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अनुच्‍छेद 35ए निकाहनामा जैसा, कश्‍मीरी IAS शाह फैसल ने बताया क्‍यों?

सोशल मीडिया पर अपनी एक टिप्पणी के कारण पूर्व में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर चुके आईएएस अफसर शाह फैजल ने रविवार को संविधान के अनुच्छेद 35-ए की तुलना निकाहनामे (विवाह दस्तावेज) से की।

Author नई दिल्ली | August 6, 2018 1:43 PM
आईएएस अफसर शाह फैजल

सोशल मीडिया पर अपनी एक टिप्पणी के कारण पूर्व में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर चुके आईएएस अफसर शाह फैजल ने रविवार को संविधान के अनुच्छेद 35-ए की तुलना निकाहनामे (विवाह दस्तावेज) से की। फैसल ने ट्वीट किया, “आप इसे रद्द करेंगे और रिश्ता खत्म हो जाएगा। बाद में बात करने के लिए कुछ नहीं बचेगा। पूर्व मंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता नईम अख्तर ने फैसल के ट्वीट को रिट्वीट किया और अपने विचार भी जोड़े। उन्होंने ट्वीट किया, “इसे रद्द किया जाना वैवाहिक दुष्कर्म जैसा होगा। एक संवैधानिक संबंध को यह कब्जे में बदल देगा। भारतीय संविधान की सर्वोच्चता से इनकार करने वाले जम्मू एवं कश्मीर के अलगाववादी संगठन अनुच्छेद 35-ए को बचाए जाने के लिए एकजुट हैं। 14 मई, 1954 को लागू हुआ यह अनुच्छेद जम्मू एवं कश्मीर की विधायिका को राज्य के स्थायी निवासियों और उनके विशेषाधिकारों को परिभाषित करने का अधिकार देता है।

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के निवासियों को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद 35-ए को खत्म करने के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने वाले आरएसएस से जुड़े एक एनजीओ ने आज कहा कि वह अनुरोध करेगा कि उसकी याचिका पर संविधान पीठ द्वारा सुनवाई हो। सिविल सोसायटी ‘वी द सिटिजन्स’ की जम्मू कश्मीर शाखा के संयोजक चेतन शर्मा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘सुनवाई को फिर से टालने की जरूरत नहीं है। हम कल अपने वकील के जरिये उच्चतम न्यायालय से कहेंगे कि अनुच्छेद 35-ए पर हमारी याचिका पर संविधान पीठ द्वारा फैसला किया जाए। वर्ष 1954 राष्ट्रपति आदेश के जरिये संविधान में जोड़ा गया अनुच्छेद 35-ए जम्मू कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार देता है और राज्य से बाहर के किसी व्यक्ति से शादी करने वाली महिला से संपत्ति का अधिकार छीनता है।

यह अनुच्छेद राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति को राज्य में अचल संपत्ति खरीदने से रोकता है। दिल्ली के एनजीओ ‘वी द सिटिजन्स’ ने 2014 में शीर्ष अदालत में अनुच्छेद 35-ए को खत्म करने की मांग वाली याचिका दायर की थी। राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय के रजिस्ट्रार के पास आवेदन दायर करके उन्हें जानकारी दी थी कि वह राज्य में आगामी पंचायत एवं शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों को देखते हुए’’ इस याचिका पर सुनवाई स्थगित करवाना चाहती है। शर्मा ने कहा, ‘‘हम दलीलें के लिए तैयार हैं। जो इस संबंध में दलीलें चाहते हैं उन्हें आगे आना चाहिए। इसे कितना टाला जाएगा? फैसला टालना समाधान नहीं है।

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