भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद रविशंकर प्रसाद ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी के चुनाव आयोग और 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर लगाए गए आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को लोकतंत्र और लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करने का कोई अधिकार नहीं है।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्होंने ममता बनर्जी के शासन के दौरान पश्चिम बंगाल में कथित अत्याचारों को देखा है। उनके मुताबिक, ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान लोगों को मतदान करने और नामांकन दाखिल करने तक की अनुमति नहीं दी गई और विरोध करने वालों को जेल भेजा गया। उन्होंने इसी आधार पर ममता बनर्जी के लोकतंत्र से जुड़े बयानों पर सवाल उठाए। यह बयान ऐसे समय आया है, जब ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के कामकाज और राज्य में हुए विधानसभा चुनावों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ममता ने ECI और मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने एक अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा था। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए और कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में मतदान से जुड़ी CCTV फुटेज सुरक्षित रखी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने लोगों के अधिकारों से उन्हें वंचित करने का काम किया।
ममता बनर्जी ने दावा किया कि चुनाव के दौरान EVM से छेड़छाड़ और हैकिंग हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके चुनाव एजेंटों को परेशान किया गया और कुछ जगहों पर उन्हें मतगणना केंद्रों में प्रवेश करने से रोका गया। हालांकि, ये आरोप ममता बनर्जी और TMC की ओर से लगाए गए हैं।
SIR को लेकर भी ममता के गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण ऐसे लोगों के नाम भी मतदाता सूची से प्रभावित हुए, जो वोट देने के पात्र थे। उन्होंने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया से चुनाव में BJP को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
TMC प्रमुख ने चुनाव आयोग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।
चुनाव में केंद्रीय बलों की तैनाती पर भी सवाल
ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया गया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान इन मुद्दों को लेकर शिकायतें की थीं, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।
ममता ने यह भी दावा किया कि मतगणना के दौरान उनकी पार्टी एक समय करीब 53 हजार वोटों से आगे थी, लेकिन बाद में स्थिति बदल गई। उन्होंने EVM और CCTV से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।
EVM जलाए जाने की घटना का भी जिक्र
ममता बनर्जी ने कोलकाता के अलीपुर इलाके में जून में हुई एक सरकारी इमारत में आग की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में EVM नष्ट हुई थीं और इसे चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों के संदर्भ में उठाया। इस मामले की जांच के लिए कोलकाता पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।
दूसरी ओर, BJP नेताओं ने ममता बनर्जी के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग का बचाव किया है। ऐसे में पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची के SIR और EVM को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
रविशंकर प्रसाद ने क्या कहा?
ममता बनर्जी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए रविशंकर प्रसाद ने उनके शासनकाल का हवाला दिया और कहा कि पंचायत चुनावों में लोगों को मतदान और नामांकन से रोकने जैसे आरोपों के बीच उन्हें लोकतंत्र की बात नहीं करनी चाहिए। उन्होंने ममता के आरोपों को लेकर सीधे उनके राजनीतिक रिकॉर्ड पर सवाल खड़ा किया।
इस पूरे विवाद के बीच INDIA ब्लॉक के कई दल भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहे हैं। 30 सितंबर की बैठक के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर संयुक्त रूप से विरोध जताने की बात कही थी।
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दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर लखनऊ के चौक-चौराहों तक चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। लखनऊ में सपा कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयुक्त के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को यूपी पुलिस ने हिरासत में लिया। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
