केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की एक आंतरिक समिति ने देश के ग्रामीण नागरिकों को ग्राम पंचायत स्तर पर मिलने वाली प्रमुख आवश्यक सेवाओं की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की है। समिति ने इन सेवाओं की संख्या वर्तमान सात से बढ़ाकर 50 करने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही समिति ने यह भी कहा कि ये प्रमुख सेवाएं समयबद्ध तरीके से नागरिकों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
कर्नाटक के पंचायती राज मंत्रालय में अतिरिक्त उमा महादेवन की अध्यक्षता में गठित इस समिति में केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव आलोक प्रेम नागर और महाराष्ट्र, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अधिकारी भी शामिल थे। समिति ने जिन प्रमुख आवश्यक सेवाओं का जिक्र किया है, उनमें प्रमाण-पत्र (जन्म, मृत्यु, निवास, जाति, आय, दिव्यांगता आदि), मनरेगा सेवाएं, राशन कार्ड सेवाएं, पानी आपूर्ति कनेक्शन, पेंशन, संपत्ति कर और कर्मचारी पंजीकरण शामिल हैं।

समिति ने इन सेवाओं के लिए दो स्तरीय ढांचा तैयार किया है। पहले स्तर में अति आवश्यक सेवाएं शामिल हैं जिन्हें हर ग्राम पंचायत को समय पर और मानक तरीके से उपलब्ध कराना है। दूसरे स्तर में ऐसी सेवाएं शामिल हैं जिन्हें पंचायतें अपनी क्षमता सुदृढ़ होने पर अपना सकती हैं, जैसे व्यापार लाइसेंस जारी करना, स्वयं सहायता समूह/सहकारी पंजीकरण, पीएम विश्वकर्मा पहचान पत्र, कृषि से संबंधित लाइसेंस और आंगनबाड़ी नामांकन।
समिति ने सभी ग्राम पंचायतों से सभी आवश्यक सेवाओं के लिए समय सीमा निर्धारित करने का निर्देश भी दिया है। इसके साथ ही पारदर्शिता और पहुंच आसान बनाने के लिए राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, एसएमएस या ऑनलाइन स्टेटस अपडेट, और मोबाइल एप्लिकेशन जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म को शामिल करने के लिए कहा गया है। समिति ने पाया कि देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 6,622 सेवाएं नागरिकों को दी जा रही हैं।
