उत्तराखंड में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की रिपोर्ट, बीजेपी सांसद ने मारा ताना

ट्विटर पर उनको जवाब देते हुए एक यूजर ने लिखा कि “यदि आप 1962 में इतने सक्रिय होते तो भारत 40 हजार किलोमीटर जमीन नहीं गंवाता। वैसे भी आप राष्ट्रहित के बजाय @narendramodi को अपमानित करने में अधिक रुचि रखते हैं।”

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भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

उत्तराखंड की सीमा पर चीनी सैनिकों के कथित रूप से घुस आने और कुछ निर्माणों को ध्वस्त करने और नुकसान पहुंचाने की रिपोर्ट पर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने मंगलवार को सरकार पर ताना मारा। ट्विटर पर उन्होंने अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर की हैडिंग लिखते हुए लिखा कि “कोई आया?” हालांकि उनके व्यंग्यपूर्ण ट्वीट पर कई अन्य लोगों ने उनकाे जवाब भी दिए हैं।

एसके कुंचल@Sandeep24048945 ने लिखा “यदि आप 1962 में इतने सक्रिय होते तो भारत 40 हजार किलोमीटर जमीन नहीं गंवाता। वैसे भी आप राष्ट्रहित के बजाय @narendramodi को अपमानित करने में अधिक रुचि रखते हैं। इस प्रक्रिया में आप @RahulGandhi की मदद कर रहे हैं जो कभी सत्ता में नहीं आएंगे।”

अनिल शुक्ल@AnilShu03617914 नाम के यूजर ने लिखा, “सर यदि सीमा पर दुश्मन अतिक्रमण करता है, तो यह वहां तैनात स्थानीय सुरक्षा बलों की विफलता है। समस्या यह है कि हम जवाबदेही तय करने और उचित कार्रवाई करने के आदी नहीं हैं। केंद्र में सरकार को दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों पर सलाह देने की आवश्यकता नहीं है।”

बताया जा रहा है कि उत्तराखंड के चमोली से लगे चीनी सीमा इलाके ‘बाड़ाहोती’ में करीब 100 सैनिक देखे गए थे। इस खबर को अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स ने प्रकाशित की है। अखबार के मुताबिक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) सैनिक भारतीय सीमा में घुसे और कुछ निर्माणों को क्षतिग्रस्त करके अपने इलाकों में लौट गए। इसमें एक पुल भी शामिल था।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की जानकारी होने से इंकार किया। दूसरी तरफ उत्तराखंड के राज्यपाल रहे बीके जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बाड़ाहोती इलाके में चीनी घुसपैठ की कोशिश के बारे में स्वीकार किया है।

इस बीच चीनी सैनिकों की गतिविधियों का पता लगते ही स्थानीय अफसर और खुफिया तंत्र हरकत में आ गए। हाल के कुछ सालों में बाड़ाहोती इलाका, प्रमुख फ्लैशप्वाइंट में शुमार नहीं रहा है। हालांकि यहां छोटी-मोटी घटनाएं जरूर रिपोर्ट की जाती रही हैं। 1962 के युद्ध से पहले चीन ने इसी इलाके में घुसपैठ को अंजाम दिया था। 1954 में पहली बार चीनी सैनिकों को इस इलाके में उपकरणों के साथ देखा गया था, जोकि बाद में बढ़ता चला गया था।

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