पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में बगावत तेज हो गई है। गुरुवार को संसदीय दल की बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद गैर हाजिर रहे थे। इन सांसदों में संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दीना पाटिल और ओमराजे निंबालकर शामिल हैं।

इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, ये सांसद 21 या 22 जून को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संपर्क कर उप मुख्यमंत्री की अगुवाई वाली शिवसेना में विलय का प्रस्ताव रख सकते हैं।

लोकसभा में शिवसेना संसदीय दल के नेता एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत सांसद हैं। एक और सांसद राजाभाऊ वाजे को भी बागी सांसद अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। बागी सांसदों के गुट का एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय में देर होने के पीछे एक वजह यह मानी जा रही है कि ओम राजे निंबालकर अपने पिता पवन राजे निंबालकर की हत्या के मामले में फैसला आने का इंतजार कर रहे हैं।

पत्र का ड्राफ्ट तैयार

बागी सांसदों ने स्पीकर बिड़ला को सौंपने के लिए पत्र का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसमें उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के नेतृत्व के कामकाज को लेकर असंतोष को वजह बताया है। उन्होंने यह भी बताया है कि किस तरह पिछले कुछ सालों में कई वरिष्ठ नेताओं को नेतृत्व से मतभेद की वजह से पार्टी छोड़कर जाना पड़ा। जैसे- उद्धव ठाकरे के कार्यकारी अध्यक्ष रहते हुए बड़े नेता नारायण राणे ने 2005 में, राज ठाकरे ने 2006 में पार्टी छोड़ी और 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बगावत हुई जिसमें बड़ी संख्या में शिवसेना के विधायक और सांसद पार्टी छोड़कर चले गए।

अगर राजाभाऊ वाजे भी बागी सांसदों के साथ आ जाते हैं तो इनकी कुल संख्या सात हो जाएगी। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, दो-तिहाई सांसद अगर किसी दूसरे दल में विलय कर लेते हैं तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। विलय होने के बाद एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के पास 13-14 सांसद होंगे और यह टीडीपी (16 सांसद) के बाद एनडीए में सबसे बड़ा दल बन जाएगा।

लेकिन अगर टीएमसी के 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय को मान्यता मिल जाती है, तो वह एनडीए में बीजेपी के बाद सबसे बड़ा दल होगा। जेडीयू के पास 12 सांसद हैं।

इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति पर भी होगा क्योंकि बागी सांसदों का विलय हुआ तो इससे एकनाथ शिंदे को मजबूती मिलेगी। महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी ताकत बनी थी और तब यह माना जाने लगा था कि शिंदे की राजनीतिक ताकत कम हो गई है लेकिन अब शिंदे ने मास्टर स्ट्रोक चल दिया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के विलय में कुछ कानूनी पेचीदगियां भी हैं।

केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा

यह राजनीतिक घटनाक्रम इसलिए बहुत अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस से लौटने के बाद केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाएं काफी तेज हैं। इससे एनडीए का भी संख्या बल बढ़ेगा। मौजूदा वक्त में एनडीए के पास 293 सीटें हैं।

इस साल अप्रैल में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा से पारित नहीं हो सका था। यह विधेयक परिसीमन और महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़ा है इसके लिए सरकार को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत चाहिए।

‘एडवांस में दिए जा रहे 15 करोड़’

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) एक बड़ी टूट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 9 में से 6 सांसद पाला बदलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इस बीच, यूबीटी सांसद संजय राउत ने बड़ा आरोप लगाया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।