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बनने से पहले ही रिलायंस के जियो इंस्टिट्यूट को प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान का दर्जा, IIT, बिट्स पिलानी के साथ मिली जगह

बनने से पहले ही अंबानी घराने के जियो इंस्टीट्यूट को आइआइटी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस जैसे संस्थानों की सूची में जगह मिलने पर सवाल उठने शुरू हुए हैं। कांग्रेस ने सरकार से पूछा है किस आधार पर ग्रांट के लिए मुकेश अंबानी के जियो इंस्टीट्यू को चुना गया।

Author नई दिल्ली | July 10, 2018 3:58 PM
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर। (फोटो- एएनआई)

केंद्र सरकार ने तीन सार्वजनिक और तीन प्राइवेट विश्वविद्यालयों को इंस्टीट्यूशन्स ऑफ इमिनेंस का दर्जा दिया।इन विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर की गुणवत्ता हासिल करने के लिए विशेष रूप से फंडिंग के साथ स्वायत्तता हासिल होगी।इस सूची में दो आइआइटी के साथ रिलायंस फाउंडेशन का जियो इंस्टीट्यूट भी है, जो कि अभी लांच भी नहीं हुआ है। इसको लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। इन विश्वविद्यालय का चयन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) ने किया है।

जैसे ही केंद्र सरकार के इस फैसले की मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जानकारी दी तो जियो ट्विटर पर ट्रेंड होने लगा। तमाम लोगों ने मंत्री जावड़ेकर को टैग कर पूछना शुरू किया कि जियो इंस्टीट्यूट आखिर हैं किस जगह पर। जियो के साथ सूची में जगह बनाने वाले अन्य संस्थानों में बिट्स पिलानी, मनीपाल एकेडमी ऑफ हायर एजूकेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु और आइआइटी मुंबई तथा दिल्ली शामिल हैं।

इस मसले पर कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा- बीजेपी सरकार ने मुकेश और नीता अंबानी को फिर पक्ष लिया है।जिस जियो इंस्टीट्यूट का अभी निर्माण होना है, उसे इमिनेंट इंस्टीट्यूट का दर्जा दे दिया गया। सरकार को बताना होगा कि किस आधार पर इस विश्वविद्यालय का ग्रांट के लिए वर्गीकरण किया गया।

उधर, यूजीसी ने कहा कि जियो इंस्टीट्यूट का चयन ग्रीनफील्ड इंस्टीट्यूशन्स के नियमों के तहत किया गया।एक अधिकारी के मुताबिक कुल 11 संस्थानों ने इस कटेगरी के लिए आवेदन किया था था, जिसमें से जियो को चुना गया। सोमवार को कई ट्वीट कर मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इंस्टीट्यूट्स ऑफ इमिनेंस के बारे में जानकारी दी थी। जावड़ेकर ने ट्वीट कर कहा था-इमिनेंस इंस्टीट्यूट्स देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। देश में आठ सौ विश्वविद्यालय हैं, मगर विश्व की शीर्ष सौ या दो सौ विश्वविद्यालयों में एक भी भारतीय विश्वविद्यालय नहीं है। आज का फैसला इस उपलब्धि को हासिल करने में मदद करेगा।
जियो इंस्टीट्यूट के चयन पर उठते सवालों के बीच केंद्र सरकार ने सफाई पेश की है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सफाई देते हुए इसे नियमानुकूल बताया है। कहा है कि यूजीसी रेगुलेशन 2017, के अनुच्छेद 6.1 के अनुसार उन संस्थानों को भी चुना जा सकता है, जो अभी खुले नहीं हैं। मंत्रालय के मुताबिक संस्थानों का चयन तीन वर्गों में किया गया है। पहले वर्ग में आइआइटी जैसे सार्वजनिक संस्थान, दूसरे में निजी संस्थान और तीसरा वर्ग ग्रीनफील्ड है। जिसमें प्रस्तावित संस्थानों को जगह मिलती है। ग्रीनफील्ड वर्ग के लिए कुल 11 प्रस्ताव आए थे, यूजीसी की कमेटी ने जियो को योग्य पाया। भूमि की उपलब्धता, संसाधन आदि को देखते हुए चयन किया गया। उच्च शिक्षा सचिव आर सुब्रमण्यम ने बताया कि ग्रीनफील्ड कटेगरी में चयिनत जियो इंस्टीट्यूट को तीन साल में सेटअप देना होगा।

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