अयोध्या में श्री राम मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि इस बार मामला भूमि विवाद या मंदिर निर्माण का नहीं बल्कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी और उससे जुड़ी जांच का है। नियमित ऑडिट के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं से शुरू हुआ यह मामला अब एसआईटी जांच, गिरफ्तारियों, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफों और राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच चुका है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

मामले की शुरुआत मंदिर में आने वाले चढ़ावे के नियमित ऑडिट के दौरान हुई। ऑडिट में दानपात्र से प्राप्त नकदी और कुछ अन्य सामग्री के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी का संदेह जताया गया। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू हुई और ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर मामले की पड़ताल कराई। शुरुआती जांच के बाद मामला सार्वजनिक हुआ और उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी गठित कर जांच शुरू कर दी।

जांच में अब तक क्या-क्या हुआ?

एसआईटी ने राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान कई लोगों को जांच के दायरे में लिया गया और कुछ आरोपियों की निशानदेही पर नकदी व अन्य सामान बरामद होने के दावे भी सामने आए। बाद में पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर का नाम भी सामने आया।

जांच आगे बढ़ी तो चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। सार्वजनिक रूप से इसे निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और नैतिक जिम्मेदारी के कदम के रूप में पेश किया गया। हालांकि उस समय दोनों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। बाद में एसआईटी ने दोनों के बयान भी दर्ज किए।

ट्रस्ट का क्या कहना है?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने लगातार कहा है कि दान में मिली कई वस्तुओं के गायब होने के आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं। ट्रस्ट का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड सुरक्षित हैं, कई दावे भ्रामक हैं और जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है। ट्रस्ट ने यह भी कहा है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का वह समर्थन करता है।

राजनीतिक घमासान भी तेज

मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जांच की मांग की। इसके बाद भाजपा की ओर से भी कहा गया कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसी बीच सरकार ने एसआईटी जांच को आगे बढ़ाया।

6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में प्रशासनिक बदलावों पर निर्णय लिए गए और चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। अब पूरे मामले की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर है जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: अब तक कब-कब क्या-क्या हुआ?

7 जून 2026
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। इसके बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

10 जून 2026
भाजपा की ओर से भी कहा गया कि मामले की जांच होनी चाहिए। सरकार ने जांच एजेंसियों के स्तर पर कार्रवाई की बात कही।

13 जून 2026
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया। ट्रस्ट ने भी कहा कि तथ्यों को सामने लाने और भ्रम दूर करने के लिए जांच जरूरी है। जांच में दान की रकम गिनने वाले कर्मचारियों और उनके नेटवर्क की पड़ताल शुरू हुई।

15 जून 2026
एसआईटी अयोध्या पहुंची। मंदिर परिसर से दस्तावेज जुटाए गए और जांच औपचारिक रूप से आगे बढ़ी। सरकार ने शुरुआती और अंतिम रिपोर्ट तय समय में देने के निर्देश दिए।

17 जून 2026
ट्रस्ट ने बताया कि नियमित ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और कुछ सामग्री में गड़बड़ी का संदेह हुआ था। सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद आंतरिक जांच शुरू की गई, जिसके बाद मामला सार्वजनिक हुआ।

20 जून 2026 के आसपास
जांच के दौरान एसआईटी ने बड़ी संख्या में संदिग्धों से पूछताछ शुरू की। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक करीब 150 लोगों को जांच के दायरे में लिया गया और कुछ आरोपियों की निशानदेही पर नकदी व अन्य सामान बरामद होने का दावा किया गया।

25 जून 2026
चढ़ावा चोरी मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने दान चोरी के मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें चंपत राय के ड्राइवर का नाम भी सामने आया।

26 जून 2026
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया। सार्वजनिक रूप से इसे नैतिक जिम्मेदारी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के कदम के रूप में पेश किया गया। उस समय उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं थी।

27 जून 2026
जांच में सामने आया कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज सिर्फ लगभग 45 दिन पुरानी थी, इसलिए कथित अनियमितताओं की शुरुआत कब हुई, इसकी पुष्टि करना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

27–30 जून 2026
एसआईटी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के बयान दर्ज किए। विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि चंपत राय जांच में सहयोग कर रहे हैं और उनका नाम एफआईआर में नहीं है।

3 जुलाई 2026
ट्रस्ट की बैठक से पहले चंपत राय और अनिल मिश्रा से लिखित एवं मौखिक स्पष्टीकरण लेने की तैयारी की खबरें सामने आईं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कई आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दान में मिली वस्तुएं सुरक्षित हैं और गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है।

6 जुलाई 2026
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक हुई। इस बैठक में चंपत राय का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। इसके साथ ही नए महासचिव की नियुक्ति और ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव पर भी निर्णय लिया गया।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कई आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दान में मिली वस्तुएं सुरक्षित हैं और गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है। जांच अभी जारी है और एसआईटी की आखिरी रिपोर्ट 15 जुलाई तक आने की उम्मीद है।

राम मंदिर ट्रस्ट में पहली बार होगी CEO की नियुक्ति

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के प्रबंधन को और अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद सृजित करने का फैसला किया है। सोमवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे शामिल हैं। समिति CEO पद के लिए उपयुक्त नामों की सिफारिश करेगी।

देश के प्रमुख मंदिरों का प्रबंधन कैसे किया जाता है, अयोध्या का राम मंदिर उनसे कैसे अलग और किसके पास सबसे ज्यादा संपत्ति?

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने देश भर के मंदिरों में दिए जाने वाले दान और उनके प्रबंधन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। देश में अनुमानित 8-10 लाख मंदिर हैं। जिनमें से लगभग 4 लाख मंदिर और उनके ट्रस्ट राज्य सरकारों के विशेष धार्मिक कानूनों और भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत संचालित होते हैं। इन मंदिरों की अनुमानित संपत्ति 9 लाख करोड़ रुपये की है।