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RTI का हाल: फोटोकॉपी की फीस लेने के बाद भी BEL ने नहीं दिया EVM और VVPAT का डेटा

RTI में यह भी पूछा गया था कि 2019 के चुनावों में देशभर में कितने वीवीपैट मशीन की सप्लाई हुई? इसके अलावा जिलावार बैलेट यूनिट ले जाने वालों, वीवीपैट मशीन ले जाने वालों, चुनावी कार्य में तैनात इंजीनियरों का नाम, पदनाम की जानकारी भी मांग गई थी।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः जसबीर मल्ही)

2019 के लोकसभा चुनावों में देशभर में इस्तेमाल हुई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), वोटर वेरिफाइड पेपर ट्रायल (वीवीपैट) यूनिट और सिम्बल लोडिंग यूनिट्स (एसएलयू) से जुड़ी जानकारी जब सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई तो इन मशीनों को बनाने वाली कंपनी भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) ने सूचना देने से इनकार कर दिया। हद तो तब हो गई जब बीईएल ने पहले RTI के जवाब में आवेदक से 717 पन्नों का जवाब पाने के लिए 1434 रुपये की मांग कर दी और जब आवेदक ने उसका भुगतान कर दिया तब करीब महीनेभर बाद यह कह दिया कि उससे जुड़ी जानकारी मौजूद नहीं है।

दरअसल, ‘द वॉयर’ ने 2019 का लोकसभा चुनाव होने के बाद जून 2019 में एक RTI आवेदन डालकर यह जानना चाहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कुल कितने ईवीएम का इस्तेमाल हुआ और उन ईवीएम में कितने वोट दर्ज करने की क्षमता है? RTI में यह भी पूछा गया था कि 2019 के चुनावों में देशभर में कितने वीवीपैट मशीन की सप्लाई हुई? इसके अलावा जिलावार बैलेट यूनिट ले जाने वालों, वीवीपैट मशीन ले जाने वालों, चुनावी कार्य में तैनात इंजीनियरों का नाम, पदनाम की जानकारी भी मांग गई थी।

रक्षा मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न कंपनी बीईएल के चीफ पब्लिक इनफॉरमेशन अफसर (सीपीआईओ) ने आरटीआई आवेदन जमा करने के लगभग एक महीने बाद 717 पन्नों के लिए 1,434 रुपये अदा करने के लिए सूचना पत्र भेजा था। इसके साथ ही आवेदक द्वारा मांगी गई सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने की बात कही थी लेकिन जब 1434 रुपये का भुगतान कर दिया गया तो उसके बाद सीपीआईओ ने उस आवेदन का जवाब देने पर चुप्पी साध ली। 40 दिनों के बाद आवेदक ने सीपीआईओ के खिलाफ 28 अगस्त 2019 को अपील किया तो जमा की गई रकम बैंक ड्राफ्ट के जरिए भेज दी गई और साथ में कहा गया कि कंपनी उनके सवालों के जवाब नहीं दे सकती।

जवाब में कहा गया कि इससे कुछ इंजीनियरों की जान संकट में पड़ सकती है। इसके अलावा कुछ जानकारी नहीं होने की बात कही गई। उधर, ईसीआईएल की तरफ से आवेदक को कोई जवाब नहीं दिया गया। बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 के बाद वोटर टर्नआउट को लेकर खूब विवाद हुआ था। विपक्षी दलों, कई संस्थाओं और संगठनों ने तब इस मसले पर सवालिया निशान लगाए थे।

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