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चुनावों से पहले मोदी सरकार को 28000 करोड़ रुपये देगी RBI, समय पूर्व लाभांश देने का फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक ने समय से पहले मोदी सरकार को लाभांश देने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक सरकार को 28 हजार करोड़ रुपये देगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर शशिकांत दास। (Photo: PTI)

भारतीय रिजर्व बैंक आगामी लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को 28 हजार करोड़ रुपये देगी। बैंक ने समय से पहले सरकार को लाभांश देने का फैसला लिया है। रिजर्व बैंक ने सोमवार (18 फरवरी) को कहा कि वह अंतरिम लाभांश के रूप में केंद्र की मोदी सरकार को 28,000 करोड़ रुपये देगी। आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया। केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा, ‘‘सीमित आडिट तथा वर्तमान आर्थिक पूंजी मसौदे की समीक्षा के बाद निदेशक मंडल ने 31 दिसंबर 2018 को समाप्त छमाही के लिये अंतरिम अधिशेष के रूप में केंद्र सरकार को 280 अरब रुपये हस्तांतरित करने का निर्णय किया है।’’

यह लगातार दूसरा साल है जब रिजर्व बैंक अंतरिम अधिशेष हस्तांतरित कर रहा है। दरअसल, किसानों के खाते में पहली किस्त के रूप में 2000 रुपये देने के लिए सरकार को 20 हजार करोड़ रुपये की 31 मार्च तक जरूरत है। 2 हेक्टेयर से कम जमीन वाले करीब 12 करोड़ किसानों को ये रकम देनी है। माना जा रहा है कि पिछले साल दिसंबर महीने में हिंदी पट्टी के तीन बड़े राज्यों के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा सरकार किसानों को अपनी ओर गोलबंद करने के लिए यह कदम उठा रही है। कुछ ही समय बाद देश में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।

इससे पहले, सोमवार को ही केंद्रीय निदेशक मंडल की बैठक को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले चार साल में सरकार की ओर से की गई विभिन्न सुधारों और नीतिगत उपायों तथा उसके प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कहा कि बैंक क्षेत्र में मितव्ययिता के साथ काम कारने के लिये देश को गिने चुने लेकिन बड़े बैंकों की आवश्यकता है। जेटली ने कहा, ‘‘एसबीआई विलय का हमारे पास अनुभव है और अब इस क्षेत्र में दूसरा विलय हो रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक बैंक क्षेत्र की बात है, भारत को गिने-चुने बड़े बैंकों की जरूरत है जो हर मायने में मजबूत हो। कर्ज की दर से लेकर बड़े पैमाने की मितव्ययिता के अनुकूलतम उपयोग तक में इसका लाभ उठाने में मदद मिलेगी।’’ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने तीन बैंकों के विलय को मंजूरी दे दी। इससे देश में एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक के बाद तीसरा सबसे बड़ा बैंक सृजित होगा। इन तीनों बैंका का विलय एक अप्रैल 2019 से प्रभाव में आएगा। इस विलय के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या घटकर 18 रह जाएगी।

वहीं,  अरूण जेटली के संबोधन के बाद रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वह मुख्य दर ‘रेपो’ में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के बारे में चर्चा करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक प्रमुखों से इस सप्ताह मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को देना काफी महत्वपूर्ण है। खासकर केंद्रीय बैंक की नीतिगत दर में घोषणा के बाद यह और महत्वपूर्ण है। मैं सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के साथ 21 फरवरी को बैठक करूंगा।’’

इस महीने की शुरूआत में रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दर ‘रेपो’ को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) पुनर्गठन योजना के बारे में दास ने कहा कि आरबीआई ने हाल ही में उन इकाइयों के लिये पैकेज की घोषणा की है जिनके ऊपर 25 करोड़ रुपये तक का बकाया है। (भाषा इनपुट के साथ)

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