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एक मुठभेड़ की कहानी: सिपाही बनी दुल्‍हन, बाकी पुलिसवाले बाराती और 20 मिनट में हो गया था दुर्दांत अपराधी का काम तमाम

तब लखनऊ के एसएसपी रहे आईपीएस नवनीत सिकेरा कहते हैं, ''रमेश कालिया 2004 के दौर में लखनऊ का सबसे बड़ा माफिया डॉन था। उसका आतंक इतना ज्‍यादा था कि किसी की हिम्‍मत नहीं पड़ती थी कि उसके खिलाफ कोई कुछ बोले।''

Author Updated: February 23, 2018 5:49 PM
ऑपरेशन कालिया को लीड करने वाले आईपीएस नवनीत सिकेरा। (Photo: navsekera/Facebook)

रमेश यादव उर्फ रमेश कालिया, यूपी का वह माफिया जिसने इक्‍कीसवीं सदी की शुरुआत में ठेकेदारों और बिल्‍डरों की रुह कंपा रखी थी। उसका एनकाउंटर करने के लिए पुलिस को अनोखा रास्‍ता अख्तियार करना पड़ा। महिला कांस्‍टेबल दुल्‍हन बनीं तो इंस्‍पेक्‍टर ने दूल्‍हे का वेश धरा। बाकी पुलिसकर्मी बाराती बनकर कालिया के ठिकाने पर पहुंचे और उसका काम तमाम कर दिया। सपा के एक नेता की गाड़ी को सरेआम रोककर हत्‍या करने से कालिया सुर्खियों में आया। आईपीएस नवनीत सिकेरा ने आज तक से कहा, ”रमेश कालिया 2004 के दौर में लखनऊ का सबसे बड़ा माफिया डॉन था। उसका आतंक इतना ज्‍यादा था कि किसी की हिम्‍मत नहीं पड़ती थी कि उसके खिलाफ कोई कुछ बोले।” उस समय यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी और उनके सामने चुनौती कालिया पर नकेल कसने की थी। यादव ने डीजीपी को बुलाकार माफियाओं पर काबू करने को कहा। इसी बैठक में मुजफ्फरनगर में तैनात रहे नवनीत सिकेरा को लखनऊ बुलाने पर सहमति बनी। राजधानी के एसएसपी बनकर आए सिकेरा की छवि तेजतर्रार पुलिस अफसर की थी। सिकेरा ने टॉप 10 माफियाओं की लिस्‍ट मंगाई और धरपकड़ शुरू हो गई।

उस समय यूपी में रेलवे के ठेकों में सपा के बाहुबली एमएलसी अजीत सिंह का सिक्‍का चलता था, मगर वह भी रमेश कालिया से घबराता था। उन्‍नाव में अजीत के गेस्‍ट हाउस पर उनके जन्‍मदिन की पार्टी चल रही थी। सब नशे में धुत होकर हवा में फायरिंग कर रहे थे। अचानक एक गोली अजीत सिंह के सिर के आर-पार हो जाती है। अजीत सिंह को अस्‍पताल ले जाया जाता है, मगर उनकी मौत हो जाती है। पुलिस रमेश कालिया की तलाश में जुट गई। इस खुफिया ऑपरेशन को नाम दिया गया ‘ऑपरेशन कालिया’।

कालिया की लोकेशन उन्‍नाव पहुंची मगर कई ठिकानों पर रेड के बावजूद नाकामी हाथ लगी। 10 फरवरी 2015 को कालिया ने एक बिल्‍डर को फोन कर 5 लाख की रंगदारी मांगी। कालिया ने बिल्‍डर को नीलमत्‍था के एक सुनसान इलाके में पैसे लेकर बुलाया। पुलिस की परेशानी ये थी कि वह सीधे घुसती तो सबको पता चल जाता। पुलिस ने प्‍लान बनाया कि वह बारात की शक्‍ल में धावा बोलेंगे। महिला पुलिसकर्मियों को साथ में लेकर प्‍लान बनाया गया।

12 फरवरी, 2005 को पुलिसकर्मी बारातियों की तरह सज-धजकर तैयार हुए। कपड़ों में पिस्‍तौलें छिपाई गईं और कालिया की निर्माणाधीन कोठी की घेराबंदी शुरू कर दी गई। कालिया की तरफ से फायरिंग शुरू हुई और पुलिस ने 20 मिनट में सबका काम तमाम कर दिया। इस पूरे एनकाउंटर में 2 पुलिसकर्मी भी घायल हुए।

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