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नोटबंदी पर आरबीआइ भी रहा अंधेरे में

बड़े नोटों को अमान्य करने के सरकार के फैसले में रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया को शामिल ही नहीं किया गया था।

Author नई दिल्ली | November 20, 2016 4:35 AM
RBI latest news, RBI GST News, RBI Demonetisation, RBI NPA News, RBI Newsभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भारत के छह प्रमुख शहरों में ये सर्वे कराता है।

दीपक रस्तोगी

बड़े नोटों को अमान्य करने के सरकार के फैसले में रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया को शामिल ही नहीं किया गया था। वित्त मंत्रालय के चुनिंदा अफसरों ने रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया की ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ को धता बताते हुए रोड-मैप तैयार किया और अचानक घोषणा कर दी गई। नतीजा देश में नकदी संकट के रूप में सामने है। जबकि, रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया अपनी ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ के तहत चरणबद्ध योजना पर काम कर रहा था। इस नीति के तहत आरबीआइ ने सभी बैंकों को अपनी एटीएम प्रणाली में सुधार करने का निर्देश जारी किया था। सभी बैंकों को अपने 10 फीसद एटीएम सिर्फ एक सौ रुपए के नोटों के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद के चरण में बड़े नोटों को धीरे-धीरे बदला जाना था। छोटे नोटों का चलन बढ़ाया जाना था। आरबीआइ की योजना में कहीं भी दो हजार रुपए के नोटों का चलन था ही नहीं।

रिजर्व बैंक की दीर्घकालिक योजना और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा तैयार की गई और प्रधानमंत्री द्वारा आठ नवंबर को घोषित की गई योजनाओं में आकाश-पाताल का फर्क है। प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक घोषणा के महज छह दिन पहले आरबीआइ ने सभी बैंकों को इस आशय का सर्कुलर जारी किया था। रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया का दो नवंबर का परिपत्र (आरबीआइ/2016-17/106 डीसीएम(सीसी) नंबर 1170/03.41.01/2016-17) अपने आप में काफी कुछ बता रहा है। सभी बैंक प्रमुखों को निर्देश भेजा गया कि ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ के पायलट प्रोजेक्ट के तहत सभी बैंक अपने 10 फीसद एटीएम में तब्दीली करें, जिससे कि उन एटीएम से सिर्फ 100 रुपए के नोट जारी किए जा सकें। जाहिर है, वह सर्कुलर और यहां तक कि आरबीआइ की ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ अब बेमतलब हो चुकी है।

तकनीकी रूप से इस तरह की तब्दीली मुश्किल नहीं थी, इसलिए 15 दिन में यह तब्दीली करने को कहा गया। एटीएम मशीन में तीन ट्रे होती हैं, जिनमें क्रम से 100, 500, 1000 रुपए के नोट रखे जाते थे। आरबीआइ की योजना के तहत पांच सौ और एक हजार की ट्रे की जगह सौ रुपए की साइज वाली ट्रे लगाई जानी थी। सॉफ्टवेयर के साथ ही मशीनों में नोट रखने की ट्रे भी बदली जानी हैं। रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया ने जुलाई 2016 में एटीएम की संख्या के बारे में रिपोर्ट तैयार की थी। देश में कुल दो लाख एक हजार 861 एटीएम मशीनें हैं। इनमें से 17 नवंबर तक 20 हजार मशीनों को सिर्फ सौ रुपए के नोट जारी करने के लिए आरक्षित किया जाना था।

रिजर्व बैंक ने बैंकों को एटीएम की सूची भेजी, जिनमें 17 नवंबर तक इस तरह की तब्दीलियां की जानी थी। इस काम की प्रक्रिया चल ही रही थी कि प्रधानमंत्री ने नोटों पर पाबंदी का एलान कर दिया और सभी बैंक नोट बदलने में उलझ गए। साथ ही, वित्त मंत्रालय के नए निर्देशों के तहत तत्काल प्रभाव से सभी एटीएम मशीनों के सॉफ्टवेयर ही बदले जाने हैं, जिससे कि उनसे नए जारी किए जा रहे दो हजार और बाद में पांच सौ रुपए के नए नोट निकाले जा सकें। जाहिर है, 20 हजार एटीएम में तब्दीली करने की योजना की धज्जियां उड़ चुकी हैं।
देश का स्वायत्तशासी और शीर्षस्थ वाणिज्यिक संस्थान है रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया। आरबीआइ ने यूपीए सरकार के जमाने में ही अपनी ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ तय की थी, जिसके तहत धीरे-धीरे बड़े नोटों की संख्या घटाई जानी थी और छोटे नोटों का चलन बढ़ाया जाना था। मौजूदा वित्त वर्ष के आखिर तक सौ रुपए के नए नोटों का चलन बढ़ाया जाना था। मांग के मुताबिक पांच सौ रुपए के नोटों की छपाई रिजर्व बैंक के मुद्रणालयों में चल रही थी। अब नई छपाई के लिए जो टेंडर होते, वे एक सौ और पचास रुपए के नोटों के। रिजर्व बैंक की मूल योजना में कहीं भी दो हजार रुपए के नोटों की छपाई का मसला था ही नहीं। यह तो अक्तूबर में उर्जित पटेल को नया गवर्नर बनाए जाने के बाद आनन-फानन में लिया गया फैसला है।

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