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रवीश कुमार का पोस्ट- बिहार के 18 ज़िलों के सरकारी अस्पताल में ICU नहीं, स्वास्थ्य मंत्री नाम का प्राणी काम क्या करता होगा? वायरल

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने नीतीश कुमार की सरकार पर सवाल खड़े करते हुए लिखा कि किसी भी सरकार को ठोस काम करने के लिए 15 साल एक लंबा वक्त होता है।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: October 31, 2020 10:16 AM
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बिहार विधानसभा चुनाव शुरू हो चुके हैं और दोनों प्रमुख दल, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) औऱ जनता दल यूनाइटेड (JDU) मतदाताओं को लुभाने में लगे हुए हैं। इन सब के बीच वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट पर एक चौंकाने वाला आंकड़ा बताया है। रवीश ने लिखा कि बिहार के 18 ज़िलों के सरकारी अस्पताल में ICU की सुविधा ही नहीं है।

रवीश ने नीतीश कुमार की सरकार पर सवाल खड़े करते हुए लिखा कि किसी भी सरकार को ठोस काम करने के लिए 15 साल एक लंबा वक्त होता है। वरिष्ठ पत्रकार ने लिखा “बेशक नीतीश के इस कार्यकाल में सड़कें बनीं और बिजली पहुँची लेकिन इसी काम के आस पास नीतीश ने 15 साल काट लिए। कम से कम उन्हें स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। मशीनें ख़रीद कर अस्पताल में पड़ी हैं मगर डॉक्टर नहीं हैं। कहीं इमारत 13 साल से बनती रही है।”

रवीश ने आगे लिखा कि सोचिए बिहार के 18 ज़िलों के सरकारी अस्पताल में ICU नहीं है। यह जवाब सरकार ने ही 2017 में विधानसभा में दिया था। फिर स्वास्थ्य मंत्री नाम का प्राणी काम क्या करता होगा? नालंदा तो नीतीश कुमार का ज़िला है। यहाँ के एक अस्पताल में करोड़ों रुपये की मशीनें और बिस्तर धूल खा रहे हैं।

नीतीश पर निशाना साधते हुए कहा “काश कालेजों और अस्पतालों में काम हुआ होता तो जनता की तकलीफ़ कम हुई होती। आज नीतीश और बीजेपी को 15 साल पुराने शासन काल की बात नहीं करनी पड़ता। दरअसल सड़क और बिजली की व्यवस्था करके भी नीतीश ने बिहार को 30 साल पीछे पहुँचा दिया है।”

इसी के साथ रवीश ने अपने प्राइम टाइम शो का एक वीडियो भी शेयर किया है और लोगों से उसे देखने का आग्रह किया है। रवीश ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा “आप इस रिपोर्ट को देखें। सोच कर ही घबराहट होती है कि बिहार की आम जनता बीमारी के वक्त किस तूफ़ान से गुजरती होगी।”

रवीश के इस पोस्ट पर यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। जयप्रकाश नाम के एक यूजर ने लिखा “लालू नीतीश मोदी तेजस्वी पप्पू मांझी कोई आ जाएँ बिहार UP का भला नहीं होने वाला, वजह राजनितिक भंवर जाल में फंस गयें हैं यहाँ के लोग। जनता जब तक हम अपनी प्राथमिकता तय नहीं करेंगी तब तक ऐसे ही चलता रहेगा। हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये थी शिक्षा स्वास्थय बिजली पानी सड़क। लेकिन हम उलझे पड़े हैं हिन्दू मुस्लिम ब्राह्मण ठाकुर दलित यादव पासवान में। राम भला करे।”

एक यूजर ने लिखा “आपकी बात से बिलकुल सहमत हूँ अगर किसी को आत्महत्या करनी हो तो सरकारी अस्पताल में जाय….पंचायत स्तर पर एक प्रसव केंद्र तक नहीं है जिला स्तर का अस्पतालों की तो बात छोड़िए पटना में जो अस्पताल है वहां भी सब कुछ बाहर से खरीदना पड़ता है बस डॉक्टर का शुल्क छोड़ के।”

राजेश मिश्रा ने लिखा “सरकार का जोर सड़क, बिल्डिंग निर्माण जैसे ढांचागत सुविधा के विकास में ज्यादा होता है। क्योंकि इस काम मे कमीशन 60% तक होता है। इसलिए सड़क बनते ही अगली बारिश में उखड़ जाती है। मंत्री, अफसर, बाबू, छुटभैए नेता, ठेकेदार की चाहत ढांचागत विकास पर जोर होता है। निर्माण ही उनका “विकास” हे। अस्पताल या स्कूलों के विकास में क्या मिलेगा?”

बता दें बिहार चुनाव तीन चरणों में किया जा रहा है। राज्य में पहले चरण के मतदान हो चुके हैं। अब मंगलवार यानी 3 नवंबर को 94 सीटों पर दूसरे चरण का मतदान होना है। वहीं तीसरे एवं आखिरी चरण का मतदान 7 नवंबर को होना है। सभी चरणों के चुनाव के बाद 10 नवंबर को बिहार चुनाव के नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे।

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