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…तो ट्रेनों में नहीं मिलेगी पैंट्री? रेल मंत्री को खत लिख बोला टॉप रेलवे एसोसिएशन- कटौती के लिए हटवा दें पैंट्री कारें

वहीं, एक रेलवे बोर्ड के अफसर के हवाले से कहा गया- AIRF के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि रेलवे अपने कम होते राजस्व को बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: September 28, 2020 12:13 PM
Indian Railways, Pantry Car in Indian Railways, Pantry Car in Indian Trainsनई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अपने गंतव्य को जाने वाली ट्रेन की बोगी की ओर जाता हुए एक यात्री। (Express photo by Abhinav Saha)

देश में सबसे बड़े रेलवे कर्मचारी एसोसिएशन All India Railwaymen’s Federation (AIRF) ने केंद्रीय रेल मंत्री से कहा है कि भारतीय ट्रेनों में कटौती के लिए पैंट्री कारें हटा दी जानी चाहिए। बीते हफ्ते एक खत लिखकर AIRF ने यह गुजारिश की। साथ ही सुझाव दिया कि पैंट्री कारों की जगह पर कोच लगाए जाएं, जिसके जरिए यात्रियों से और बड़ा राजस्व पैदा किया जा सकेगा। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट ‘The Print’ की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि गोयल ने रेलवे बोर्ड को इस प्रस्ताव के बारे में सोचने के लिए कहा है।

एआईआरएफ में सचिव शिव गोपाल ने अंग्रेजी साइट को बताया, “खाना तो बेस किचन्स से भी मुहैया कराया जा सकता है, जो कि रेलवे स्टेशंस पर होते हैं…रेलवे इन रसोइयों या फिर पैंट्री सेवाओं के जरिए किसी भी तरह का रेवेन्यू जेनरेट नहीं करता है।”

वहीं, एक रेलवे बोर्ड के अफसर के हवाले से कहा गया- AIRF के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि रेलवे अपने कम होते राजस्व को बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है।

बकौल अफसर, “यही वजह है कि रेलवे द्वारा मुहैया कराई जाने वाली लिनेन, तकिया, बेड शीट्स आदि को बंद किए जाने पर भी विचार किया गया था। इस स्तर पर कटौती की बेहद जरूरत है और जो सेवाएं राजस्व पैदा करने के बजाय आर्थिक जिम्मेदारी या देनदानी पैदा करती हैं, उन पर विचार किया जाना चाहिेए।”

यही अधिकारी इस बात पर सहमत हुए कि ट्रेनों में केटरिंग सेवा स्टेशंस पर ट्रेन साइड वेंडिंग स्टैटिक केटरिंग यूनिट्स और ई-केटरिंग सेवाओं के जरिेए भी आसानी से मुहैया कराई जा सकती हैं।

पत्र में AIRF ने यह भी कहा है- सेवाओं की ‘अंधाधुंध आउटसोर्सिंग’ में भी कटौती की जानी चाहिए। साथ ही रेलवे के सभी PSUs को रेलवे बिल्डिंग्स से काम करना चाहिए। न कि अलग दफ्तरों से।

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