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फंसाओ, डराओ, सताओ…यही काम है UAPA का- रवीश कुमार का कटाक्ष

रवीश ने केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की बात करते हुए कहा “कप्पन पिछले साल हाथरस में हुए बलात्कार और हत्या के एक केस को कवर करने जा रहे थे। पिछले साल अक्टूबर में सिद्दीक कप्पन और तीन अन्य को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और बाद में उन पर UAPA की दो धाराएं लगा दी गईं।”

फंसाओ, डराओ, सताओ…यही काम है UAPA का- रवीश कुमार का कटाक्ष
सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं पर UAPA लगा उन्हें जेल भेजा गया। (Express Photo: Gajendra Yadav)

दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन हुआ था। जिसके बाद इसका विरोध करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और छात्र नेताओं पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कार्यवाही करते हुए उन्हें जेल में दाल दिया गया।

इस कानून को लेकर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने एक फेसबुक पोस्ट लिखा है और अपने प्राइम टाइम शो का वीडियो लिंक शेयर किया है। रवीश ने लिखा “फँसाओ, डराओ, सताओ यही काम है UAPA का, तमिलनाडु में चुनाव आया तो नागरिकता क़ानून के विरोधियों पर लगे 1500 केस वापस हो गए, असम में चुनाव आया तो नागरिकता क़ानून भाषण और घोषणापत्र से ग़ायब हो गया।”

अपने शो में रवीश ने केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की बात करते हुए कहा “कप्पन पिछले साल हाथरस में हुए बलात्कार और हत्या के एक केस को कवर करने जा रहे थे। पिछले साल अक्टूबर में सिद्दीक कप्पन और तीन अन्य को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और बाद में उन पर UAPA की दो धाराएं लगा दी गईं। राजद्रोह की भी धारा लगाई गई है।”

रवीश ने आगे कहा “इस केस में अतीक उर्र रहमान, मसूद अहमद और आलम को भी गिरफ्तार किया गया है। सिद्दीक कप्पन की मां 18 जून को गुज़र गईं। सिद्दीक ने मथुरा कोर्ट में ज़मानत याचिका लगाई है जिसकी सुनवाई 5 जुलाई को होगी। अपने आवेदन में कप्पन ने कहा है कि मैं पत्रकार हूं। मैंने भारतीय प्रेस परिषद के परिभाषित दायरे से बाहर जाकर कुछ भी ग़लत नहीं किया है। मैं निर्दोष हूं।”

सिद्दीक कप्पन 8 महीने 22 दिन से जेल में बंद हैं। इन पर शांति भंग का भी आरोप लगा था कि कप्पन, अतीक-उर-रहमान, मसूद अहमद, और आलम, दो समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे। रवीश के इस पोस्ट पर कुछ यूजर्स ने भी अपनी प्रतिकृया दी हैं।

अजित नाम के यूजर ने लिखा “रवीश कुमार जी इस बेबाक और निर्भीक रिपोर्टिंग के लिए आपको धन्यवाद। कुछ सालों में यू ए पी ए और राजद्रोह जैसे मामलों के थोपे जाने का चलन बेहद तेजी से बढ़ा है। समाज के ऐसे लोग जो सरकार की नीतियों के विरोध की आवाज बुलंद करते हों, इन आरोपों के तहत सलाखों के पीछे धकेल दिए गए।”

बिलाल ने लिखा “भाई साहब इतिहास साक्षी है देश में विधि विधान बनाए ही इसीलिए जाते हैं..!! ताकि विरोधियों को दबाकर, कुचलकर ,डराकर ,सहमा कर, केवल गुलाम बनाने की प्रथा को यथावत रखा जाय ….???
यह खेल सदियों से चला आ रहा है।” राजेंद्र झा ने लिखा “मुझे तो 1975 इंदिरा की इमरजेंसी आज भी पसंद है।देश तभी सुधरेगा।जल्द लागू होना चाहिए।रबीश जी इसके बारे में भी लिखो।”

 

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First published on: 25-06-2021 at 08:05:13 am
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