दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को बड़ी संख्या में सवर्ण समाज (जनरल कैटेगरी) के लोगों ने जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन को लेकर मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री रामदास अठावले ने शनिवार को सवर्ण समाज के इन लोगों को देशद्रोही बता दिया।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, उनसे इस आंदोलन को लेकर जब सवाल किया गया कि इस पर उनकी क्या राय है तो केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, मुझे लगता है कि आरक्षण खत्म करने का कोई भी अधिकार किसी को नहीं है। यह संवैधानिक अधिकार है। बाबा साहेब अंबेडकर ने संविधान में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करने की कोशिश की थी, और OBC के लिए आरक्षण V.P. सिंह सरकार के समय में दिया गया था।”

आगे उन्होंने कहा, “मोदी सरकार ने जनरल कैटेगरी के ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) को भी 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है तो हर जाति को आरक्षण मिलता है तो आरक्षण खत्म करने का अधिकार नहीं है। यह संवैधानिक अधिकार है। और ऐसी मांग करने वाले राष्ट्रद्रोही लोग हैं। साथ ही इन लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।”

ब्रजेश पाठक से मिले हर्ष दूबे

इसी बीच शनिवार को ही यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आंदोलनकारियों की अगुवाई करने वाले हर्ष दुबे और कुछ लोगों से बात की। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेस कर बताया कि आंदोलनकारियों ने हमें एक पत्र दिया है, जिसे उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को भेजा है। ब्रजेश पाठक ने दावा किया केंद्रीय नेतृत्व ने भरोसा दिया है कि वह इन मांगो पर गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि दो दिन बाद प्रदर्शनकारियों की केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक होगी।

हर्ष दूबे के पिता को विधायक टिकट मिल सकता है- अजीत भारती का दावा

इसके बाद अजीत भारती का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने दावा करते हुए शुभकामनाएं दी कि हर्ष दूबे के पिता को विधायक टिकट मिलने वाला है। अजीत भारती ने यह भी कहा कि रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ का हर्ष दुबे के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को उनका कोई समर्थन नहीं है। आगे कहा, “हम इस आंदोलन से वैचारिक रूप से जुड़े थे, इसलिए कल मेरी उपस्थिति वहाँ थी। हमने ना तो यह आंदोलन बुलाया था, ना प्रेस कॉन्फ्रेंस।”

आंदोलन किसी नेता का मोहताज नहीं- रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन

इस पर रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन के सोशल मीडिया हैंडल पर री-ट्वीट कर कहा गया कि हर्ष दूबे सिर्फ हमारे वैचारिक मित्र हैं, ये आंदोलन किसी नेता का मोहताज नहीं। कल की भीड़ से आपको इस बात का अंदाजा हो ही गया होगा। आगे कहा कि अजीत भारती, नेहा दास, महिपाल सिंह, अनिल मिश्रा के साथ साथ हर्ष दुबे का भी छोटा सा योगदान था, एक व्यक्ति के न होने से आंदोलन रुकते नहीं है। आंदोलन हमारी मांगो के पूरा होने तक जारी रहेगा।

शुक्रवार को हुआ था जंतर-मंतर पर आंदोलन

बता दें कि शुक्रवार को हुए आंदोलन में प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि आरक्षण जाति आधारित नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशंस का भी विरोध किया।

प्रदर्शनकारियों का भी यही कहना था कि गरीबी किसी की जाति देखकर नहीं आती, ऐसे में सरकारी योजनाओं, शिक्षा, छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाओं का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को मिलना चाहिए न कि जाति व्यवस्था के हिसाब से।

आर्थिक स्थिति बने आरक्षण का आधार

इस आंदोलन की प्रमुख मांग यह भी थी कि सरकारी मदद का आधार आर्थिक स्थिति को बनाया जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारी का यह भी कहना था कि गांवों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा का हक मिलना चाहिए, जिससे वे डॉक्टर, इंजीनियर और दूसरे पेशेवर बन सकें। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर सरकार विकसित भारत का लक्ष्य लेकर चल रही है तो प्रतिभा और आर्थिक जरूरत के बीच संतुलन बनाना भी अहम है।

प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग की, इस पर उनकी दलील दी कि आरक्षण का लाभ असल में सबसे पिछड़े और जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है या नहीं, इसकी समीक्षा होनी ही चाहिए।

इसके लिए कोटा में कोटा और क्रीमी लेयर जैसे प्रावधान पर भी बात की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना था कि आरक्षण के लाभ को सभी के लिए सुनिश्चित करने के लिए सरकार को पूरे सिस्टम की पुन: समीक्षा करनी चाहिए।

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