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अब UP के 14 जिलों में बाढ़ संकट! बांधों से छूटा लाखों क्यूसेक पानी, उफनायी नदियों के पानी से घिरे सैकड़ों गांव

उपजिलाधिकारी जय चंद्र पांडे ने बताया कि जिले की कैसरगंज, महसी तथा मिहींपुरवा तहसीलों के 61 गांवों की डेढ़ लाख से ज्यादा आबादी तथा 15500 हेक्टेयर क्षेत्रफल बाढ़ प्रभावित है। सात गांवों में हालात ज्यादा खराब हैं। बाढ़ तथा कटान से अभी तक 131 कच्चे पक्के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

Author लखनऊ | Updated: August 2, 2020 10:48 PM
Floods, Floods in UP, Uttar Pradesh, 14 Districts, Waterयूपी से पहले असम और बिहार फिलहाल बाढ़ की मार झेल रहे हैं। बिहार के पूर्वी चंपारण में जलमग्न इलाके की बीच बचकर निकलते लोग। (फोटोः पीटीआई)

उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश के बीच नेपाल तथा अन्य कई स्थानों पर बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण गंगा, घाघरा, राप्ती और शारदा समेत अनेक नदियां जगह-जगह उफान पर हैं। प्रदेश के 14 जिलों के सैकड़ों गांव इन उफनायी नदियों के पानी में घिर गये हैं। राहत आयुक्त कार्यालय से रविवार को प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 14 जिलों- बाराबंकी, अयोध्या, कुशीनगर, गोरखपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, आजमगढ़, मऊ, बस्ती, गोंडा, संत कबीर नगर, सीतापुर, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर में बाढ़ से कुल 455 गांव प्रभावित हैं। उनमें से 98 गांवों का सम्पर्क बाकी इलाकों से पूरी तरह कट गया है।

प्रदेश में बाढ़ पीड़ितों के ठहरने के लिये 96 आश्रय स्थल बनाये गये हैं और राहत तथा बचाव कार्य के लिये 653 बाढ़ चौकियां स्थापित की गयी हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिये 835 नौकाएं इस्तेमाल की जा रही हैं। बाढ़ की वजह से सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसल जलमग्न हो गयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों को फसल के नुकसान का जायजा लेकर प्रभावित किसानों को फौरन सहायता का आदेश दिया है। इसके अलावा ऐसे गांव, जहां बाढ़ आने की आशंका है, वहां लाउडस्पीकर के जरिये जनता को लगातार सतर्क किया जाए। उन्होंने इसके साथ ही निर्देश दिया कि राज्य स्तर पर स्थापित एकीकृत आपदा नियंत्रण केन्द्र और जिलों में स्थापित नियंत्रण कक्षों के जरिये बाढ़ की स्थिति की लगातार समीक्षा की जाए।

इस बीच, केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक घाघरा नदी एल्गिन ब्रिज (बाराबंकी), अयोध्या और तुर्तीपार (बलिया) में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। अयोध्या और तुर्तीपार में इसका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। वहीं, राप्ती नदी का जलस्तर बर्ड घाट (गोरखपुर) में खतरे के निशान को पार कर गया है जबकि बलरामपुर, बांसी (सिद्धार्थनगर) और रिगोली (गोरखपुर) में इसका जलस्तर लाल चिह्न के नजदीक बना हुआ है।

उधर, बूढ़ी राप्ती ककरही (सिद्धार्थनगर) में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है जबकि रोहिन नदी त्रिमोहानी घाट (महराजगंज) में लाल निशान को पार कर गई है। शारदा नदी पलिया कलां (लखीमपुर खीरी) में खतरे के निशान को पार कर गई है और इसके स्तर में इजाफा हो रहा है। वहीं, शारदा नगर में यह लाल निशान के काफी नजदीक पहुंच चुकी है। गंगा नदी भी कचला ब्रिज (बदायूं) में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और उसका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जबकि नरोरा में इसका जलस्तर लाल चिह्न के नजदीक पहुंच चुका है।

कवानो नदी चंद्रदीप घाट (गोंडा), बस्ती और मुखलिसपुर (संत कबीर नगर) में जबकि गंडक नदी खड्डा (कुशीनगर) और कौन कुनहरा नदी उस्काबाजार (सिद्धार्थ नगर) में खतरे के निशान के नजदीक बह रही है। बहराइच से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता (बाढ़) शोभित कुशवाहा ने बताया कि शारदा, गिरिजापुरी तथा सरयू बैराजों से नदियों में आज 3.15 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इन तीनों स्थानों पर नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है लेकिन एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 108 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। पिछले 24 घंटों में जलस्तर दो सेंटीमीटर बढ़ा है। बैराजों के साथ साथ 110 किलोमीटर लम्बे तटबंधों की सुरक्षा के लिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है।

उपजिलाधिकारी जय चंद्र पांडे ने बताया कि जिले की कैसरगंज, महसी तथा मिहींपुरवा तहसीलों के 61 गांवों की डेढ़ लाख से ज्यादा आबादी तथा 15500 हेक्टेयर क्षेत्रफल बाढ़ प्रभावित है। सात गांवों में हालात ज्यादा खराब हैं। बाढ़ तथा कटान से अभी तक 131 कच्चे पक्के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत कार्यों के लिए 23 बाढ़ चौकियां और एक बाढ़ आश्रयस्थल बनाया गया है।

पांडे ने बताया कि एक मोटर बोट, 179 नावें, फ्लड पीएसी व एनडीआरएफ की एक- एक प्लाटून, 48 चिकित्सा तथा पशु चिकित्सा दल राहत कार्य में लग चुके हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों में लोगों को चिकित्सकीय सुविधा, पशु टीकाकरण, तारपोलीन शीट व भोजन पैकेट वितरित की जा रही है। उन्होंने बताया कि घाघरा नदी तथा उससे जुड़ी नहरों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है।

बौंडी थानांतर्गत शुकलपुरवा में शनिवार दोपहर परमेश (16) घाघरा नदी के किनारे जानवरों को पानी पिला रहा था। इस दौरान पैर फिसल जाने से वह गहरे पानी में डूब गया। पांडे ने बताया कि इसी तरह कैसरगंज थानांतर्गत के बहरैचन पुरवा के संतोष उर्फ बबलू (14) तथा पासिनपुरवा के राम संवारे (35) की घाघरा नदी में डूबकर मौत हो गयी। तीनों मृतकों के शवों को गोताखोरों की मदद से निकाल लिया गया है। पोस्टमार्टम तथा अन्य औपचारिकताएं पूरी कर शव परिजनों को सौंपे गये हैं।

इस बीच, आंचलिक मौसम केन्द्र की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में कुछ स्थानों पर बारिश हुई। बलरामपुर, सिरौली गौसपुर (बाराबंकी) और पुवायां में नौ—नौ सेमी. बारिश हुई। इसके अलावा इटावा में छह, रामनगर (बाराबंकी) में पांच, कुंडा (प्रतापगढ़), तरबगंज (गोण्डा), एल्गिनब्रिज, सुलतानपुर और मुहम्मदी (लखीमपुर खीरी), भिनगा (श्रावस्ती), करहल (मैनपुरी) और नवाबगंज (बरेली) में चार—चार सेमी वर्षा रिकॉर्ड की गयी। अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के कुछ स्थानों पर बारिश होने का अनुमान है, जबकि आगामी चार और पांच अगस्त को प्रदेश के अनेक स्थानों पर वर्षा होने की सम्भावना है।

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