टीएमसी के बागी सांसदों ने ऐलान किया है कि वे ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय करेंगे। बागी सांसदों के ऐलान के बाद एनसीपीआई का नाम देश की राजनीति में तेजी से चर्चा में आ गया है।
टीएमसी के बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और उनसे सदन में उनके अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। दूसरी ओर, टीएमसी संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर से आग्रह किया है कि वे बागी सांसदों के गुट को कोई मान्यता ना दें।
एनसीपीआई क्या है और इसका राजनीतिक इतिहास क्या है?
एनसीपीआई के दस्तावेजों के मुताबिक, शेवली कुंडू इसकी कोषाध्यक्ष हैं। वह पार्टी के दो संगठनों में निदेशक भी हैं। ये संगठन बिस्वबाजार प्राइवेट लिमिटेड और पश्चिम बंगा असंगठिता महिला कर्मी एसोसिएशन हैं।
उत्तिया कुंडू हैं एनसीपीआई के अध्यक्ष
एनसीपीआई और इन दो संगठनों का पंजीकृत पता बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र को बताया गया है। एनसीपीआई के अध्यक्ष उत्तिया कुंडू हैं, वह शेवली कुंडू के पति हैं। एक फेसबुक पोस्ट में उत्तिया कुंडू ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक तस्वीर साझा की है।
2023 में त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले ही चुनाव आयोग में एनसीपीआई का रजिस्ट्रेशन हुआ था। इसे गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में आयोग में रजिस्टर किया गया था। इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी पंजीकृत दल के रूप में एनसीपीआई को मान्यता प्राप्त थी लेकिन उसने पहली बार त्रिपुरा में चुनाव लड़ा था।
एनसीपीआई के नेता शांतनु डे ने एनडीटीवी को बताया कि पार्टी का मकसद त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) में आदिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व करना है।
दो उम्मीदवार ही लड़ पाए चुनाव
एनसीपीआई ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में 7 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया था लेकिन चार सीटों पर उसके उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए थे। कुछ और गड़बड़ियों के बाद आखिरकार पार्टी के चुनाव चिह्न पर केवल दो उम्मीदवार ही चुनाव लड़ पाए।
चावमानु सीट पर पार्टी के उम्मीदवार को 536 वोट और कैलाशहर सीट पर 286 वोट मिले। कृष्ण कुमार देबबर्मा अंबासा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे। उन्हें 376 वोट मिले। देबबर्मा के भी वोटों को जोड़ लिया जाए तो एनसीपीआई समर्थित उम्मीदवारों को कुल 1,198 वोट मिले।
त्रिपुरा में एनसीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले कई उम्मीदवारों का कहना है कि चुनाव के बाद पार्टी का कुछ पता नहीं चला। कैलाशहर से उम्मीदवार रहे जहांगीर अली ने एनडीटीवी को बताया कि 2023 के चुनाव के बाद शेवली कुंडू ने अपना काम बंद कर दिया और वापस चली गईं। अली ने बताया कि अब कुंडू से उनका कोई संपर्क नहीं है।
एक और उम्मीदवार बरजेदा त्रिपुरा ने कहा कि पार्टी के फाउंडर शांतनु डे से मुलाकात के बाद उन्होंने पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। वे चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों की तलाश कर रहे थे और चुनाव के बाद अब उनसे कोई संपर्क नहीं है।
शांतनु डे का कहना है कि वह 2023 में पश्चिम बंगाल का पंचायत चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका क्योंकि त्रिपुरा के चुनाव के बाद पार्टी में काफी उथल-पुथल होने लगी। डे का कहना है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कहा था कि 2026 का पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव लड़ा जाए लेकिन संसाधनों की कमी की वजह से पार्टी चुनाव मैदान में नहीं उतरी।
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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी की प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी में चल रहे असंतोष के बीच बड़े पैमाने पर संगठन में फेरबदल किया है। ममता बनर्जी ने सांसद सायोनी घोष को पार्टी की यूथ विंग के अध्यक्ष पद से हटा दिया। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
