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Jio vs Reliance: तीन साल में कहां से कहां पहुंच गईं दो भाइयों की कंपनियां, देखिए चार्ट

देश में टेलीकॉम वायरलैस के 116.69 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। जिनमें से 20.5% रिलायंस जियो के पास हैं, वहीं एयरटेल के पास 29.64% सब्सक्राइबर्स हैं। वहीं रिलायंस कम्यूनिकेशन की स्थिति बेहद खराब है।

मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो सफलता के नए आयाम छू रही है, वहीं अनिल अंबानी की रिलायंस कम्यूनिकेशन कर्ज के बोझ तले दबी है।(file pic)

भारतीय बिजनेस की दुनिया में रिलायंस एक बड़ा नाम है। धीरुभाई अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपने दम पर खड़ा किया और अब उनके बेटे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी इस विरासत को संभाल रहे हैं। लेकिन आज स्थिति ये है कि मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी रिलायंस जियो जहां तरक्की की बुलंदियों को छू रही है, वहीं अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस कम्यूनिकेशन इस रेस में बहुत पीछे छूट गई है। बता दें कि धीरुभाई अंबानी बिना विरासत छोड़े ही इस दुनिया से विदा हो गए थे। जिसके बाद दोनों भाइयों मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच बंटवारे की जंग छिड़ गई। साल 2005 में धीरुभाई अंबानी की पत्नी कोकिलाबेन अंबानी ने दखल देकर रिलायंस का बंटवारा किया। जिसके तहत रिलायंस ग्रुप का ऑयल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल का बिजनेस मुकेश अंबानी के खाते में गया। वहीं अनिल अंबानी को पॉवर जेनरेशन, फाइनेंशियल सर्विस और टेलीकॉम बिजनेस मिला।

मुकेश अंबानी ने बंटवारे के बाद अपनी स्थिति को दिनों-दिन मजबूत किया है और आज स्थिति ये है कि वह भारत के सबसे अमीर उद्योगपति हैं। वहीं दूसरी तरफ अनिल अंबानी अपने बिजनेस को उस ऊंचाई पर नहीं ले जा सके और लगातार परेशानियों में घिरते जा रहे हैं। साल 2015 के दिसंबर में मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो के रुप में टेलीकॉम में क्षेत्र में उतरने का फैसला किया और सिर्फ 3 साल के वक्त में रिलायंस जियो आज देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई है।

हाल ही में TRAI ने एक चार्ट जारी किया है। जिसके तहत सब्सक्राइबर्स बेस के मामले में रिलायंस जियो देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बतायी गई है। पहले नंबर पर भारतीय एयरटेल का कब्जा है। देश में टेलीकॉम वायरलैस के 116.69 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। जिनमें से 20.5% रिलायंस जियो के पास हैं, वहीं एयरटेल के पास 29.64% सब्सक्राइबर्स हैं। रिलायंस जियो के मुकाबले रिलायंस कम्यूनिकेशन बेहद पीछे है और सिर्फ 0.004% सब्सक्राइबर्स बेस के साथ सबसे पीछे है।

TRAI

रिलायंस जियो ने टेलीकॉम सेक्टर में प्रवेश करते ही सस्ती डाटा सेवाएं उपलब्ध कराकर भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में खलबली मचा दी थी और तेजी से अपना बेस बढ़ाया था। रिलायंस जियो के मुकाबले में अन्य कंपनियों को भी अपने डाटा प्लान की कीमतों में काफी कमी करनी पड़ी थी। जिसका सीधा फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को मिला था। एक तरफ जहां वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। वहीं कम्यूनिकेशन के क्षेत्र को भविष्य बताया जा रहा है। यही वजह है कि मुकेश अंबानी देश में कम्यूनिकेशन के क्षेत्र में 34 बिलियन डॉलर निवेश करने की योजना बना रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ अनिल अंबानी लगातार कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। उनके नेतृत्व में रिलायंस कम्यूनिकेशन आशा के अनुरुप बेहतर प्रदर्शन करने में नाकाम रहा, साथ ही पॉवर जेनरेशन के फील्ड में भी उन्हें सफलता नहीं मिली। भारी कर्ज के चलते रिलायंस कम्यूनिकेशन कई कानूनी पचड़ों में भी फंसी हुई है। अब कर्ज से छुटकारा पाने के लिए रिलायंस कम्यूनिकेशन ने रिलायंस जियो के साथ 45000 करोड़ रुपए की स्पेक्ट्रम डील की है। लेकिन फिलहाल कानूनी मामलों के चलते वही भी अधर में लटक गई है। इस साल अपनी कंपनी की 14वीं आम बैठक के दौरान अनिल अंबानी ने टेलीकॉम सेक्टर से पूरी तरह से किनारा करने का ऐलान किया था।

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