ताज़ा खबर
 

राम मनोहर लोहिया अस्पताल: कोरोना वार्ड के आसपास बच्चों और महिलाओं के वार्ड

स्किन ओपीडी तो नई इमरजंसी वार्ड व ट्रॉमा सेंटर के पास पीछे की ओर बनाई गई है लेकिन यहां से कोरोना के संदिग्ध मरीजों को वार्ड ब्लाक के अंदर पांचवी मंजिल तक जाने के लिए काफी दूसरे मरीजों का इलाका यानी वार्ड पार करना पड़ता हैं।

पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज स्थित एक सरकारी स्कूल में पलायन करने वालों को ठहराने की व्यवस्था की गई है।

राममनोहर लोहिया अस्पताल में रविवार को यो तों सन्नाटा दिखा लेकिन यहा पहले से भर्ती मरीजों के इक्का-दुक्का परिजन इधर से उधर आते-जाते नजर आ रहे थे। गेट नंबर चार पर ही सुरक्षा गार्ड उनको रोक कर तहकीकात करने के बाद जाने दे रहा है। साथ ही हिदायत भी देता है कि पांच नंबर की ओर नहीं जाइएगा।

पांच नंबर क्या है पूछने पर पता चला कि यह तो वार्ड नंबर पांच की बात कर रहा है। पांच नंबर ही वह वार्ड है जो पहले स्वाइन फ्लू वार्ड था अब जहां कोरोना मरीज भर्ती हैं। 30 बस्तरों की क्षमता वाले इस वार्ड को ही कोरोना का पृथक वार्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कहने को तो यहां इस ओर न तो किसी कर्मचारी को जाने की छूट है न ही किसी दूसरे मरीजों के तीमारदारों को। लेकिन इस वार्ड में भर्ती होने वाले कोरोना के संदिग्धों को स्क्रिनिंग ओपीडी से वार्ड तक लाने के लिए अस्पस्ताल के अंदर काफी लंबा चक्कर लगा कर ले जाया जाता हैं।

स्किन ओपीडी तो नई इमरजंसी वार्ड व ट्रॉमा सेंटर के पास पीछे की ओर बनाई गई है लेकिन यहां से कोरोना के संदिग्ध मरीजों को वार्ड ब्लाक के अंदर पांचवी मंजिल तक जाने के लिए काफी दूसरे मरीजों का इलाका यानी वार्ड पार करना पड़ता हैं।

जिसमें कोरोना वार्ड है इस इमारत में पहली मंजिल पर सीसीयू है। इसके तीसरी व चौथी मंजिल पर बच्चों का वार्ड है। इसी में महिला वार्ड भी है। इसी तरह सात, आठ ,नौ व दस नंबर वार्ड मेडिसिन विभाग के मरीजों का है। इनकी लिफ्ट व रास्ते भी एक ही हैं। जिससे दूसरे मरीजों के इससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है। यहां बच्चा वार्ड में भर्ती मरीज के परिजन सुबोध ने कहा कि हालांकि वे लोग काफी एहितयात बरत रहे हैं लेकिन बच्चे का मामला है तो सांस अटकी रहती है। हालांकि कर्मचारी गार्ड साफ-सफाई में लगे हैं लेकिन बीमारी को लेकर हर कोई डरा हुआ है।

इसी वार्ड के एक अन्य तीमारदार मुकेश ने कहा कि वह तो दिन भर में कितनी दफा बच्चे को पोछता रहता है। लेकिन जब सुना कि हवा से भी बीमारी फैलती तब से तो कलेजा मानो मुंह को रहा है। सोच रहे हैं कि बच्चे कि छुट्टी करा के घर ही ले जाएं। उसके बाद भी अस्पताल प्रशासन की कोशिश थी कि वार्ड छह जो कि पांच नंबर के सामने है इसे भी खाली करा के वहां एक और कोरोना वार्ड बना दिया जाय। यहां के ईएनटी के मरीजों के या को हटा दया गया या तो उन्हे छुट्टी दे दी गई है और एनटी की सारी प्रकिया को रोक दिया गया।

इस बारे में बात करने पर अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ मीनाक्षी भारद्वाज ने भी माना कि बीच इमारत में वार्ड होने से दूसरे मरीजों के भी संक्रमण का खतरा है उन्होंने कहा कि इसीलिए हम अब कोरोना का नया वार्ड बाहर ही बना रहे हैं। यह अलग इमारत में होगा। इसके साथ ही गहन चिकित्सा कक्ष भी बना रहे हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App। जनसत्‍ता टेलीग्राम पर भी है, जुड़ने के ल‍िए क्‍ल‍िक करें।

Next Stories
1 Lock down in India: पैदल ही घर को निकल पड़ा मजदूर, 200Km बाद हाईवे पर ही तोड़ दिया दम
2 ‘दिल्ली ही नहीं रहेगी तो कहां बेचोगे अपना झूठ?’ कोरोना पर सियासी जंग में बीजेपी MP का केजरीवाल पर हमला, लोग बोले- ‘आप राजनीति के राखी सावंत’
3 ’21 दिनों के लॉकडाउन में नहीं सह सकते दो-दो सरकारें’, सुब्रमण्यम स्वामी बोले- सस्पेंड हो केजरीवाल सरकार, सेना करे सहयोग