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जयंत सिन्‍हा का भविष्‍य क्‍या होगा? यशवंत सिन्‍हा बोले- बेटे ने पिता के बारे में सोचा था?

भारत के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के आलोचक सिन्हा ने यह किताब उन लोगों को समर्पित की है जो सच के लिए आगे आने नहीं डरते।

Yashwant Sinhaपूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा। (फाइल फोटो)

विद्रोही भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने नरेंद्र मोदी की चार-साढ़े चार साल की सरकार की आलोचना में अपनी पुस्तक ‘इंडिया अनमेड’ नामक पुस्तक में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस किताब को अगले साल की शुरुआत में रिलीज किया जाना है। कूमी कपूर के इनसाइट ट्रेक में छपी खबर के मुताबिक इस किताब में सिन्हा खराब शासन के इतने मामलों का हवाला देते हैं, कि कांग्रेस को 2019 के अभियान के लिए बहुत कम होमवर्क करने की जरुरत है। सिन्हा ने अपनी किताब में निष्कर्ष निकाला की मोदी देश को आधा दशक पीछे ले गए। 2024 तक उन्हें दोबारा चुनते हैं तो देश अपना एक दशक खो देगा। जब उन्होंने किताब लिखी तब मोदी सरकार की इतनी आलोचना करके उन्होंने अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य के बारे में क्या सोचा? जो अभी केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री हैं। सिन्हा ने इसका जवाब देते हुए कहा कि यह उनकी चिंता नहीं थी। इसके बदले तंज कसते हुए कहा ‘क्या बेटे ने अपने पिता के बारे में सोचा जब वह अपने अपने रास्ते पर चला गया?’

जानना चाहिए कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सिन्हा का यह भी कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर रोज इतिहास रचने की धुन में हैं और अगर वह टिम्बकटू का दौरा करने वाले पहले भारतीय पीएम बन सकते हैं तो वह ऐसा जरूर करेंगे, फिर चाहें उनका दौरा जरूरी और सार्थक हो या नहीं। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘इंडिया अनमेड: हॉउ मोदी गवर्मेट ब्रोक द इकॉनमी’ में बीते साढ़े चार साल में मोदी और उनकी सरकार पर एक सदमा देने वाले अध्याय में कहा है कि एक चीज है जो उन्होंने की लेकिन दूसरे प्रधानमंत्रियों ने नहीं की..उन्होंने अधिकतर पिछले कार्यक्रमों को अपने दायरे में लिया और उनका नाम बदल दिया, जिससे सारा श्रेय और गौरव उनके साथ जुड़ गया।

भारत के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के आलोचक सिन्हा ने यह किताब उन लोगों को समर्पित की है जो सच के लिए आगे आने नहीं डरते। सिन्हा ने कहा, ‘नरेंद्र मोदी एक ऐसे इंसान है जो सभी चीजें खुद के लिए करना चाहते हैं।’  ‘हेल सीजर: मोदी स्टाइल ऑफ फंक्शनिंग’ अध्याय में सिन्हा ने लिखा, “मोदी ने भारत सरकार की सभी निर्णय निर्माण शक्तियों को खुद में ही केंद्रीकृत कर दिया है, जिसमें उनके प्रधानमंत्री कार्यालय के कुछ चुनिंदा अधिकारी उनकी सहायता करते हैं।” सिन्हा वाजपेयी सरकार में वित्त और विदेश मंत्री रहे थे।

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