वायनाड भूस्खलन के बाद हालात से उबरने के लंबे दौर का मार्मिक विवरण; राजस्थान में आदिवासी परिवारों को निशाना बनाने वाले बाल तस्करी के संगठित अपराध का पर्दाफाश; देश में किराए की कोख के व्यापार से जुड़ी गहन पड़ताल; और, पुणे के छावनी इलाके में ब्रिटिश काल के बंगलों की अवैध बिक्री का खुलासा।
ये कुछ ऐसे समाचार हैं, जिन्हें वर्ष 2024 के रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से नवाजा गया है। यह देश का सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता सम्मान है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन विजेताओं को ये पुरस्कार प्रदान करेंगे। राधाकृष्णन शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।
रामनाथ गोयनका फाउंडेशन के द्वारा स्थापित ये पुरस्कार पत्रकारिता के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ चुनी गई प्रविष्टियों को दिए जाते हैं। खोजी पत्रकारिता, राजनीति और सरकार, फीचर लेखन, किताबें, खेल और क्षेत्रीय भाषा की पत्रकारिता सहित प्रिंट, डिजिटल और प्रसारण मंचों के लिए 18 श्रेणियों में 25 पुरस्कार दिए जाते हैं।
इन पुरस्कारों के 20वें संस्करण के निर्णायक मंडल में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएन श्रीकृष्ण; ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर सी राज कुमार; इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रोफेसर केजी सुरेश; रोहिणी नीलेकणी फिलैंथ्रॉपीज की अध्यक्ष और एकस्टेप की सह-संस्थापक एवं निदेशक रोहिणी नीलेकणी; और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ एसवाई कुरैशी शामिल हैं।
निर्णायक मंडल के लिए विजेताओं का चयन करना आसान नहीं था। सुरेश ने कहा, ‘हर प्रविष्टि अच्छी थी… कई श्रेणियों में चुनौती करीबी रही।’ उन्होंने कहा, ‘विजेताओं ने कुछ ही अंकों के अंतर से जीत हासिल की… सभी प्रविष्टियां समान रूप से अच्छी थीं।’ उन्होंने बताया, मूल्यांकन के दौरान यह देखा गया कि खबर का असर क्या रहा और पत्रकार ने कितनी कठिनाई से खबर निकाली।
पत्रकारिता में उभरते रुझानों को लेकर सुरेश ने कहा, ‘आजकल कई युवा पर्यावरण, स्वास्थ्य और भूमि जैसे पारंपरिक मुद्दों के साथ ही साइबर सुरक्षा और संरक्षा जैसे नए क्षेत्रों में भी काम कर रहे हैं।’ निर्णायक मंडल सदस्य के तौर पर अपने अनुभव के बारे में नीलेकणी ने कहा, “प्रविष्टियों को पढ़ना भारत दर्शन करने जैसा था – ऐसी चीजें पढ़ने को मिलीं, जिन्होंने चौंकाया, रुलाया। भगवान का शुक्र है कि पत्रकारिता अभी भी अच्छी स्थिति में है और जीवंत है।”
उन्होंने मीडिया के बदलते परिदृश्य की ओर भी इशारा किया। नीलेकणी ने कहा, “सोशल मीडिया पर हर कोई खुद को पत्रकार समझता है। इसने ज्ञान के प्रसार को लोकतांत्रिक बना दिया है। यह अच्छी बात है। हालांकि, मेरा सपना है कि पारंपरिक पत्रकारिता और खोजी पत्रकारिता को अधिक स्थान मिले।” न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण ने प्रविष्टियों की शैली में आए बदलाव की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने कहा, ‘इस वर्ष की प्रविष्टियां अधिक विषय केंद्रित थीं, वर्णन में नाटकीयता दिखी।’
पत्रकारिता के पेशे को लेकर चिंता के बावजूद, सुरेश इसके भविष्य को लेकर आशावादी हैं। उन्होंने कहा, ‘हमेशा से मेरा मानना रहा है कि भले प्रारूप बदल गया हो, मंच बदल गए हों, तकनीक बदल गई हो – लेकिन पत्रकारिता का मूल तत्व बना रहता है।’
