पश्चिम एशिया संकट के कारण एलपीजी आपूर्ति पर असर के बीच भारत में पाइप्ड नेचुरल गैस(पीएनजी) अपनाने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। मार्च से अब तक पीएनजी कनेक्शन की संख्या बढ़कर 7.76 लाख हो गई है। इस दौरान एलपीजी को छोड़कर करीब 41000 उपभोक्ताओं ने पीएनजी को अपनाया है, जिसमें बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। इससे एलपीजी पर निर्भरता कम होने के साथ ही घरेलू और औद्योगिक इकाईयों में भी गैस की जरूरतें पूरी की जा सकेंगी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव के मुताबिक मार्च से अब तक करीब 5.18 लाख पीएनजी कनेक्शनों में गैस की आपूर्ति शुरू करने के साथ ही अतिरिक्त 2.58 लाख कनेक्शन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया गया है। अब कुल पीएनजी कनेक्शनों की संख्या 7.76 लाख तक पहुंच गई है जबकि करीब 5.87 लाख ग्राहकों ने नए कनेक्शनों के लिए पंजीकरण करवाया है। इस अवधि के दौरान 41,000 से अधिक पीएनजी उपभोक्ताओं ने वेबसाइट के जरिए अपने एलपीजी कनेक्शन वापस कर दिए हैं।
अधिकारी क्या बता रहे हैं?
अधिकारी ने बताया कि मौजूदा हालात के बीच, सरकार की कोशिश है कि पीएनजी के विस्तार कैसे किया जाए और इसके लिए सभी जरूरी कदम भी उठाए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने 24 मार्च के राजपत्र के जरिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण (पाइपलाइनों और अन्य सुविधाओं को बिछाने, बनाने, संचालित करने और विस्तार करने के माध्यम से) आदेश, 2026 को अधिसूचित किया है।
यह आदेश पूरे देश में पाइपलाइन बिछाने और उनका विस्तार करने के लिए एक सुव्यवस्थित और समय-बद्ध ढांचा प्रदान करता है। इससे पीएनजी नेटवर्क के विकास में तेजी से अंतिम-छोर तक बेहतर पहुंच के साथ ही स्वच्छ र्इंधनों को प्रोत्साहन के साथ ही भारत की गैस-आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
चार साल के दौरान पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े
मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, देश में डीजल और पेट्रोल की पर्याप्त आपूर्ति है फिर भी कुछ जगहों पर घबराहट में खरीदारी के मामले सामने आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। 6 अप्रैल, 2022 से अब तक पेट्रोल या डीजल की कीमत में बढ़ोतरी नहीं की गई है बल्कि इसके विपरीत सरकार ने 2022 और 2024 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की। उन्होंने कहा, पश्चिम एशिया संकट के दौरान 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई ताकि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहे।
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