ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि सबसे बड़ा टीका अभियान, फिर भी दिन बीतने पर 1 करोड़ की संख्या न छू सके- रवीश कुमार का तंज

रवीश कुमार ने कहा है कि फ़रवरी 2012 में पल्स पोलियो के तहत एक दिन में 17 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाई गई थी। दस साल बाद गोदी मीडिया के प्रोपेगैंडा और करोड़ों रुपये के विज्ञापन के सहारे सरकार पूरा ज़ोर लगाती है और एक दिन में अस्सी लाख टीके ही लगा पाती है।

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– रवीश कुमार का तंज-ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि सबसे बड़ा टीका अभियान, फिर भी दिन बीतने पर 1 करोड़ की संख्या न छू सके (फोटो- पीटीआई)

मोदी सरकार के टीकाकरण अभियान पर तंज कसते हुए रवीश कुमार ने कहा है कि फ़रवरी 2012 में पल्स पोलियो के तहत एक दिन में 17 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाई गई थी। दस साल बाद गोदी मीडिया के प्रोपेगैंडा और करोड़ों रुपये के विज्ञापन के सहारे सरकार पूरा ज़ोर लगाती है और एक दिन में अस्सी लाख टीके ही लगा पाती है।

उनका कहना है कि हो सकता है यह संख्या कुछ और बढ़ कर एक करोड़ तक पहुंच जाए तो भी यह संख्या कितनी मामूली है। पोलियो अभियान की आलोचना करने वाले इसके चरण की धूल भी नहीं छू सके। वो भी तब जब छह महीने से ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि दुनिया का सबसे बड़ा टीका अभियान चल रहा है। उसके बाद भी पूरा दिन बीत जाने के बाद एक करोड़ की संख्या नहीं छू सके। तुर्रा ये कि ये दुनिया का सबसे बड़ा टीका अभियान और विश्व रिकार्ड बन गया है।

रवीश का कहना है कि आज की मामूली कामयाबी को बड़ा बनाने के लिए आंकड़ों को तरह तरह से सजाया जा रहा है। इसे बड़ा बताने के लिए एक करोड़ से कम की आबादी वाले देश गिने जा रहे हैं कि न्यूज़ीलैंड की आबादी से डेढ़ गुना ज़्यादा लोगों को आज टीका लगा है।कम से कम भारत कोरोना से लड़ने में न्यूज़ीलैंड से तो तुलना न ही करे तो बेहतर होगा। न्यूज़ीलैंड की गिनती कोरोना से निपटने वाले सफल देशों में होती है।

आज का अभियान पूरी तरह फ्लाप रहा। यह अभियान धूल झोंकने से ज़्यादा कुछ नहीं है। इसके विज्ञापन पर कितना पैसा खर्च हुआ। हर अख़बार के पहले पन्ने पर विज्ञापन था जिसमें मोदी जी को धन्यवाद था। आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में टीका मुफ़्त दिया जा रहा है। भारत में छह महीने बाद शुरू हुआ है, फिर भी सभी को मुफ़्त नहीं दिया जा रहा है। 25 प्रतिशत टीका प्राइवेट अस्पतालों को दिया जा रहा है। आपको प्रतिशत में बताया जाता है लेकिन असल संख्या कितनी है, नहीं बताया जाता।

सरकार नहीं बताती कि कितने लोगों ने पैसे देकर टीका लिए हैं। आज के अस्सी लाख में कितने लोगों ने पैसे देकर डोज़ लिए हैं। आबादी का एक हिस्सा 780 और 1410 रुपये में टीके का एक डोज़ लगाकर बेवकूफ बन रहा है। वह जान रहा है कि पैसे देकर टीका लिया है लेकिन ख़बर पढ़ रहा है कि भारत में दुनिया का मुफ़्त टीका अभियान चल रहा है।

सवाल पूछा जा रहा है कि छह महीने में आपने कितना कम टीका लगाया है, आप क्या कर रहे थे, तो जवाब दिए जा रहा है कि हमने छह दिन बाद एक दिन में सबसे अधिक टीका लगाने का रिकार्ड बनाया है।मूर्खता की भी हद होती है। क्या इस तरह से जनता को बेवकूफ बनाने का खेल होगा। हफ़्ते भर भूखा रखो और एक दिन दस हज़ार लोगों को खाना खिला कर ढिंढोरा पीटो को एक दिन दिन में दस हज़ार लोगों को भोज कराया गया।

शाह ने रिकॉर्ड तोड़ कोविड टीकाकरण के लिए प्रधानमंत्री की सराहना की

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक दिन में रिकॉर्ड तोड़ 80 लाख लोगों के कोविड-19 रोधी टीकाकरण के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोमवार को सराहना की। सोमवार को देश भर में कोविड-19 की 80 लाख से अधिक खुराक दी गई, जो किसी एक दिन का सर्वाधिक आंकड़ा है। शाह ने ट्वीट किया- अतुलनीय! भारत के टीकाकरण अभियान में एक और मुकाम। कोविड टीके की 80 लाख खुराक आज दी गई। रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व सराहना का पात्र है।

सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों की सूची में भारत का नंबर 16वां

उधर, एक रिपोर्ट के अनुसार- विश्व के 30 सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों की बात की जाए तो भारत का वैक्सीनेशन प्रोग्राम तकरीबन बीच में है। इस लिस्ट में भारत 16 वें नंबर पर है। लिस्ट में सबसे ऊफर ब्रिटेन का नंबर है जबकि दूसरे नंबर पर इस मामले में अमेरिका आता है। कुल डोज की बात की जाए तो ब्रिटेन में ये संख्या प्रति 100 पर 108.7 है। जबकि भारत में ये 19.6 है। रिपोर्ट कहती है कि सप्लाई न होने से टीकाकरण अभियान भारत में सुस्त है। लेकिन अगस्त से इसमें सुधार होने के आसार हैं। ये वो समय है जब तीसरी लहर अपनी आहट देगी।

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