राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 6 जुलाई को प्रस्तावित बैठक पर सबकी नज़र बनी हुई है। दान चोरी के कथित मामले की जांच के बीच यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, बैठक से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी अयोध्या पहुंचने लगे हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसे औपचारिक रूप से ट्रस्ट की बैठक घोषित किया जाएगा या नहीं।

दान चोरी मामले में 25 जून को एफआईआर दर्ज होने और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने इस्तीफे ट्रस्ट को सौंप दिए हैं। इससे पहले अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट ने कहा था कि दोनों के इस्तीफों पर फैसला अगली बैठक में लिया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रहे चंपत राय ने हाल के दिनों में खुद को मंदिर परिसर तक सीमित कर लिया है। अधिकारियों का दावा है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा मंदिर के प्रशासन से जुड़े प्रमुख लोग थे और गिरफ्तार किए गए आठों आरोपियों को जानते थे।

ट्रस्ट के भीतर इस बात की भी चर्चा है कि ट्रस्ट के उपनियमों के अनुसार किसी ट्रस्टी को जिम्मेदारी से हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। अन्यथा ट्रस्टी आजीवन सदस्य बना रहता है।

अब सबकी नजर 6 जुलाई की बैठक पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रस्ट इस्तीफों पर क्या फैसला लेगा और दान चोरी मामले के बाद आगे की रणनीति क्या होगी।

राम मंदिर दान विवाद: अब सुरक्षा कितनी मुस्तैद है, भक्त क्या बता रहे?

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी और गबन के मामले के बाद से सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है। अब दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए यूनिफॉर्म अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा उन्हें बार-बार तलाशी से गुजरना होगा। अगर किसी कर्मचारी को वॉशरूम भी जाना है, तब भी पूरे सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।

सीसीटीवी फुटेज में 5 अहम आरोपी कैश को छिपाते दिखे

अयोध्या के राम मंदिर से मिले सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे में मिले नकदी पैसे की कथित चोरी के आरोप में गिरफ्तार आठ में से कम से कम पांच लोग गिनती के दौरान कैश निकालते और छिपाते दिखे हैं। पुलिस के सूत्रों ने बताया कि राम मंदिर के पिलग्रिम फैसिलिटी सेंटर के 45 दिनों के फुटेज की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि गिनती करने वाले पांच कर्मचारी नोटों की गड्डियां निकाल रहे थे और उन्हें अपने कपड़ों या मोजों में छिपा रहे थे।