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लोकायुक्त की रिपोर्टों को ठंडे बस्ते में डाले जाने से राज्यपाल राम नाइक चिन्तित

लखनऊ। सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी :सपा: द्वारा राज्यपाल संस्था को ‘संवैधानिक सीमाओं’ के दायरे में रहने की जरूरत बताये जाने के बीच उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने सूबे के कई पूर्व मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में लोकायुक्त की जांच रिपोर्टों को ठंडे बस्ते में डाल दिये जाने पर गहरी […]

Author Published on: October 10, 2014 12:51 PM

लखनऊ। सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी :सपा: द्वारा राज्यपाल संस्था को ‘संवैधानिक सीमाओं’ के दायरे में रहने की जरूरत बताये जाने के बीच उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने सूबे के कई पूर्व मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में लोकायुक्त की जांच रिपोर्टों को ठंडे बस्ते में डाल दिये जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने यहां तक कहा कि लोकायुक्त रिपोर्टों को लेकर सरकार के सुस्त रवैये को देखकर ऐसा लगता है कि वे रिपोर्टें महज लाइब्रेरी के लिये ही बनकर रह गयी हैं। अगर कार्रवाई ही नहीं होनी है तो लोकायुक्त संस्था का क्या मतलब है।

राज्यपाल नाइक ने ‘भाषा’ से विशेष बातचीत में कहा कि प्रदेश के लोकायुक्त एन. के. मेहरोत्रा ने पूर्ववर्ती सरकार के कई मंत्रियों और नौकरशाहों के खिलाफ भ्रष्टाचार के अनेक महत्वपूर्ण प्रकरणों की जांच रिपोर्टें प्रदेश सरकार को काफी पहले कार्रवाई के लिये भेजी थीं लेकिन अभी तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बुलाकर कहा भी ‘‘आश्चर्य लग रहा है कि लोकायुक्त की कई रिपोर्टं सरकार को भेजी गयीं और कोई एक्शन नहीं लिया गया है। एक्शन होना चाहिए।’’

राज्यपाल ने कहा कि बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने यह स्वीकार भी किया कि रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं हुई है। मुझे उम्मीद है कि सरकार अब इस दिशा में ‘एक्शन’ लेगी।

यह पूछे जाने पर कि लोकायुक्त अब तक सरकार को कितनी रिपोर्टें भेज चुके हैं और उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, नाइक ने कहा ‘‘वर्ष 2014 में लोकायुक्त द्वारा सरकार को 11 रिपोर्टें कार्रवाई के लिये भेजी गयीं, इनमें से नौ मामलों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया।’’

राज्यपाल का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब सत्तारूढ़ सपा ने अपने राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में राज्यपाल संस्था को संवैधानिक सीमा में रहने की वकालत की है।

सपा ने कल पारित अपने प्रस्ताव में कहा ‘‘राज्यपाल का पद एक गरिमामय पद होता है और उस पर अनेक संवैधानिक सीमाएं होती हैं। वह किसी मुख्यमंत्री की तरह ना कार्य कर सकता है और ना ही बयानबाजी कर सकता है … सीमा से बाहर जाकर कार्य करने से संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा को ठेस पहुंचती है।’’

प्रदेश की खराब कानून-व्यवस्था को लेकर मुखर रहे राज्यपाल ने इस खामी के कारणों पर विस्तार से कुछ भी कहने से मना कर दिया लेकिन इतना जरूर कहा ‘‘प्रदेश की कानून-व्यवस्था एक गम्भीर मुद्दा है लेकिन मैं यह नहीं कहूंगा कि इसके लिये कौन जिम्मेदार है और कौन नहीं वह एक राजनीतिक बयान हो जाएगा।’’

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर राज्य सरकार को बर्खास्त करने की बहुजन समाज पार्टी :बसपा: की लगातार मांग पर नाइक ने कहा कि अभी तक किसी ने उनसे ऐसी मांग नहीं की है। बसपा ने इस बारे में जितनी बार कहा, वह उनके राज्यपाल पद पर नियुक्ति से पहले कहा।

उन्होंने कहा कि उनका ध्यान सभी राजनीतिक दलों के साथ अच्छे सम्बन्ध कायम करने पर है, ताकि राज्य का विकास अच्छे तरीके से हो सके।
राज्यपाल ने कहा ‘‘मेरा राज्यपाल पद पर आसीन होना किसी के भी लिए डर की वजह नहीं होनी चाहिए राज्यपाल बनने के बाद मैंने लगभग सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात की है’’

 

 

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