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रामनाथ गोयनका अवॉर्ड्स में बोले आमिर- डर के चलते किरण ने मुझसे कही थी भारत छोड़ने की बात

आमिर ने दुनिया भर में फैले आतंकवाद, असहिष्‍णुता के नाम पर देश में हो रहे विरोध , सेंसर बोर्ड की हो रही आलोचना जैसे कई मुद्दों पर बात की।

Author नई दिल्‍ली | November 24, 2015 6:09 PM
आमिर खान से बातचीत करते न्‍यू मीडिया (इंडियन एक्‍सप्रेस) के पूर्णकालिक निदेशक और प्रमुख अनंत गोयनका। (एक्‍सप्रेस फोटो)

आमिर खान ने दुनिया भर में हो रही आतंकी घटनाओं को धर्म से अलग कर देखने की जरूरत बताई है। सोमवार को आठवें रामनाथ गोयनका अवॉर्ड्स फंक्‍शन में उन्‍होंने कहा, ‘जब आप किसी को हिंसा करते देखते हैं तो पहली गलती ये होती है कि उसे इस्‍लामिक/हिंदू आतंकवादी कहा जाता है। यह गलत है।’ जब उनसे पूछा गया कि जब पेरिस हमले के दौरान हमलावरों के हाथों में कुरान देखा गया तो उन्‍हें क्‍यों लगता है कि आतंकवाद को इस्‍लाम से जोड़ना सही नहीं है, तो वह बोले- हाथ में कुरान लेकर कत्‍ल करने वाला खुद तो सोच सकता है कि वह मुसलमान है, पर असल में वह मुु‍स्लिम नहीं है। वह एक आतंकवादी है, और कुछ नहीं।

आमिर ने असहिष्‍णुता के मुद्दे पर भी बात की। उन्‍होंने खुलासा किया कि एक बार तो उनकी पत्‍नी किरन उनसे भारत छोड़ने की बात की। आमिर ने कहा, ‘पहली बार किरन ने देश छोड़ने की बात कही थी। उनके मन में अपने बच्‍चों को लेकर डर है।’ उन्‍होंने कहा कि यह उनके लिए चिंता की बात है। आमिर के इस बयान के बाद मंगलवार को हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने मुंबई में उनके घर के बाहर प्रदर्शन किया

देखें रामनाथ गोयनका अवॉर्ड फंक्‍शन का वीडियो, आमिर से बातचीत का वीडियो 1:13:18 से शुरू है

सेंसर बोर्ड की हो रही आलोचना के बारे में आमिर ने कहा कि बीते 6-8 महीने में उनका नजरिया काफी आक्रामक हो गया है। हालांकि, हल्‍के-फुल्‍के अंदाज में उन्‍होंने कहा कि जब तक उन्‍हें शूटिंग के दौरान किस करने का मौका मिलता रहेगा, उन्‍हें इस बात की चिंता नहीं रहेगी कि बाद में सेंसर बोर्ड क्‍या करेगा। आमिर ने असहिष्‍णुता के मुद्दे पर विरोध के तौर पर वैज्ञानिकों, साहित्‍यकारों, फिल्‍मकारों द्वारा अवॉर्ड्स लौटाए जाने के कदम को सही ठहराया। उन्‍होंने कहा- रचनात्‍मक लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे जो सोचते हैं उसे अभिव्‍यक्‍त करें। अनेक ऐसे लोगों – इतिहासकारों, वैज्ञानिकों – के मन में एक खास विचार मजबूत हो रहा होगा। उन्‍हें लगा होगा कि उस विचार को व्‍यक्‍त करना जरूरी है। रचनात्‍मक लोगों के लिए अपना असंतोष, अपनी निराशा जाहिर करने का एक तरीका अवॉर्ड लौटाने का भी है। मेरी राय में अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का यह एक जरिया है।  जब उनसे पूछा गया कि क्‍या आप विरोध का समर्थन करेंगे, तो उनका कहना था- जब तक इसमें हिंसा नहीं हो, तक तक उन्‍हें इससे कोई विरोध नहीं होगा। उन्‍होंने कहा, ‘हर किसी को विरोध का हक है। वह कानून हाथ में लिए बिना जो भी तरीका उचित समझता है, उससे विरोध कर सकता है।’

इससे पहले वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बेहतरीन पत्रकारिता के लिए कुल 56 पत्रकारों को 2013 और 2014 का रामनाथ गोयनका एक्‍सलेंस इन जर्नलिज्‍म अवॉर्ड्स से सम्‍मानित किया। यह सम्‍मान प्रिंट और टीवी पत्रकारिता (किसी भी भारतीय भाषा में) में शानदार काम करने के लिए दिया जाता है।

नामी पत्रकार, स्‍तंभकार और लेखक कुलदीप नय्यर को पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए आठवें प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका एक्‍सलेंस अवॉर्ड्स में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्‍मानित किया गया। नय्यर इंडियन एक्‍सप्रेस के भी संपादक रहे हैं। वह इमरजेंसी के दौरान सरकार की ज्‍यादती का विरोध करने के कारण मेंटनेंस ऑफ इंटरनल सिक्‍योरिटी एक्‍ट (मीसा) के तहत जेल भी गए थे।

अवॉर्ड्स किन्‍हें मिला और इनसे जुड़े क्‍या ट्वीट्स हो रहे हैं, यहां जानें

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