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सेना पर सवाल उठाने पर पं. नेहरू को इस अफसर ने द‍िया ऐसा जवाब क‍ि पूरी सभा रह गई थी सन्‍न

राठौड़ खड़े हुए और उन्होंने नेहरू से कहा कि सर मेरे पास कहने के लिए कुछ है।

Author नई दिल्ली | July 31, 2017 3:22 PM
केएम करियप्पा आजादी के बाद भारतीय सेना के पहले भारतीय सैन्य प्रमुख थे। फील्ड मार्शल (तब जनरल) करियप्पा भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ (तस्वीर- भारत सरकार के फोटो डिविजन से साभार)

अंग्रेजों से भारत को स्वतंत्रता दिलाने के बाद एक बैठक का आयोजन किया गया था जिसमें भारतीय सेना के पहले जनरल को नियुक्त किया जाना था। इस बैठक का नेतृत्व पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया था। जनरल का चुनाव करने के लिए इस बैठक में कई राजनेता और कुछ सैन्य अधिकारी भी इस विचार-विमर्श में एकत्रित हुए थे। बैठक के दौरान पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा कि हमें भारतीय सेना के लिए किसी भारतीय अधिकारी के बजाए एक ब्रिटिश अधिकारी का चुनाव करना होगा क्योंकि भारतीय अधिकारियों में अनुभव की कमी है। वहां मौजूद सभी लोगों ने नेहरू की बात का समर्थन किया क्योंकि वे देश के प्रधानमंत्री थे और पीएम की बात को कोई कैसे काट सकता था लेकिन अचानक बैठक से एक सैन्य अधिकारी उठा और उसने नेहरू के ब्रिटिश अधिकारी चुने जाने की बात पर ऐसा जवाब दिया कि वहां बैठे सभी लोग सन्न रह गए थे।

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यह सैन्य अधिकारी कोई और नहीं ठाकुर नाथू सिंह राठौड़ थे। राठौड़ खड़े हुए और उन्होंने नेहरू से कहा कि सर मेरे पास कहने के लिए कुछ है। देखिए सर, हमारे पास देश को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा अनुभव भी नहीं है, तो देश के पहले प्रधानमंत्री द्वारा किसी ब्रिटेन के अधिकारी को नियुक्त नहीं करना चाहिए। राठौड़ की बात सुन वहां मौजूद सभी लोग एकदम से शांत हो गए। राठौड़ की बात सुन नेहरू ने उनसे पूछा कि क्या तुम भारत के पहले सैन्य जनरल बनने के लिए तैयार हो? नेहरू द्वारा जनरल बनने का प्रस्ताव रखे जाने के बाद राठौड़ के पास यह अच्छा मौका था लेकिन उन्होंने नेहरू के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि हमारे पास ऐसे कई अधिकारी हैं जो कि बहुत गुणवान हैं।

(Photo Source: Facebook)

राठौड़ ने कहा मेरे वरिष्ठ लेफटिनेंट जनरल केएम कैरियाप्पा यहां बैठे हम सभी में से सबसे ज्यादा जनरल पद के लिए योग्य है। राठौड़ के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई और कैरियाप्पा को भारत सेना का पहला जनरल बनाया गया और राठौड़ को पहला लेफटिनेंट जनरल नियुक्त किया गया था। आपको बता दें कि राठौड़ जैमल, जिन्होंने अकबर के खिलाफ मेवाड़ के लिए लड़ाई की थी, वे ठाकुर नाथू सिंह राठौड़ के पूर्वज थे।

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