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कोरोनाः मोदी सरकार ने टीके पर 1 पैसा न किया खर्च, सर्टिफिकेट पर फोटो छपवाने की चतुराई की खुल गई है पोल- रवीश कुमार की टिप्पणी

रवीश ने लिखा "मोदी सरकार ने टीके के रिसर्च और विकास में एक नया पैसा खर्च नहीं किया है। खुद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह बात कही है। लेकिन भोली जनता को लगा कि इस टीके के विकास के पीछे मोदी जी ख़ुद लगे हैं।"

मोदी सरकार ने टीके के रिसर्च और विकास में एक नया पैसा खर्च नहीं किया है। (file)

देश के कई राज्यों में टीका न होने के कारण कई जगहों पर वैक्सीनेशन बंद करना पड़ा। ‘द गार्डियन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बात का कोई सबूत नहीं है कि बाकी देशों की तरह मोदी सरकार ने टीके के रिसर्च में कोई पैसा खर्च किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने पूरी दुनिया को टीका भेजा लेकिन सीरम इंस्टीट्यूट को रिसर्च के लिए एक पैसा नहीं दिया।

इस रिपोर्ट का जिक्र वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अपने प्राइम टाइम शो और फेसबुक में किया है। रवीश ने लिखा “मोदी सरकार ने टीके के रिसर्च और विकास में एक नया पैसा खर्च नहीं किया है। खुद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह बात कही है। लेकिन भोली जनता को लगा कि इस टीके के विकास के पीछे मोदी जी ख़ुद लगे हैं। पाँच नया पैसा ख़र्च किए बिना टीके के सर्टिफिकेट पर अपना फ़ोटो छपवाने की चतुराई की पोल खुल गई है।”

पत्रकार ने लिखा “दुनिया के अख़बारों में छप रहे हैं कि सारी सरकारों ने टीके के विकास में अरबों रुपये डालें लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने एक पैसा खर्च नहीं किया। और टीके के वितरण पर इस तरह से कंट्रोल किया जैसे इनकी जेब से भी पैसा लगा हो। नवंबर के महीने में भारत की दोनों कंपनियों का दौरा करते हैं। सीरम जाते हैं और भारत बायोटेक जाते हैं। सोचिए आपको लगा होगा कि सब मोदी जी करा रहे हैं।”

रवीश ने आगे लिखा “प्रोपेगैंडा की भूख कितनी हो सकती है आप अंदाज़ा नहीं लगा सकते। आपके अपनों के साथ जो नरसंहार हुआ है उसे जल्दी भुला दिया जाएगा। महामारी थमते ही नया ईवेंट लाँच होगा। नया नारा लाँच होगा। आप फिर छले जाएँगे। होगा कुछ नहीं मोदी जी का फ़ोटो बंटेगा।”

बता दें भारत सरकार ने एक सरकारी पैनल की सलाह पर कोविशील्ड टीके की दो डोज लगवाने के बीच के समय को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह करने का फैसला लिया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को इस आशय की घोषणा करते हुए कहा कि यह ‘‘विज्ञान आधारित फैसला है’’ और इस विश्वास के साथ लिया गया है कि इससे कोई अतिरिक्त खतरा नहीं होगा।

मंत्रालय ने कहा, लेकिन नेशनल टेक्नीकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्युनाइजेशन (एनटीएजीआई) (टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह) ने कोवैक्सीन के दो डोज के समयांतर (पहला और दूसरा डोज लगने के बीच का समय) में बदलाव का कोई सुझाव नहीं दिया है।

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