Ravish Kumar once again flak Prime Minister Narendra Modi says I will go to Harvard - रवीश कुमार बोले-पीएम के भारत लौटने के बाद जाऊंगा हार्वर्ड, गेट पर पकौड़े तलता मिलूंगा - Jansatta
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रवीश कुमार बोले-पीएम के भारत लौटने के बाद जाऊंगा हार्वर्ड, गेट पर पकौड़े तलता मिलूंगा

पत्रकार रवीश कुमार ने एक बार‍ फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। इस बार उन्‍होंने पीएम मोदी की दावोस यात्रा को निशाना बनाया है।

Author नई दिल्‍ली | January 23, 2018 3:47 PM
टीवी पत्रकार रवीश कुमार। (रवीश के फेसबुक अकाउंट से)

पत्रकार रवीश कुमार ने एक बार‍ फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। इस बार उन्‍होंने पीएम मोदी की दावोस यात्रा को निशाना बनाया है। रवीश कुमार ने फेसबुक पोस्‍ट में लिखा, ‘प्रधानमंत्री के भारत लौटने के बाद मैं हार्वर्ड (अमेरिका) जाने की तैयारी में लग जाऊंगा। उनके पीछे देश खाली-खाली न हो जाए इसलिए रुक गया हूं। आप चाहें तो 10 फरवरी को हार्वर्ड के गेट पर मुझसे मिल सकते हैं। मैं बाहर पकौड़े तलता मिल जाऊंगा। सर्दी बहुत होगी, इसलिए रजाई बनवा रहा हूं। जयपुरी रजाई से काम चल जाएगा वहां जी? दो दिन रहूंगा। मौका मिला तो हार्वर्ड की लाइब्ररी देखना चाहूंगा।’ पीएम मोदी ने ‘जी न्‍यूज’ चैनल को इंटरव्यू दिया था। इसमें उनसे देश में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के बारे में सवाल पूछा गया था। इस पर पीएम ने पकौड़ा तलने का उदाहरण दिया था। उन्होंने पूछा था कि अगर जी टीवी के बाहर कोई व्यक्ति पकौड़ा बेच रहा है तो वह रोजगार होगा या नहीं?

रवीश कुमार ने पीएम के उदाहरण पर उस वक्‍त भी तंज कसा था। उन्‍होंने फेसबुक पोस्‍ट कर पीएम पर निशाना साधा था। टीवी एंकर ने तब लिखा था, ‘कैमरा भी है, माइक भी है, मौका भी है, ऑफ कोर्स पकौड़ा भी है, आई एम वेटिंग।’ रवीश कुमार रोजगार के मुद्दे पर सरकार पर पहले भी हमला कर चुके हैं। उन्‍होंने 19 जनवरी के एक पोस्‍ट में रोजगार के आंकड़ों के जश्न को झूठा और फ्रॉड करार दिया था। रवीश ने कहा था कि जो लोग पांच से सात करोड़ रोज़गार पैदा करने का दावा कर रहे थे वो छह लाख प्रतिमाह नौकरियां पैदा करने पर जश्न मना रहे हैं। लेकिन, सरकार का ये दावा झूठ है और डरपोक मीडिया ने इसे छाप भी दिया है। नए पोस्‍ट में रवीश ने हार्वर्ड में हिंदी में बोलने का मौका मिलने पर खुशी जताई है। उन्‍होंने लिखा, ‘अच्‍छी बात है कि हार्वर्ड के आयोजक छात्रों ने हिंदी में बोलने के लिए कहा है। वर्ष 2016 में जब कोलंबिया यूनिवर्सिटी गया था तो वहां भी वत्‍सल और प्रोफेसर सुदीप्‍तो कविराज ने हिंदी में बोलने को कहा था। फिर क्‍या था जो अनुवाद करा कर ले गया था उसे किनारे किया और जो बोलना था बोल आया। इस बार भी हार्वर्ड के छात्र प्रतीक ने कहा है कि वहां भारतीय ही होंगे सो मैं हिंदी में बोल सकता हूं।’

रवीश के पोस्‍ट पर कई लोगों ने अपने विचार रखे हैं। ऋषभ सिंह तोमर ने लिखा, ‘छेनू जी आप सीरिया क्‍यों नहीं जाते। वहां आपको अपनापन लगेगा। आपके लोग, आपका कानून और आराम से पूछते रहिएगा कि कौन जाति हो।’ आरव सिंह ने पोस्‍ट किया, ‘आप भी हार्ड वर्क से हार्वर्ड पहुंच गए…वाह।’ रमेश रलिया ने लिखा, ‘वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में आपका स्‍वागत है। अगर आपके पास समय हो तो हमलोग भी आपको देखना चाहेंगे।’

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