अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी और गबन के मामले के बाद से सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है। अब दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए यूनिफॉर्म अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा उन्हें बार-बार तलाशी से गुजरना होगा। अगर किसी कर्मचारी को वॉशरूम भी जाना है, तब भी पूरे सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।

जानकारी के लिए बता दें कि राम मंदिर से करीब 200 मीटर दूर बने पिलग्रिम फैसिलिटेशन सेंटर (PFC) के बेसमेंट में चढ़ावे की गिनती की जाती है। मंदिर परिसर में रखी करीब 35 दान पेटियों से नकदी और कीमती सामान यहां लाया जाता है। गिनती दो शिफ्ट में होती है। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक चलती है। हर शिफ्ट में करीब 20 कर्मचारी गिनती का काम करते हैं।

इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिल्लू यादव और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।

इन सभी से पूछताछ जारी है। इस बीच राम मंदिर में भी माहौल बदल गया है। सबसे बड़ा बदलाव दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की यूनिफॉर्म को लेकर किया गया है। उन्हें आसमानी रंग का बिना जेब वाला गाउन दिया गया है। इसी यूनिफॉर्म को पहनकर कर्मचारियों को गिनती वाले कमरे के अंदर जाना होगा।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि दोनों शिफ्ट के कर्मचारियों की पहले तलाशी और सुरक्षा जांच होगी, उसके बाद ही उन्हें एंट्री मिलेगी। अगर ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी को वॉशरूम भी जाना होगा, तब भी उसे पूरी सुरक्षा प्रक्रिया से दोबारा गुजरना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि 3 जून को हुई अचानक जांच के दौरान राम मंदिर के दान से जुड़े विवाद का खुलासा हुआ था। गिनती करने वाले कर्मचारियों के वॉशरूम के वेंटिलेशन में नकदी छिपाकर रखी गई थी। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें कुछ खामियां भी सामने आईं। फिलहाल सभी कमियों को दूर कर सीसीटीवी व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई है। अधिकारी ने यह भी दावा किया कि दान की गिनती करने वालों के लिए तीन साल पहले ही यूनिफॉर्म लागू कर दी गई थी, लेकिन बाद में इसकी निगरानी नहीं हुई और कर्मचारी सामान्य कपड़ों में आने लगे।

वैसे सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं बदली है बल्कि राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के नजरिए में भी बदलाव देखने को मिला है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बिहार के पटना से आए श्रद्धालु संजीव राजन ने कहा, “इस बार मैंने दान नहीं किया। मेरे साथ आए लोगों ने भी दान नहीं किया। हमारी सोच बदल चुकी है। अब हम गरीबों की मदद करेंगे, अस्पतालों को दान देंगे। मंदिर तो बन चुका है। भगवान को पैसे, सोने-चांदी की क्या जरूरत है?”

वहीं, बिहार के सीतामढ़ी से आए रंजी पांडे की राय अलग थी। उन्होंने कहा, “राम के नाम पर दान देना हमारा कर्तव्य है। अब जो लोग इस पैसे का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें सजा देना भगवान राम का काम है।”

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