ताज़ा खबर
 

रातो-रात नहीं खत्म हो पाएगी रेमडिसिवर की किल्लत, मांग न होने से घटा उत्पादन

2021 में दो-तीन महीने तक रेमडिसिविर का उत्पादन लगभग शून्य था। एक समय इसका उत्पादन जम कर हुआ था लेकिन जब डिमांड घटी तो दवा निर्माताओं के पास दिसंबर में एक्सपायरी वाला भारी स्टॉक जमा हो गया था। कई सप्लायरों को यह स्टॉक नष्ट करना पड़ा था।

Nalanda medical college, Remedisvir, Treatment of Corona, Covid-19, Dr randeep guleriaरेमडेसिविर इंजेक्शन (फोटोः एजेंसी)

कोविड-19 के मामलों में आए उछाल के बीच महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में रेमडिसिविर दवा की किल्लत का शोर मचा हुआ है। इस कमी के मद्देनजर ही विदेश व्यापार निदेशालय ने इस एंटी-वायरल दवा और दवा बनाने में काम आने वाली सामग्री के निर्यात पर रोक लगा दी है। रेमडिसिविर की किल्लत के दो कारण हैं। बढ़ती डिमांड और कम उत्पादन। इसमें सप्लाई में दिक्कत का मामला भी जोड़ सकते हैं।

महाराष्ट्र को इस वक्त रोजाना 40 से 50 हज़ार रेमडिसिवर इंजेक्शन चाहिए, जबकि पिछले साल जब कोविड के मामले सर्वाधिक थे, उस वक्त सिर्फ 30 हजार डोज़ की डिमांड थी। मध्य प्रदेश का आरोप है कि उसको जरूरत की 50 प्रतिशत दवा ही मिल पा रही है। फूड एण्ड ड्रग इंस्पेक्टर शोभित कोस्टा बताते हैं कि रेमडिसिविर के उत्पादन का 70 फीसदी महाराष्ट्र को दे दिया जाता है। मप्र को रोज सात हजार इंजेक्शन चाहिए लेकिन मिलते हैं केवल डेढ़ या दो हज़ार।

2021 में दो-तीन महीने तक रेमडिसिविर का उत्पादन लगभग शून्य था। एक समय इसका उत्पादन जम कर हुआ था लेकिन जब डिमांड घटी तो दवा निर्माताओं के पास दिसंबर में एक्सपायरी वाला भारी स्टॉक जमा हो गया था। महाराष्ट्र की फूड एंड ड्रग अथारिटी के पूर्व संयुक्त कमिश्नर जेबी मंत्री के मुताबिक कई सप्लायरों को यह स्टॉक नष्ट करना पड़ा था। इसी का नतीजा था कि रेमडिसिविर बनाने में भारत की नंबर एक कंपनी हेटरो हेल्थकेयर ने उत्पादन गिराकर 5-10 प्रतिशत कर दिया। सीपला को सप्लाई करने वाली कंपनी कमला हेल्थकेयर ने तो जनवरी से मार्च के बीच उत्पादन ठप ही कर दिया। कमला के एमडी डॉ डीजे ज़वार का कहना है कि डिमांड न होने के कारण उत्पादन घटाने की बात सरकार ने कही थी।

उत्पादन था नहीं, सो सप्लाइ चैन भी ठप हो गई थी। यही कारण है। दूसरी, ओर कोरोना ने फरवरी से ओवरटाइम करना शुरू कर दिया और रोगियों में जबर्दस्त वृद्धि होने लगी। अब जब सबको तुरंत रेमडिसिविर चाहिए, दिक्कत यह है कि दवा का उत्पादन रातोरात नहीं बढ़ सकता। हेटरो हेल्थकेयर के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट प्रफुल्ल खासगीवाल का कहना है कि “रेमडिसिविर बनाने में 25 तरह का कच्चा माल लगता है। हमें खुद यह माल खरीदना पड़ता था।” दवा बनाने वाले यह भी बताते हैं कि दवा के उत्पादन से उसकी सप्लाई तक 20 से 25 दिन का समय लगता है। मतलब यह कि फ्रेश सप्लाइ होने में अभी भी एक हफ्ते लगेंगे।

सरकार की कोशिश है कि दवा की आइंदा दिक्कत न पड़े। इसीलिए फार्मास्यूटिकल डिपार्टमेंट ने रेमडिसिविर बनाने वाले सभी सातो निर्माताओं से अपनी उच्चतम क्षमता (38.80 लाख डोज़ प्रति माह) में उत्पादन करें। हेटरो की क्षमता 10.50 लाख यूनिट की है, जबकि सीपला की 6.20 लाख, जायडुस कैडिला 5 लाख और माइलान 4 लाख यूनिट प्रतिमाह की। ज़ायडुस का कहना है कि वह अपना उत्पादन मौजूदा 35 हजार यूनिट से बढ़ाकरर 12 लाख करने जा रहा है। उसने दवा (सौ एमजी) की कीमत भी 2800 से घटाकर 899 रुपए कर दी है।

रेमडिसिविर एक इंजेक्शन के जरिए दी जान वाली दवा है। इसका वाइरस को अपनी संख्या में वृद्धि करने से रोकना होता है। यह 2014 में अफ्रीकी बीमारी ईबोला के इलाज में के लिए बनाई गई थी। बाद में डॉक्टर इसको सार्स और मर्स के इलाज में भी देने लगे। 2020 में इसका उपयोग कोविड के खिलाफ भी होने लगा। चिकित्सकीय अनुभव से पता चलता है कि यह हल्के लक्षण वाले मरीजों में अस्पताल में दाखिल होने के शुरू में ही काम करती है। मर्ज बढ़ जाने पर यह काम नहीं आती।

Next Stories
1 बीजेपी ने दिल्ली में कोविड अस्पताल बनाने का किया दावा- एंकर का सवाल- कहां है अस्पताल तो झांकने लगे बगलें
2 रेमडेसिविर पर बांबे HC ने केंद्र, राज्य से मांगा जवाब, उधर EX सीएम बोले- नेताओं को छोड़ कालाबाजारियों के पीछे लगाएं CBI,ED
3 नेवी ने पकड़ी 3 हजार करोड़ की ड्रग्स, अरब सागर में एक नौका से हाथ लगा जखीरा
यह पढ़ा क्या?
X