ताज़ा खबर
 

चंदन तस्कर हत्याकांड: पुलिस की गोली से बचे शेखर ने कहा, कोर्ट में करूंगा खुलासा

आंध्र प्रदेश में मारे गए 20 कथित लाल चंदन तस्करों में से दो के परिजनों ने गुरुवार को तिरुवन्नामलाई जिले में सड़क पर शवों को रखकर प्रदर्शन किया और न्याय की मांग की। इस बीच मद्रास हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि छह लकड़हारों के शवों को शुक्रवार तक तिरुवन्नामलाई जिले में मुर्दाघर में रखा […]

Author April 10, 2015 8:29 AM
Red Sandalwood Killing: पुलिस कार्रवाई में जिंदा बचा शेखर अपनी पत्नी के साथ

आंध्र प्रदेश में मारे गए 20 कथित लाल चंदन तस्करों में से दो के परिजनों ने गुरुवार को तिरुवन्नामलाई जिले में सड़क पर शवों को रखकर प्रदर्शन किया और न्याय की मांग की। इस बीच मद्रास हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि छह लकड़हारों के शवों को शुक्रवार तक तिरुवन्नामलाई जिले में मुर्दाघर में रखा जाए ताकि जरूरत पड़ने पर इनका दोबारा पोस्टमार्टम किया जा सके।

उधर, उन दो गांवों में जहां के ये लकड़हारे थे, दिन भर मुर्दनी पसरी रही। इनमें से सात वेट्टागिरिपलयम गांव के रहने वाले थे जो शेषाचलम के जंगलों में कथित मुठभेड़ में मारे गए थे। इस कथित मुठभेड़ में किस्मत से बच निकले शेखर से मिलने के लिए दिन भर यहां लोगों की भीड़ जुटी रही। भीड़ ने इसके बाद खराब हो रहे दो शवों को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया।

दूसरी ओर यहां से 60 किलोमीटर दूर जवाधु की की पहाड़ियों में बसे आदिवासियों के गांव जमुनामाथुर में ग्रामीण चुपचाप चारों शवों के अंतिम संस्कार की तैयारियों में व्यस्त रहे। शवों से आ रही दुर्गंध के कारण करीबी रिश्तेदारों के अलावा बाकी लोग इससे दूर ही रहे।

मारे गए एक शख्स की पत्नी और तिरुवन्नामलाई जिले के पोलुर की रहने वाली मुनियमम्मल की अर्जी पर हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि शुक्रवार तक शवों को जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल के मुर्दाघर में रखा जाए। याचिका न्यायमूर्ति एम सत्यनारायणन के समक्ष सुनवाई के लिए आई।

आंध्र प्रदेश पुलिस का कहना है कि उसने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी। उसने कहा कि एक तस्कर गिरोह के लिए काम रहे इन लकड़हारों ने पुलिस पार्टी पर हमला किया था। जबकि याची मुनिअम्मल के वकील ने अदालत में कहा कि शशिकुमार के शव पर गोली लगने के अलावा काटने के भी निशान थे। उन्होंने दलील दी कि शव पर रसायन भी डाला गया। न्यायाधीश ने कहा कि वह शुक्रवार को इस याचिका पर आदेश देंगे।

इस सारे घटनाक्रम के बावजूद पूरे दिन शेखर सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। खासतौर से तब जब लोगों को पता चला कि वे वेट्टागिरिपलयम के उन आठ लकड़हारों के समूह में शामिल थे जिसमें सात लोगों को कथित रूप से मुठभेड़ में मार डाला गया।

शेखर ने गुरुवार को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में फिर उस बात को दोहराया जो उन्होंने अपने परिजनों को मंगलवार को बताया था- कि पुलिस ने उन्हें इसलिए छोड़ दिया कि वे बस में एक महिला के बगल में बैठे हुए थे और उन्होंने समझा कि वो मेरी पत्नी है। शेखर ने कहा कि वे पुलिस या अदालत के समक्ष सभी तथ्यों का खुलासा करने के लिए तैयार हैं।

हालांकि उनके करीबियों ने कहा कि वे अदालत या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष अपनी बात रखना चाहेंगे ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। शेखर संभवत: 23 अप्रैल को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सामने अपनी बात रखेंगे। पर पंचायत अध्यक्ष शांता मूर्ति ने कहा कि तब तक शेखर अगर जिंदा बचे रह जाएं तो उन्हें हैरत होगी। गांव तक आने वाली सड़क पुलिस की गाड़ियों से अटी पड़ी है और ग्रामीणों को ‘सांत्वना’ देने के लिए स्थानीय नेताओं की आवाजाही भी शुरू हो गई है।

शेखर के एक रिश्तेदार 24 वर्षीय एन माधवन ने कहा कि वे चाहते हैं कि केंद्र सरकार मामले में हस्तक्षेप करे और घटना की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करे।

आठ लकड़हारों के समूह में एकमात्र जिंदा बच गए शेखर ने कहा कि उनके अलावा बाकी सभी लोगों को सोमवार की रात को ही पुलिस ने आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु की सीमा से पकड़ लिया था। उधर, माधवन ने कहा कि उन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। शेखर को सुरक्षा की जरूरत है क्योंकि कोई नहीं जानता कि कब उन्हें कुछ हो जाए या रात को पुलिस उन्हें उठा ले जाए।

उधर, इस मुठभेड़ में मारे गए जमुनामाथुर गांव के 18 वर्षीय वेल्लामुथु की एक रिश्तेदार ने कहा कि वह मूक और बधिर था। घर से जाने से पहले भी उसने किसी को नहीं बताया था। सभी चारों लोग एक साथ निकले थे और अब उनकी लाश ही लौटी है। हम अब इन सभी को मौत के मुंह में धकेलने वाले एजंट की तलाश कर रहे हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App