भारत उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे से जुड़े सीमा विवाद पर नेपाल से बातचीत करने के लिए तैयार है। उनका यह बयान काठमांडू द्वारा लिपुलेख पर अपने क्षेत्रीय दावे को दोहराने और इस मुद्दे के समाधान के लिए दिल्ली से बातचीत की मांग करने के कुछ ही दिनों बाद आया है।

आपत्तियों और खंडनों का यह पूरा सिलसिला रविवार को शुरू हुआ। नेपाल ने भारत और चीन द्वारा आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा को लिपुलेख दर्रे से होकर संचालित करने की योजना पर आपत्ति जताई और दावा किया कि यह काठमांडू का क्षेत्र है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तीर्थयात्रा मार्ग को अंतिम रूप देने से पहले काठमांडू से चर्चा नहीं की थी।

भारत ने नेपाल की आपत्ति पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह से अपने क्षेत्र का दावा एकतरफा तरीके से बढ़ाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। सोमवार को नेपाल ने एक बार फिर लिपुलेख पर अपने क्षेत्रीय दावे को दोहराया और इस मुद्दे के समाधान के लिए भारत से बातचीत का प्रस्ताव रखा। नेपाल सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने कहा, “नेपाल का अपनी सीमा बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है, यह क्षेत्र नेपाल का है और सरकार का इस बारे में स्पष्ट मत है और वह अपने रुख पर कायम है।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस लिपुलेख के सवाल पर उन्होंने कहा, “यह कोई नई बात नहीं है, कैलाश मानसरोवर यात्रा 1954 से इसी रास्ते से होती आ रही है। स्थिति यही है। यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है और ज्यादा जानकारी के लिए आप हमारे द्वारा जारी बयान को देख सकते हैं।”

इस मामले पर बातचीत के लिए तैयार- जायसवाल

इस मुद्दे पर दोबारा पूछे जाने पर, जायसवाल ने आगे कहा कि अगर नेपाल लिपुलेख को लेकर विवाद को फिर से उठाता है, तो नई दिल्ली उनसे इस बारे में बात करने के लिए तैयार है।

रविवार को भी नेपाल की आपत्ति की आलोचना करते हुए जायसवाल ने इस बात की पुष्टि की थी कि भारत द्विपक्षीय संबंधों के सभी मुद्दों पर नेपाल के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए खुला है। इसमें संवाद और कूटनीति के माध्यम से सहमत लंबित सीमा मुद्दों का समाधान करना भी शामिल है।

भारत-नेपाल का लिपुलेख दर्रा विवाद

लिपुलेख दर्रा भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से विवाद का मुद्दा रहा है। यह विवाद 2020 में शुरू हुआ, जब तत्कालीन नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कथित तौर पर भारत के साथ सीमा मुद्दे का इस्तेमाल बढ़ते घरेलू दबाव और अपने नेतृत्व को मिल रही चुनौती से ध्यान हटाने के लिए किया।

इसी साल के आखिर में काठमांडू ने देश का एक नया मैप पब्लिश करके विवाद को और बढ़ा दिया। इसमें तीन भारतीय क्षेत्रों, लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल के हिस्से के रूप में दिखाया गया था। नेपाल का दावा है कि 1816 की सुगौली संधि के तहत ये तीनों क्षेत्र नेपाल के अभिन्न अंग हैं।

उस समय भारत ने नेपाल के इस कदम को दृढ़ता से खारिज कर दिया और कहा कि नेपाली सरकार ने एक ऑफिशियल मैप जारी किया था जिसमें भारतीय क्षेत्र के कुछ हिस्से शामिल थे।

विदेश मंत्रालय ने कहा था, “यह एकतरफा कार्रवाई ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है। यह राजनयिक वार्ता के माध्यम से लंबित सीमा मुद्दों को हल करने की द्विपक्षीय सहमति के विपरीत है। भारत इस तरह के क्षेत्रीय दावों को स्वीकार नहीं करेगा।”

कैलाश मानसरोवर यात्रा की बात करें तो चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की तीर्थयात्रा हिंदुओं, जैनियों और बौद्धों के लिए धार्मिक दृष्टि से बहुत खास है। भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के तहत लगभग पांच सालों के अंतराल के बाद पिछले साल इस यात्रा को फिर से शुरू किया गया था।

पिछले साल अगस्त में नेपाल ने लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत और चीन के बीच व्यापार की फिर से शुरुआत पर आपत्ति जताई थी। नेपाली सरकार ने एक बयान जारी कर दावा किया कि देश के ऑफिशियल मैप में महाकाली नदी के पूर्व में स्थित लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल के अभिन्न अंग के रूप में दिखाया गया है।

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसने भारत से नेपाली क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि करने से परहेज करने का आग्रह किया है। भारत ने नेपाल की टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि काठमांडू के दावे न तो न्यायसंगत हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं।

भारत ने राजदूत को किया था तलब

नेपाल ने लिपुलेख तक सड़क निर्माण और कालापानी के मामले में हाल ही में काठमांडू में भारतीय राजदूत को तलब किया और इन दोनों पर कड़ी आपत्ति जताई है। ये अलग बात है कि हफ्ते भर पहले नेपाल ने कोरोना से निपटने के लिए चीनी मेडिकल उपकरण के ऑर्डर को कैंसल कर दिया और हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन की सप्लाई पर भारत का आभार व्यक्त किया। पढ़ें पूरी खबर…