Himanta Biswa Sarma on Ram Mandir Donation Row: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा की चोरी से संबंधित मामले की वजह विश्व हिंदू परिषद, बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निशाना बनाया जा रहा है। इस मुद्दे पर इंडियन एक्सप्रेस के कार्यक्रम आईडिया एक्सचेंज में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से भी सवाल किया गया, जिस पर हिमंता ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर तंज कसा है, और कहा कि राम-राम का जाप करेंगे।

दरअसल, आईडिया एक्सचेंज में हिमंता बिस्वा सरमा से पूछा गया कि राम मंदिर चंदा चोरी विवाद के बारे में उनकी क्या राय है। पहली बार विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस और भाजपा के समर्थकों में गहरा मतभेद पैदा हो गया है, और इसका असर उत्तर प्रदेश चुनावों पर भी पड़ सकता है। इस पर हिमंता ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता है।

यूपी चुनाव पर कोई असर नहीं – हिमंता

असम के मुख्यमंत्री ने कहा, “ मुझे नहीं लगता कि इससे यूपी चुनाव पर असर पड़ेगा। जिन्होंने अपने जीवन में कभी राम मंदिर नहीं देखा, अब वे राम मंदिर के लिए नारे लगा रहे हैं। समाजवादी पार्टी राम मंदिर मुद्दे पर बात कर रही है। बात यहीं खत्म हो जाती है। जो लोग राम के अस्तित्व को नहीं मानते, मंदिर के उद्घाटन का औपचारिक निमंत्रण देने के बाद भी आप उद्घाटन में शामिल होने से इनकार कर देते हैं। अब वे इस मुद्दे को उठा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में कहा, “आज अजमेर शरीफ में भी 20 लाख रुपये की चोरी हुई। मैंने अभी इसके बारे में पढ़ा है। असम में मंदिरों में लूटपाट हो रही है। लोग मूर्तियां चुरा ले जाते हैं, जैसा कि मैं अभी कह रहा था, और बाद में पकड़े जाते हैं। तो, यह राम को बदनाम करने की साजिश है। अनियमितताएं होती हैं। कुछ शरारती लोगों ने ऐसा किया है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इसके लिए आप राम मंदिर को बदनाम करने का अभियान चलाएंगे?”

‘बदनामी के लिए अभियान चलाएंगे’

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “आज अखिलेश यादव राम मंदिर की बात कर रहे हैं। कम से कम इस घोटाले के कारण, यह अच्छा है कि आपने स्वीकार किया कि यह राम मंदिर है। इसलिए, मैं इससे अधिक प्रसन्न हूं। मुझे लगता है कि अधिकांश हिंदू अब बहुत खुश हैं कि राम ने चमत्कार किया और कांग्रेस और अखिलेश ने राम मंदिर को स्वीकार कर लिया। यह भी राम का चमत्कार है। यह राम की कृपा है। अब अखिलेश भी चुनाव में राम राम का जाप करेंगे। कांग्रेस भी राम राम का जाप करेगी। तो, यह राम का चमत्कार है।”

दल-बदल पर स्पष्ट किया अपना पक्ष

राम मंदिर चढ़ावे से संबंधित विवाद के अलावा राजनीतिक दल-बदल और व्यवहारिकता पर भी सवाल किए गए। इस पर मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा, “बीजेपी एक वैचारिक रूप से झुकाव रखने वाली पार्टी है। हम देश में दक्षिणपंथी प्रभाव का विस्तार करना चाहते हैं। इसलिए यह मेरा कर्तव्य है कि कांग्रेस में मौजूद किसी भी योग्य व्यक्ति को, या सीपीएम या सीपीआई के लोगों को दक्षिणपंथी पाले में लाया जाए और उन्हें वैचारिक रूप से हमारे प्रति अधिक झुकाव वाला बनाया जाए।”

हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने राजनीतिक एजेंडे के बारे में कहा, “मैं चाहता हूं कि भारत में हर कोई बीजेपी में हो। चाहे कुछ भी हो। मैं चाहता हूं कि हिंदुत्व फले-फूले। मैं चाहता हूं कि दक्षिणपंथी विचारधारा फले-फूले। अब समस्या टिके रहने की है क्योंकि अगर आप सत्ता के लिए आए हैं, तो आप टिक नहीं पाएंगे। इस पार्टी में आप दूसरी पार्टी की संस्कृति को साथ लेकर नहीं चल सकते।”

कांग्रेस का वामपंथ की तरफ बढ़ता झुकाव

इसके अलावा हिमंता बिस्वा सरमा से कांग्रेस की विचारधारा को लेकर भी एक सवाल किया गया। इस पर हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “मैं सीधे-सीधे कहूंगा, आप बस जेएनयू में लगाए गए नारे और राहुल गांधी के भाषण को देखिए। कांग्रेस कभी यह सवाल नहीं पूछती, “आपकी जाति क्या है?” राहुल गांधी एक रिपोर्टर से भी पूछते थे कि आपकी जाति क्या है? आपका मालिक क्या है? इसलिए ये उन्होंने आमतौर पर जेएनयू की वामपंथी छात्र राजनीति से उधार लिया है।”

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि जब कांग्रेस कर्नाटक अपना मुख्यमंत्री बदलती है। सिद्धारमैया को हटाकर डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाती है, तो जाति नहीं देखती है लेकिन आम रिपोर्टर से उसकी जाति पूछी जाती है। हिमंता ने कहा ये वामपंथी सोच है, कि वे जो सोचते हैं, वो अपने परिवार में नहीं लागू करते हैं, लेकिन आम जनमानस में उसी विचार को लागू करते हैं। कुछ वैसी ही कांग्रेस पार्टी के साथ भी है।”

हिमंता ने कहा, ‘कांग्रेस का नारा और आइसा (AISA) का डफली वाला नारा एक ही है। कोई अलग-अलग नहीं है। हम लोग कांग्रेस में जब थे, डफली कांग्रेस में कभी नहीं दिखी थी। मैंने कांग्रेस में 22 साल बिताए। कांग्रेस में कभी जातिवाद की बात नहीं होती थी। कांग्रेस में कभी ये सब आइडियोलॉजिकल शिफ्ट (वैचारिक बदलाव) उस तरफ नहीं होता था। कांग्रेस सेंट्रल राजनीतिक विचारधारा वाली पार्टी थी लेकिन अब ये बदल गया है।

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असम को राज्य की स्वदेशी आबादी का आत्मविश्वास बहाल करने के लिए एक “ध्रुवीकरण करने वाले व्यक्तित्व” की आवश्यकता थी और अब जबकि “लोगों को यह महसूस होता है कि ऐसी सरकार है जो केवल एक समुदाय का ही ध्यान नहीं रखेगी”, इसलिए अब ध्रुवीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है। यह बात मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कही। पढ़िए पूरी खबर…