जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन हुआ। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। यह प्रदर्शन ज़्यादातर सोशल मीडिया के जरिए ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ नाम के एक इंस्टाग्राम-बेस्ड कैंपेन ने किया था। इस पेज के इंस्टाग्राम पर लगभग 56 लाख फॉलोअर्स हैं।
प्रदर्शन वाली जगह पर बार-बार उठने वाली मांगों में से एक यह थी कि सिर्फ़ जाति के बजाय आर्थिक नुकसान के आधार पर सरकारी मदद और फ़ायदे मिलने का फ़ैसला होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण के स्ट्रक्चर का रिव्यू करने, कोटा पॉलिसी में बदलाव करने और आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके (EWS) के लिए ज़्यादा मदद की भी मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने 5 मांगें की उठाई हैं-
आर्थिक हालत को ज़्यादा महत्व
प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि यह तय करते समय कि किसे सरकारी मदद की ज़रूरत है, आर्थिक हालात पर विचार किया जाना चाहिए, जिसमें पढ़ाई, कोचिंग, स्कॉलरशिप और दूसरे खर्चों के लिए मदद शामिल है। न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमारी मांग है कि यह तय करते समय कि किसे सरकारी मदद की ज़रूरत है, उसकी आर्थिक हालत पर ध्यान दिया जाना चाहिए। एक गरीब व्यक्ति, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो, उसे पढ़ाई, कोचिंग और दूसरी ज़रूरतों के लिए मदद दी जानी चाहिए।”
एक और प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे हैं कि आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को बिना मदद के छोड़ दिया जाए। हम कह रहे हैं कि मदद उन लोगों को टारगेट की जानी चाहिए जिन्हें इसकी जरूरत है, जिसमें स्कॉलरशिप, फीस सपोर्ट और कोचिंग शामिल हैं।”
कोटा के अंदर कोटा
प्रदर्शनकारियों ने रिज़र्वेशन सिस्टम की बड़े पैमाने पर समीक्षा की मांग की। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि इसके फ़ायदे हमेशा रिज़र्व कैटेगरी के सबसे पिछड़े ग्रुप तक नहीं पहुँच पाते हैं। PTI ने एक प्रदर्शनकारी के हवाले से कहा, “हम कई सालों से यह मुद्दा उठा रहे हैं। हमारा कहना है कि सरकार को यह देखना चाहिए कि क्या मौजूदा सिस्टम अपना मकसद पूरा कर रहा है और क्या फ़ायदे ज़मीनी स्तर पर लोगों तक पहुंच रहे हैं।”
प्रदर्शन में बोलने वाले यूट्यूबर अजीत भारती ने भी कोटा के अंदर कोटा व्यवस्था की मांग की और क्रीमी-लेयर क्राइटेरिया लाने पर सरकार की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने अपनी कोटा के अंदर कोटा मांग बताई और आरोप लगाया कि सरकार ने कहा है कि क्रीमी लेयर को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। अजीत भारती ने सवाल किया, “आप इसे लागू क्यों नहीं करेंगे? यह बहुत अजीब है कि सरकार उन कुछ दलित नेताओं के आगे झुक रही है जो सिर्फ अपने जाति समूह के बारे में बात करते हैं।”
आरक्षण पर एक श्वेत पत्र
अजीत भारती द्वारा बताई गई एक और मांग यह थी कि सरकार आरक्षण प्रणाली और पिछले आठ दशकों में इसके असर की जांच करने वाला एक श्वेत पत्र जारी करे। उन्होंने बिहार में मुसहर समुदाय का उदाहरण दिया, जो उनके अनुसार, सीमित राजनीतिक प्रतिनिधित्व के कारण आरक्षण सिस्टम से पर्याप्त लाभ नहीं उठा पाया है।
रिव्यू की मांग को दूसरे प्रदर्शनकारियों ने भी दोहराया, जिन्होंने सवाल किया कि क्या दशकों पहले शुरू किया गया सिस्टम आज के सामाजिक और आर्थिक हालात को ठीक कर रहा है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “पिछले कुछ दशकों में हालात काफी बदल गए हैं। इस बात पर बड़ी चर्चा होनी चाहिए कि क्या मौजूदा फ्रेमवर्क को रिव्यू करने की जरूरत है और बिना किसी भेदभाव के आर्थिक नुकसान को कैसे दूर किया जा सकता है।”
उच्च शिक्षा के लिए न्यूनतम नंबर
एक और बड़ी मांग यह थी कि उच्च शिक्षा (जिसमें प्रीमियर इंस्टीट्यूशन भी शामिल हैं) में एडमिशन के लिए न्यूनतम नंबर बनाए रखे जाने चाहिए। अजीत भारती ने ANI को बताया, “आप मेरिट से समझौता करके एक डेवलप्ड इंडिया का सपना नहीं बेच सकते। अगर 50% काबिल युवा या पढ़ रहे लड़के और लड़कियों को IITs, IIMs, या हायर एजुकेशन में एडमिशन नहीं मिलेगा, तो आपकी एफिशिएंसी वहीं 50% कम हो जाएगी।”
EWS बेनिफिट्स बढ़ाएं
प्रदर्शनकारी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के तौर पर क्लासिफाइड लोगों के लिए ज़्यादा फायदे की भी मांग की। अजीत भारती ने आगे कहा, “तो फिर इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन (EWS) को शेड्यूल्ड कास्ट (SC) का हिस्सा बना देना चाहिए। जिस क्लास की डेफिनिशन इकोनॉमिकली वीकर कहती है, आप उन्हें न तो फॉर्म खरीदने में कोई सुविधा दे रहे हैं, न उनकी हॉस्टल फीस माफ कर रहे हैं, न ही उनकी कोर्स फीस माफ की जा रही है; सिर्फ इसे मान्यता देकर आप क्या हासिल करेंगे?”
इन पांच मांगों के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने शेड्यूल्ड कास्ट्स एंड शेड्यूल्ड ट्राइब्स (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) एक्ट और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन फ्रेमवर्क समेत हायर एजुकेशन पॉलिसी पर भी चिंता जताई।
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