर्ट: गरीबों की संख्‍या में भारी कमी, देश में 5 करोड़ लोग ही 135 रुपये रोजाना से कम पर कर रहे गुजारा

वर्ल्ड डाटा लैब के मुताबिक भारत में बीते कुछ सालों में अति गरीब लोगों की संख्या काफी तेजी से घटी है। 2011 में जहां रोजाना 135 रुपये से कम में गुजारा करने वालों की संख्या 26.8 करोड़ थी, वह आज की तारीख में 5 करोड़ रह गई है।

भारत में बेहद गरीब लोगों की संख्या में भारी कमी आई है। (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

दुनिया की तमाम संस्थाओं ने भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता और गरीबी दूर करने वाली योजनाओं का लोहा माना है। अत्यधिक गरीबी को कारगर ढंग से निपटने में भारत दुनिया के दूसरे देशों से काफी आगे है। वर्ल्ड डाटा लैब के मुताबिक बीते कुछ सालों में अति गरीब लोगों की संख्या काफी तेजी से घटी है। 2011 में जहां रोजाना 135 रुपये से कम में गुजारा करने वालों की संख्या 26.8 करोड़ थी, वह आज की तारीख में 5 करोड़ रह गई है। गरीबी उन्मूलन का निर्धारण का सटिक आंकलन घरेलू उपभोग की खपत से लगाया जाता है और इस आधार पर लोगों के जीवन स्तर पर में काफी सुधार देखने को मिला है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक थिंक टैंक ब्रूकिंग की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत जल्द ही गरीबी को काफी कम समय में खत्म करने वाला सबसे बड़ा देश बनने जा रहा है। विश्व ने शायद भारत की इस कामयाबी को नजरअंदाज किया। 2017-18 का सर्वे भारतीय घरेलू उपभोग को व्यापक स्तर पर कवर करता है। इसमें घर का मालिकाना हक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक अन्य चीजों का उपभोग शामिल है।”

भारत की गरीबी को दूर करने में तकनीक का बड़ा योगदान रहा है। सरकार की तमाम योजनाओं का जमीन पर लागू होने और लोगों तक उसका पूरा लाभ पहुंचने में तकनीक ने अहम भूमिका निभाई है। इकोनॉमिस्ट के मुताबिक भारत के त्वरित आर्थिक विकास में तकनीक एक बड़ी वजह है। सामाजिक क्षेत्र की तमाम योजनाओं में इसके जरिए गरीबी को पछाड़ने में काफी मदद मिली है। जानकारों का मानना है कि 2004-05 से लेकर अभी तक भारत की गरीबी में लगातार गिरावट देखने को मिली है। सभी सरकारों ने मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और तमाम दूसरी योजनाओं के जरिए भारत की गरीबी को कम करने में अहम भूमिका निभाई है। तमाम योजनाओं का लाभ लोगों के खातों में सीधा पहुंचना एक बड़ी कामयाबी रही है।

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