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रामनाथ कोविंद के बहाने कई निशाने साधे मोदी ने

मोदी ने साफ संकेत दिया है कि जब उनकी हैसियत किसी को राष्ट्रपति बनवाने की है तो वह किसी और के बजाय अपनी पार्टी के नेता को ही यह मौका देंगे।

Author नई दिल्ली | June 20, 2017 5:14 AM
रामनाथ कोविंद (दाहिने) हो सकते हैं देश के अगले राष्ट्रपति।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को भाजपा का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। कोविंद पुराने भाजपा की पृष्ठभूमि वाले नेता हैं। इससे मोदी ने साफ संकेत दिया है कि जब उनकी हैसियत किसी को राष्ट्रपति बनवाने की है तो वह किसी और के बजाय अपनी पार्टी के नेता को ही यह मौका देंगे। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत दिलाने में अन्य बिरादरियों के अलावा दलितों, खासकर गैर जाटव दलितों की बड़ी भूमिका रही है। कोविंद के बहाने उनको पुरस्कृत करने के साथ-साथ देश में सबसे ज्यादा सांसद देने वाले उत्तर प्रदेश को ज्यादा महत्त्व देने का भी यह प्रयास है। कोविंद गैर जाटव दलित कोली जाति से है और कानपुर देहात के मूल निवासी हैं।

दलित के नाम पर कई दलों का समर्थन आसानी से उन्हें मिल जाएगा। पार्टी यह संदेश देने की कोशिश की कि जब उसे मौका मिला तो उसने रामनाथ कोविंद जैसे पढ़े-लिखे पार्टी कार्यकर्ता को इतने बड़े पद पर मौका दिया। आने वाले दिनों में गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक से लेकर कई राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं। उसमें दलित वोटों को भाजपा के पक्ष में लाने में इससे आसानी होगी। पार्टी के पुराने दलित नेता को उम्मीदवार बनाकर प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी दिग्गजों लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी आदि को भी संदेश देने का काम किया।

संसदीय बोर्ड की घंटे भर चली बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने संवाददाता सम्मेलन में रामनाथ कोविंद (72) को भाजपा की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा की। उनके बोलने के अंदाज से लग रहा था कि वह अपने उम्मीदवार की जीत मान रहे हैं। आमराय बनने पर भी राष्ट्रपति के चुनाव में किसी न किसी बहाने चुनाव होता ही रहा है। लेकिन अभी के समीकरण में साफ है कि भाजपा जिसे तय करेगी, वही राष्ट्रपति चुना जाएगा।

वैसे पार्टी ने तीन वरिष्ठ नेताओं वेंकैया नायडू, राजनाथ सिंह और अरुण जेटली की कमेटी बनाकर आम सहमति बनाने का प्रयास भी किया। विपक्षी दलों को एतराज था कि पहले भाजपा अपना उम्मीदवार बताए, फिर आम सहमति की बात होगी। राष्ट्रपति चुनाव के लिए 28 जून तक पर्चा भरा जाना है। शायद इसीलिए भाजपा ने 19 जून को ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 24 जून को विदेश यात्रा पर जाने से पहले 23 जून को कोविंद राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन पत्र भरेंगे।

भाजपा को अपना राष्ट्रपति बनवाने का यह दूसरा मौका मिला है। पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते राजग इस हैसियत में नहीं थी कि अपनी पार्टी के व्यक्ति को राष्ट्रपति बनवा पाएं तो उन्होंने दांव चल कर मशहूर वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम को उम्मीदवार बनवाकर उन पर ज्यादातर दलों में सहमति करवाकर उन्हें राष्ट्रपति बनवा दिया। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाजपेयी से बेहतर हालत में हैं इसलिए पार्टी के पुराने नेता रामनाथ कोविंद को उन्होंने उम्मीदवार बनवा दिया।
कहने को तो अमित शाह ने बताया कि पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में कई नामों पर चर्चा हुई लेकिन तय कोविंद का नाम किया गया। पहले से लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत समेत कई नाम चर्चा में थे। कहा यह भी जा रहा था कि आमराय के कारण वरिष्ठ नेता शरद पवार से लेकर किसी गैर राजनीतिक व्यक्ति को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया जाएगा। भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने तो आएसएस प्रमुख मोहन भागवत और कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन का नाम सुझाया था।

पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का नाम तो अयोध्या मामले में चल रहे मुकदमे के खुलने से बंद हो गया था। आडवाणी का नाम भाजपा के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने खूब चलाया था। विपक्षी दलों की इस मुद्दे पर 22 जून को बैठक होगी। रामनाथ कोविंद के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि वे पढ़े-लिखे और कम बोलने वाले नेता हैं। 1977 में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से जुड़े रहे कोविंद तभी से भाजपा नेताओं से जुड़ गए और लगातार भाजपा में रहे। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में भेजा या जो भी पद दिया, वह अपनी पूरी क्षमता से काम करते रहे। पार्टी कार्यकर्ता होने के कारण उन्हें तीन साल पहले राज्यपाल बनाए जाने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विरोध किया था। लेकिन उसके बाद न नीतीश कुमार और न ही किसी दूसरे नेता ने उनके बारे में कोई विपरीत टिप्पणी की। जो वोट समीकरण है, उसमें आम सहमति न बनने पर भी कोविंद का राष्ट्रपति बनना लगभग तय है। भाजपा अध्यक्ष का कहना था कि प्रधानमंत्री की कोशिश रामनाथ कोविंद के नाम पर आम सहमति बनाने की है।

 

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