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भारतीय न्यायिक सेवा में आरक्षण चाहते हैं दलित सांसद, केंद्रीय मंत्री पासवान बोले- मैं उनकी मांग का समर्थन करता हूं

रामविलास पासवान ने कहा कि "सभी सांसदों ने न्यायिक सेवा में आरक्षण की मांग की है और इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस के गठन की मांग की है, क्योंकि जब भी कमजोर वर्ग से जुड़े मामले कोर्ट में जाते हैं, वो अटक जाते हैं।"

Author Translated By नितिन गौतम नई दिल्ली | Updated: February 15, 2020 9:57 AM
केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट के इस ऑब्जर्वेशन से खफा कई दलित सांसदों ने केन्द्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान के घर पर उनसे मुलाकात की। सांसदों ने इस मुलाकात में इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस (IJS) के गठन की मांग की है, जिसमें जाति के आधार पर आरक्षण देने की मांग की गई है।

द इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि “सभी सांसदों ने न्यायिक सेवा में आरक्षण की मांग की है और इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस के गठन की मांग की है, क्योंकि जब भी कमजोर वर्ग से जुड़े मामले कोर्ट में जाते हैं, वो अटक जाते हैं।”

जब पासवान से पूछा गया कि क्या वह सांसदों की मांग का समर्थन करते हैं? इस पर पासवान ने कहा कि “मैं इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस के गठन की मांग का दो आधार पर समर्थन करता हूं। पहला इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए क्योंकि मौजूदा कोलेजियम सिस्टम में इसकी कमी है। दूसरा इसमें समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।”

पासवान ने कहा कि “संविधान के अनुच्छेद 312 में एक ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विस के गठन की बात कही गई है। यह इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस और इंडियन पुलिस सर्विस की तरह होना चाहिए। इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस की चुनाव प्रक्रिया को एक प्रतिस्पर्धी परीक्षा के तहत और आरक्षण देकर पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।”

केन्द्रीय खाद्य मंत्री ने कहा कि “सभी दलित सांसदों ने एकमत से इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस के गठन की मांग की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को भी वापस लेने की मांग की जिसमें कहा गया है कि राज्य प्रमोशन और नियुक्ति में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसके साथ ही ये भी कि कोटा मौलिक अधिकार नहीं है।”

पासवान ने कहा कि “आरक्षण को कोई भी खत्म नहीं कर सकता। ये पत्थर की लकी है। अब यह ऊंची जातियों के गरीब वर्ग के लोगों को भी मिलना शुरू हो गया है। इसलिए अब कोई भी इसे खत्म नहीं कर सकता।”

सभी सांसदों का मानना है कि सरकार को इस मामले में एक अध्यादेश लाना चाहिए जैसे कि अनुसूचित जाति और जनजाति कानून के तहत किया गया था। चाहे संविधान में संशोधन किया जाए या अलग कानून बनाया जाए, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।

लोजपा के संस्थापक ने बीती 10 फरवरी को दलित सांसदों की एक बैठक बुलायी थी, जिसमें करीब 70 सांसदों ने शिरकत की, जिसमें एनडीए सरकार के दर्जनभर मंत्री भी मौजूद थे। बैठक में शामिल होने वाले सांसदों में डीएमके सांसद ए राजा, शिवसेना के राजेंद्र गवित, केन्द्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत और अर्जुन राम मेघवाल आदि थे।

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