दिल्ली के लाल किले के बाहर हुए ब्लास्ट (10 नवंबर 2025) मामले में NIA ने अपनी चार्जशीट में बड़ा दावा किया है। NIA के मुताबिक, मामले के एक प्रमुख आरोपी जसीर बिलाल वानी ने IED बनाने का तरीका जानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल किया।
चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपी जसीर बिलाल वानी ने यूट्यूब पर ‘रॉकेट कैसे बनाएं’, ‘चीनी से रॉकेट कैसे बनाएं’, ‘चीनी और पोटेशियम नाइट्रेट से रॉकेट कैसे बनाएं’ जैसे वीडियो सर्च किए थे। इसके बाद ChatGPT की मदद से रॉकेट आधारित IED तैयार करने से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की। NIA ने अपनी चार्जशीट में यह भी दावा किया है कि बम बनाने के लिए जरूरी सामान Flipkart से ऑनलाइन मंगाया गया था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी योजना बनाने और अपनी गतिविधियों को गुप्त रखने के लिए WhatsApp और Telegram के बजाय Signal ऐप को ज्यादा पसंद करते थे। NIA का दावा है कि आरोपियों ने Signal पर “Shooley”, “Gabbarsingh1975” और “kavadyatra” नाम से ग्रुप भी बनाए थे।
चार्जशीट के मुताबिक, एक अन्य आरोपी इरफान अहमद वागे ने चैट में Signal को अपेक्षाकृत सुरक्षित बताया था और कथित तौर पर WhatsApp और Telegram के इस्तेमाल से बचने की बात कही थी। यानी NIA की चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों ने तकनीक, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल अपनी कथित साजिश और गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया।
चार्जशीट के मुताबिक, IED बनाने के लिए जरूरी सामान आरोपी A-3 यानी वानी ने ने अपने मोबाइल नंबर 9541813661 पर पंजीकृत ऑनलाइन Flipkart से खरीदा था। उसने 15 दिसंबर 2023 से 24 जनवरी 2024 के बीच अपने मोबाइल नंबर से सामान ऑर्डर किया। चार्जशीट में कहा गया है कि इन सामानों को खरीदने के लिए पैसे A-1 ने दिए थे। सामान की डिलीवरी के समय वानी ने कैश में भुगतान किया और सभी सामान हासिल किए।
A-1 से मतलब उमर उन नबी से है, जो कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले डॉक्टर थे और फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाते थे। जांच एजेंसी NIA के मुताबिक, वही उस Hyundai i20 कार को चला रहे थे, जिसमें विस्फोट हुआ था। यह विस्फोट लाल किले के बाहर हुआ था, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई।
NIA के आरोप के मुताबिक, विस्फोटक तैयार करने के लिए उमर उन नबी ने यूरिया हासिल करने के उद्देश्य से पेशाब को पॉलीबैग में जमा किया था। चार्जशीट में दावा किया गया है कि इस यूरिया का इस्तेमाल विस्फोटक तैयार करने के लिए किया जाना था।
आरोपपत्र के मुताबिक, आरोपी A-1 जिस कमरे में रह रहा था, वहां वह पेशाब को पॉलीबैग में भरकर रखता था। वह उसे बाहर फेंकने नहीं जाता था, जिसके कारण कमरे से बदबू आने लगी। घर की महिला ने इस बारे में A-8 से शिकायत की थी। NIA का दावा है कि आरोपी (A-6 और A-1) के पेन ड्राइव से मिली एक PDF में यूरिया नाइट्रेट से विस्फोटक पदार्थ तैयार करने की एक विधि बताई गई थी। इस दस्तावेज में यूरिया हासिल करने के वैकल्पिक स्रोत के तौर पर पेशाब से यूरिया निकालने का तरीका भी बताया गया था।
दिल्ली की एक अदालत ने अगस्त के आखिरी हफ़्ते में चार्जशीट का संज्ञान लिया। NIA के मुताबिक, “मृत आरोपी (उमर नबी) लाल किले के आस-पास के इलाके से अच्छी तरह वाकिफ था और पहले भी कई बार उस जगह पर जा चुका था।” एजेंसी ने दिसंबर 2023 से मई 2025 के बीच उमर नबी के उस इलाके में 12 बार जाने का ज़िक्र किया है।
चार्जशीट में कहा गया है, “आरोपी लाल किले को भारतीय राज्य का प्रतीक मानते थे। अल फलाह यूनिवर्सिटी में A-1 के ठिकाने से ज़ब्त किए गए हाथ से लिखे नोटों से साफ पता चलता है कि अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) के सदस्य लोकतंत्र के खिलाफ थे और भारत में शरिया कानून लागू करना चाहते थे। इसलिए, लाल किले के पास धमाका करना न सिर्फ एक आतंकवादी घटना है, बल्कि यह राज्य के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने जैसा भी है।”
अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) अल-कायदा से जुड़ा एक इस्लामी आतंकी संगठन है। आरोप है कि रेड फोर्ट ब्लास्ट को अंजाम देने वाले आरोपी इसी संगठन के सदस्य थे।
NIA की चार्जशीट के मुताबिक, इस कथित ‘आतंकी मॉड्यूल’ ने करीब डेढ़ साल तक हमले की योजना बनाई। मार्च 2025 में आरोपियों ने फरीदाबाद के खोरी जमालपुर गांव में चार कमरे किराए पर लिए थे। उन्होंने कमरे फल रखने के नाम पर किराए पर लिए, लेकिन आरोप है कि उनका इस्तेमाल केमिकल्स को तैयार करने और धोने के लिए किया गया।
अक्टूबर 2025 में जम्मू-कश्मीर के नौगाम में AGuH के नाम से पोस्टर लगाए जाने के मामले में FIR दर्ज हुई थी। इसके बाद इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।
NIA की चार्जशीट के मुताबिक, 30 अक्टूबर को उमर उन नबी कथित तौर पर विस्फोटकों से भरी i20 कार लेकर अल-फलाह यूनिवर्सिटी से निकल गया। इसके बाद वह हरियाणा के नूंह में एक सुरक्षित ठिकाने पर छिपा रहा और 9 नवंबर तक वहीं रहा। चार्जशीट में कहा गया है कि 10 नवंबर को खुफिया और जांच एजेंसियों की गिरफ्तारी से बचने के लिए उमर ने एक जगह को धमाका करने के लिए चुना। इसके बाद वहां विस्फोट किया गया।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। हादसे के बाद मौके पर पहुंचा यह शख्स वहां मौजूद छात्रों के पहचानने पर डरकर भाग गया था। पुलिस के मुताबिक, उसे डर था कि छात्र उसके साथ मारपीट कर सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर।
