टीसीएस के नासिक ऑफिस में कर्मचारियों पर यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। फरवरी में महाराष्ट्र के नासिक में एक स्थानीय राजनीतिक दल के कार्यकर्ता ने नासिक शहर पुलिस से संपर्क कर शिकायत की कि टीसीएस की बीपीओ इकाई में काम करने वाली 20 वर्षीय हिंदू लड़की रमजान के दौरान उपवास रख रही थी। इस मामले की जांच करने पर यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के कई आरोप सामने आए। सोमवार को टाटा संस के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन ने कहा कि घटनाक्रम की पूरी जांच चल रही है।

पुलिस के अनुसार, स्थानीय राजनीतिक दल के कार्यकर्ता ने उन्हें बताया कि लड़की को उसके कार्यस्थल पर इस्लाम की शिक्षाओं का पालन करने के लिए प्रभावित किया गया था। हालांकि, पुलिस ने यह खुलासा नहीं किया कि कार्यकर्ता किस दल से संबद्ध है। पुलिस ने लड़की के परिवार से संपर्क किया तो उसके माता-पिता ने बताया कि जब उसने रोज़े रखना और इस्लामी तौर-तरीके अपनाना शुरू किया तो उन्होंने उसे काम पर जाने से रोक दिया था। मामले की जांच के लिए नियुक्त टीम के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इसके बाद ही उन्होंने 147 कर्मचारियों वाली बीपीओ में चल रही घटनाओं की जांच करने का फैसला किया।

अधिकारी ने कहा, “हमने कुछ कांस्टेबलों को वहां हाउसकीपिंग स्टाफ के तौर पर नियुक्त किया ताकि वे वहां होने वाली गतिविधियों पर नजर रख सकें। हमारे लोगों के वहां दो सप्ताह तक काम करने के बाद, हमें लगा कि उनकी जांच से कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत मिल गए हैं।”

TCS Case: इन मामलों में दर्ज हुई FIR

अधिकारी ने आगे बताया, “हमने रोजे रखने वाली लड़की के मामले में बलात्कार के आरोप में पहली एफआईआर दर्ज की। वह गिरफ्तार आरोपी दानिश शेख के साथ रिश्ते में थी, जिसने कथित तौर पर अपनी शादीशुदा होने की बात छुपाई थी। एफआईआर दर्ज होने से एक महीने पहले फरवरी में दानिश की पत्नी ने लड़की को मैसेज किया और फिर फोन पर बताया कि वह शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं।” अधिकारी ने कहा, “बलात्कार का मामला इसलिए दर्ज किया गया क्योंकि उसने महिला से शादी का वादा करके उसके साथ यौन संबंध बनाए थे। साथ ही, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की धारा भी जोड़ी गई क्योंकि उसने महिला को अपना धर्म अपनाने के लिए प्रभावित किया था।”

इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) का नेतृत्व कर रहे एसीपी (क्राइम) संदीप मिटके ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले दानिश और उसके दोस्त तौसीफ अत्तार को महिला से यौन संबंध बनाने की मांग करने के आरोप में गिरफ्तार किया।

छह आरोपियों में से चार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील बाबा सैयद ने कहा, “ये निराधार आरोप हैं। ईद के दौरान, मेरे जो गैर-मुस्लिम मित्र घर आते हैं वे भी शेरवानी पहनकर आते हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।” उन्होंने कहा, “पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने पीड़िता के धर्म के बारे में गलत बातें कही थीं लेकिन धर्म समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे व्यक्ति को प्रभावित करने का इरादा हो।”

कार्यस्थल पर कथित तौर पर उत्पीड़न का शिकार हुई महिलाओं के सुराग

पुलिस ने दावा किया कि उन्हें कार्यस्थल पर कथित तौर पर उत्पीड़न का शिकार हुई अन्य महिलाओं के बारे में भी सुराग मिले हैं। एसीपी मिटके ने कहा, “शुरुआत में महिलाएं शिकायत दर्ज कराने को तैयार नहीं थीं क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि हमने पहले मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। बाद में हमें कुछ और मामले मिले जिनमें छेड़छाड़ और धर्म परिवर्तन के प्रयास शामिल थे। कुल मिलाकर, 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच नौ एफआईआर दर्ज की गईं जिनमें से छह में धर्म परिवर्तन का आरोप शामिल था।”

कुल मिलाकर, पुणे स्थित एक ऑपरेशन मैनेजर सहित आठ आरोपियों (छह पुरुष और दो महिलाएं) के नाम सामने आए हैं और सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शफी शेख (34), आसिफ अंसारी (22), तौसीफ अत्तार (36), शाहरुख कुरैशी (34), रजा मेमन (35), दानिश शेख (34) और अश्विनी चैनानी के रूप में हुई है। मिटके ने कहा, “हमें कोई संगठित साजिश या आरोपियों द्वारा किसी और के निर्देश पर धर्मांतरण करने का कोई सबूत नहीं मिला है।”

ब्रिगेडियर से मारपीट का मामला, बेटे ने सुनाई आपबीती

दक्षिण पश्चिम दिल्ली के वसंत एन्क्लेव इलाके में कार में शराब पीने का विरोध करने पर भारतीय सेना के एक सेवारत ब्रिगेडियर और उनके आईआईटी से पढ़े बेटे पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया तथा सैन्य अधिकारी की पत्नी को धमकाया। आरोप है कि इस दौरान मौके पर मौजूद पीसीआर में तैनात पुलिसकर्मी घटना स्थल पर मूकदर्शक बने रहे। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें