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आपात स्थिति में लगवा सकते हैं टीका, कोरोना वैक्सीन पर जमात-ए-इस्लामी का यू-टर्न

बता दें कि भारत और इस्लामिक संगठन के कई देशों में स्थित मुस्लिम संस्थाओं ने वैक्सीन को हराम करार दे दिया था, हालांकि धर्मगुरुओं के निर्देशों के बाद इन्हें लगवाने की मंजूरी दे दी गई।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: January 3, 2021 10:59 AM
Coronavirus Vaccine, COVID-19फाइजर, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और मॉडर्ना ने साफ किया है कि उनकी वैक्सीन में पोर्क से जुड़े उत्पाद नहीं डाले गए हैं। (फोटो- AP)

दुनियाभर में कोरोनावायरस के बढ़ते केसों के बीच लोगों में वैक्सीन को लेकर संशय बढ़ता जा रहा है। हाल ही में भारत समेत कई मुस्लिम देशों के संगठनों और विद्वानों ने दावा किया था कि कोरोना की वैक्सीन में कुछ ऐसे पदार्थ भी मिले हैं, जो कि इस्लाम में हराम हैं। ऐसे में वैक्सीन लगवाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। हालांकि, अब भारत के मुस्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी (हिंद) ने यू-टर्न लेते हुए कहा है कि आपात मौकों पर अगर सही पदार्थों वाली वैक्सीन मुहैया नहीं है, तो इंसान की जान बचाने के लिए हराम पदार्थों वाली वैक्सीन लगवाई जा सकती है।

जमात-ए-इस्लामी (हिंद) शरिया परिषद के सचिव डॉक्टर रजी-उल-इस्लाम ने कहा है कि अगर कुछ अस्वीकार्य पदार्थ गुण और लक्षणों के लिहाज से बिल्कुल अलग ही रूप में मौजूद है, तो उसे पवित्र माना जा सकता है और वह वैध होगा। इसी के आधार पर हराम जानवर के अंगों से मिले जिलेटिन को इस्तेमाल को इस्लामी न्यायकर्ताओं ने मंजूरी दी है। नदवी ने कहा कि जो इस्लामी न्यायकर्ता इस बदलाव वाले नियम से वास्ता नहीं रखते, उन्होंने भी कहा है कि जब तक हलाल वैक्सीन मौजूद नहीं होतीं, तब तक आपात स्थितियों के लिए अस्वीकार्य पदार्थों वाली वैक्सीन ली जा सकती है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल कोरोनावायरस वैक्सीन में मिले पदार्थों के बारे में जो जानकारी सार्वजनिक हुई है, उसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। नदवी ने कहा कि वैक्सीन की सामग्री जानने के बाद ही इस बारे में आगे गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।

बता दें कि भारत और इस्लामिक संगठन के कई देशों में स्थित मुस्लिम संस्थाओं ने वैक्सीन को हराम करार दे दिया था। इनमें यूएई और इंडोनेशिया के संगठन भी शामिल थे। भारत में ऑल-इंडिया सुन्नी जमियत-उल-उलेमा काउंसिल और मुंबई की रजा एकेडमी ने वैक्सीन को हराम कहा था और साथ ही अपील की थी कि मुस्लिम सुअरों की चर्बी के इस्तेमाल से बनी वैक्सीन का इस्तेमाल न करें।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्रा जेनेका, फाइजर और मॉडर्ना के प्रवक्ता कह चुके हैं कि उनकी कोरोनावायरस वैक्सीन में पोर्क से जुड़ा कोई उत्पाद नहीं मिला है। हालांकि, वैक्सीन को स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट के दौरान सुरक्षित और प्रभावी रखने के लिए पोर्क से निकली जिलेटिन का इस्तेमाल किया जाता है।

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